अहमदाबाद में बनाया गया पहला पेड़-पौधों वाला ग्रीन बस शेल्टर, पर्यावरण के अनुकूल है प्रायोगिक परियोजना
खबर सार :-
अहमदाबाद में बनाया गया पहला पेड़-पौधों वाला ग्रीन बस शेल्टर पूरी तरह से पर्यावरण के अनुकूल हैै। इसे पहला स्टॉपेज होने के कारण प्रायोगिक परियोजना माना जा रहा है।
खबर विस्तार : -
अहमदाबाद : अहमदाबाद में बनाया गया पहला पेड़-पौधों वाला ग्रीन बस शेल्टर पूरी तरह से पर्यावरण के अनुकूल हैै। इसे पहला स्टॉपेज होने के कारण प्रायोगिक परियोजना माना जा रहा है। पेड़-पौधों से बनाए गए बस शेल्टर तक आते ही यात्री फीलगुड महसूस करने लगते हैं। इसे अहमदाबाद में स्थापित कर इसकी सफलता परखी जाएगी। यह एक सार्वजनिक परिवहन संरचना को अधिक टिकाऊ बनाने में सफलता देगा। मौजूदा पेड़ों को संरक्षित करने के लिए इस परियोजना को शुरू किया गया है। यह एक नई और प्रायोगिक परियोजना है। इसमें पेड़-पौधों का सहारा लिया गया है। पहला ग्रीन बस शेल्टर अभी तो लोगों को खूब पसंद आ रहा है।
यह पुराने पेड़ को काटने से बचा लेता
यह शेल्टर अहमदाबाद नगर निगम द्वारा साबरमती क्षेत्र में राजुल पार्क के पास बनाया गया है। इस स्टेशन को सोसाइटी के पास अचेर एएमटीएस स्टेशन पर विकसित किया गया है। इसमें पुराने पेड़ को हटाया नहीं गया है। उसे नया आकार दिया गया है। पारंपरिक बस शेल्टरों से यह अलग है। इसमें ज्यादा खर्च भी नहीं आता है। यह पुराने पेड़ को काटने से बचा लेता है। इस संरचना को दशकों पुराने पेड़ के चारों ओर सजाया गया है। इससे यात्रियों को बस का इंतजार करते समय परेशानी नहीं होगी। इसमें प्राकृतिक छाया के अलावा सुखद वायु का लाभ मिलता है।
समय के साथ और अधिक हरा-भरा होगा
परियोजना के संबंध में महापौर हितेश बरोट और नगर आयुक्त बंछनिधि पाणि को लोगों की ओर से धन्यवाद कहा जा रहा है। साथ ही निगम के स्थायी समिति के अध्यक्ष कमलेश पटेल और अन्य नगर निगम अधिकारियों के मार्गदर्शन में हुए काम को सभी सराह रहे हैं। पर्यावरण के अनुकूल माने जाने वाले शेल्टर को आरामदायक भी कहा जा रहा है। अभी इसको देखने के लिए भी लोग आते हैं। क्योंकि यह एक आकर्षक सार्वजनिक परिवहन प्रणाली बनाने के प्रयासों के अंतर्गत गतिशील है। एएमसी ने कहा कि शेल्टर को इस तरह से डिजाइन किया गया है, जिससे समय के साथ और अधिक हरा-भरा हो जाएगा। यहां लगाए गए पेड़ विशेष रूप से चयनित हैं। इनमें श्वर्नाेनिया एलिप्टिका लता प्रमुख हैं। इनके पौधों को आने वाले महीनों में छत पर प्राकृतिक रूप से लगाकर फैलाया जाएगा।
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वनस्पति छत को ढक लेगी
पूरी तरह से विकसित होने पर, वनस्पति छत को ढक लेगी। अभी यह कोशिश का एक ही नजारा है। इसमें अतिरिक्त छाया, सतह का तापमान नियंत्रण, आसपास की हवा की गुणवत्ता में सुधार के अलावा एक हरा-भरा सार्वजनिक स्थान बनाने के लिए प्रयास चल रहे हैं। बस शेल्टर का निर्माण टिकाऊ है। इसमें स्थायी सामग्रियों को लगाया गया है। इसकी दोहरी परत वाली छत हैै। इसमें मौसम-प्रतिरोधी फाइबर-प्रबलित प्लास्टिक शीट और सीमेंट शीट बोर्ड का संयोजन है। यह सब आंतरिक तापमान को कम करने में सहायक होते हैं। माइल्ड स्टील के पोल पाउडर-कोटेड होते हैं। यह संरचना को सहारा देते हैं। इसमें यात्रियों के बैठने के लिए एर्गाेनोमिक हाई-प्रेशर लैमिनेट बेंच की व्यवस्था की गई हैं। पेड़ की सुरक्षा और उसकी बनावट में नुकसान नहीं आएगा। इसके चारों ओर एक आरसीसी प्लेटफॉर्म भी बनाया गया है। यह इनको मजबूती देगा। यानी हम कह सकते हैं कि केवल पेड़ लगाकर एक दृष्य बनाने की जगह सुविधाजनक और पर्यावरण के अनुकूल बनाया है। इसमें तजुर्बा और वैज्ञानिक शोध भी शामिल किए गए हैं।
FAQ...
1. वास्तव में स्टेशन पर्यावरण के अनुकूल है?
इसमें मौसम-प्रतिरोधी फाइबर-प्रबलित प्लास्टिक शीट और सीमेंट शीट बोर्ड का लगाया जाता है। इनसे आंतरिक तापमान कम करने में मदद मिलती है। इसके साथ ही पेड़ और पौधों की छाया का भी प्रभाव रहता है। यह काफी सोच विचार का नतीजा है।
2. क्या इस तरह के प्रयोग होने चाहिए?
इस तरह के प्रयोग जरूरी हैं। प्रत्येक शहर में ऐसे स्थान होते हैं, जहां यह सुविधा दी जा सकती है। इससे एक सुंदर दृष्य भी मिल जाएगा। अभी तक यह पहला प्रयोग है। छोटी जगह में इसे तैयार करने में समय कम लगता है। वैसे भी पेड़ लगाने के साथ एक काम और बन जाएगा।
3. क्या इसमें तकनीकी काफी सस्ती है
यह तकनीकी सस्ती नहीं है। हालांकि इसे छोटी जगह में बनाया गया है। इसके चारों ओर एक आरसीसी प्लेटफॉर्म भी बनाया गया है। बैठने के लिए एर्गाेनोमिक हाई-प्रेशर लैमिनेट बेंच की व्यवस्था की गई हैं। अभी लताएं लगाई और फैलाई जाएंगी। इसलिए इसे सस्ती नहीं कह सकते हैं।
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