‘एक शिक्षक–एक वृक्ष’ अभियान: शाहपुरा में शिक्षा, संस्कार और पर्यावरण संरक्षण का अनूठा संगम

खबर सार :-

अभियान के दौरान महाविद्यालय परिसर में विभिन्न प्रजातियों के औषधीय एवं छायादार पौधों का रोपण किया गया। विद्यार्थियों और शिक्षकों ने पौधों को पानी देकर उनकी सुरक्षा एवं नियमित देखभाल का सामूहिक संकल्प लिया। कई विद्यार्थियों ने स्वयं पौधों की जिम्मेदारी लेने की घोषणा की और उन्हें पूर्ण विकसित वृक्ष बनाने का वचन दिया।
‘एक शिक्षक–एक वृक्ष’ अभियान: शाहपुरा में शिक्षा, संस्कार और पर्यावरण संरक्षण का अनूठा संगम

खबर विस्तार : -

भीलवाड़ाः राजस्थान के भीलवाड़ा जिले के शाहपुरा स्थित श्री प्रताप सिंह बारहठ राजकीय महाविद्यालय में पर्यावरण संरक्षण, शिक्षा और सामाजिक उत्तरदायित्व का अनूठा संगम देखने को मिला। अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ, उच्च शिक्षा राजस्थान की शाहपुरा इकाई के तत्वावधान में आयोजित ‘एक शिक्षक–एक वृक्ष’ देशव्यापी अभियान के अंतर्गत सोमवार को भव्य वृक्षारोपण कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य केवल पौधे लगाना नहीं, बल्कि शिक्षकों और विद्यार्थियों में प्रकृति संरक्षण के प्रति जिम्मेदारी की भावना विकसित करना और पर्यावरण संरक्षण को जनभागीदारी का अभियान बनाना था।

बदलते पर्यावरणीय परिदृश्य, बढ़ते तापमान, जलवायु परिवर्तन और प्राकृतिक संसाधनों पर बढ़ते दबाव के बीच आयोजित इस कार्यक्रम ने समाज को यह संदेश दिया कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकारों की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक का नैतिक कर्तव्य है। कार्यक्रम में शिक्षकों, कर्मचारियों और विद्यार्थियों की बड़ी भागीदारी ने इसे एक जनआंदोलन का स्वरूप प्रदान किया।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सहक्षेत्र कार्यवाह (राजस्थान क्षेत्र) गेंदालाल रहे। उनके साथ विभाग प्रचारक दीपक तथा जिला प्रचारक केशव विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ उच्च शिक्षा राजस्थान के जिला अध्यक्ष एवं महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. पुष्करराज मीणा ने की।

कार्यक्रम का शुभारंभ राष्ट्र के अमर क्रांतिकारी एवं वीर शहीद कुँवर प्रताप सिंह बारहठ की प्रतिमा पर माल्यार्पण एवं पुष्पांजलि अर्पित कर किया गया। सभी अतिथियों, शिक्षकों और विद्यार्थियों ने राष्ट्रनायक को श्रद्धांजलि देते हुए उनके आदर्शों पर चलने का संकल्प दोहराया। इसके बाद महाविद्यालय परिसर में औषधीय, फलदार और छायादार पौधों का सामूहिक रूप से रोपण किया गया। पूरे परिसर में "वृक्ष लगाओ–धरती बचाओ" और "हर शिक्षक–एक वृक्ष" जैसे नारों से वातावरण गूंज उठा।

मुख्य अतिथि गेंदालाल ने अपने संबोधन में कहा कि वर्तमान समय में पर्यावरण असंतुलन पूरी दुनिया के सामने सबसे बड़ी चुनौती बनकर उभरा है। बढ़ता तापमान, अनियमित वर्षा, वनों की लगातार कटाई और बढ़ता प्रदूषण मानव जीवन के लिए गंभीर संकट पैदा कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि यदि समय रहते प्रकृति के संरक्षण की दिशा में ठोस प्रयास नहीं किए गए तो आने वाली पीढ़ियों को इसका गंभीर खामियाजा भुगतना पड़ेगा।

उन्होंने कहा कि ‘एक शिक्षक–एक वृक्ष’ केवल औपचारिक अभियान नहीं, बल्कि धरती माता के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का एक सशक्त माध्यम है। शिक्षक समाज का मार्गदर्शक होता है और यदि प्रत्येक शिक्षक एक पौधा लगाकर उसके संरक्षण का संकल्प ले, तो समाज में पर्यावरण संरक्षण की व्यापक चेतना विकसित की जा सकती है। उन्होंने कहा कि एक विकसित वृक्ष केवल ऑक्सीजन ही नहीं देता, बल्कि जल संरक्षण, जैव विविधता, मिट्टी की उर्वरता और स्वस्थ जीवन का आधार भी बनता है।

उन्होंने उपस्थित विद्यार्थियों से भी आह्वान किया कि वे पौधारोपण को केवल एक कार्यक्रम न मानें, बल्कि इसे जीवनशैली का हिस्सा बनाएं। उन्होंने कहा कि पौधा लगाना पहला कदम है, जबकि उसकी नियमित देखभाल करना वास्तविक पर्यावरण सेवा है।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए डॉ. पुष्करराज मीणा ने कहा कि अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ हमेशा राष्ट्रहित, समाजहित और पर्यावरण संरक्षण जैसे विषयों को प्राथमिकता देता रहा है। उन्होंने कहा कि शिक्षक का दायित्व केवल पाठ्यक्रम पढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि विद्यार्थियों में नैतिक मूल्यों, सामाजिक चेतना और पर्यावरणीय जिम्मेदारी का विकास करना भी उतना ही आवश्यक है।

उन्होंने कहा कि आज आवश्यकता केवल वृक्षारोपण करने की नहीं, बल्कि वृक्ष संरक्षण सुनिश्चित करने की है। यदि प्रत्येक शिक्षक और विद्यार्थी वर्ष में कम से कम एक पौधे को वृक्ष बनने तक सुरक्षित रखने का संकल्प ले, तो आने वाले वर्षों में पर्यावरण संरक्षण की दिशा में उल्लेखनीय परिवर्तन देखने को मिल सकता है। उन्होंने विद्यार्थियों से अपने घर, विद्यालय और आसपास के क्षेत्रों में अधिक से अधिक पौधे लगाने और उनके संरक्षण की जिम्मेदारी निभाने का आह्वान किया।

कार्यक्रम में विभाग प्रचारक दीपक और जिला प्रचारक केशव ने भी अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति में प्रकृति को सदैव पूजनीय माना गया है। पीपल, बरगद, नीम, तुलसी और अन्य वृक्ष केवल धार्मिक आस्था के प्रतीक नहीं हैं, बल्कि मानव जीवन के संरक्षक भी हैं। भारतीय परंपरा प्रकृति और मानव के बीच संतुलन बनाए रखने की प्रेरणा देती है। इसलिए वृक्षारोपण केवल पर्यावरणीय गतिविधि नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति और जीवन मूल्यों के संरक्षण का भी माध्यम है।

महासंघ के पदाधिकारियों ने बताया कि ‘एक शिक्षक–एक वृक्ष’ अभियान का उद्देश्य प्रत्येक शिक्षक को पर्यावरण संरक्षण से प्रत्यक्ष रूप से जोड़ना है, ताकि शिक्षा संस्थान केवल ज्ञान के केंद्र ही नहीं, बल्कि हरित, स्वच्छ और पर्यावरण-अनुकूल परिसरों के आदर्श भी बन सकें। अभियान के तहत प्रदेशभर के महाविद्यालयों और शिक्षण संस्थानों में हजारों पौधे लगाए जा रहे हैं, जिनकी नियमित देखभाल सुनिश्चित करने की भी योजना बनाई गई है।

कार्यक्रम में सह प्रचार प्रमुख धर्मनारायण वैष्णव, महाविद्यालय के सभी संकाय सदस्य, अधिकारी, कर्मचारी तथा बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे। सभी ने पर्यावरण संरक्षण को जनआंदोलन बनाने और लगाए गए पौधों की नियमित देखभाल करने की शपथ ली।

कार्यक्रम का संचालन एवं समन्वय इकाई सचिव डॉ. रंजीत जगरिया ने किया। उन्होंने सभी अतिथियों, शिक्षकों और विद्यार्थियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि पौधारोपण तभी सार्थक होगा, जब प्रत्येक पौधा सुरक्षित रहकर एक विशाल वृक्ष का रूप धारण करेगा। उन्होंने सभी से अपने जीवन में कम से कम एक वृक्ष को पूर्ण विकसित करने का संकल्प लेने का आग्रह किया।

कार्यक्रम के समापन पर महाविद्यालय परिसर हरियाली, पर्यावरण संरक्षण और राष्ट्र निर्माण के संदेश से सराबोर दिखाई दिया। ‘एक शिक्षक–एक वृक्ष’ अभियान ने यह साबित किया कि जब शिक्षक समाज पर्यावरण संरक्षण का नेतृत्व करता है, तो विद्यार्थी और समाज भी उसी दिशा में प्रेरित होकर आगे बढ़ते हैं। यह पहल केवल वृक्षारोपण तक सीमित नहीं रही, बल्कि प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता, सामाजिक उत्तरदायित्व और राष्ट्रहित की भावना को मजबूत करने वाला एक प्रेरणादायी अभियान बनकर उभरी।

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