अब AI संभालेगा जयपुर का ट्रैफिक, जानें किस तरह काम करेगा स्मार्ट सिस्टम

खबर सार :-

जयपुर की सड़कों पर ट्रैफिक जाम से राहत पाने को राजस्थान पुलिस एक बड़ा कदम उठाने जा रही है। अब जयपुर के 253 चैराहों पर AI पर आधारित स्मार्ट सिस्टम लगाए जाएंगे। ट्रैफिक पुलिस ने रामबाग सर्कल पर इस सिस्टम का सफल परीक्षण किया है।
अब AI संभालेगा जयपुर का ट्रैफिक, जानें किस तरह काम करेगा स्मार्ट सिस्टम

खबर विस्तार : -

जयपुर: राजस्थान पुलिस 'पिंक सिटी' यानी जयपुर की सड़कों को ट्रैफिक जाम और प्रदूषण से मुक्त करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठा रही है। पुलिस महानिदेशक (DGP) राजीव कुमार शर्मा की अगुवाई में जयपुर का ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम पारंपरिक फिक्स्ड-टाइमर सिस्टम से बदलकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर आधारित स्मार्ट सिस्टम में बदल दिया जाएगा।

डेटा कोर इन्फोटेक के सहयोग से जयपुर ट्रैफिक पुलिस ने शहर के सबसे व्यस्त चौराहों में से एक, रामबाग सर्कल पर 39 दिनों तक AI-आधारित इंटेलिजेंट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (ITMS) का सफल परीक्षण किया। परीक्षण के उत्साहजनक नतीजों के बाद, अब पुलिस कमिश्नरेट क्षेत्र के 423 चौराहों में से 253 चौराहों पर इस तकनीक को लागू करने की तैयारी चल रही है। इस पूरे प्रोजेक्ट की निगरानी ट्रैफिक DCP योगेश गोयल के नेतृत्व में की गई। परीक्षण की सफलता को देखते हुए, इस सिस्टम को चरणबद्ध तरीके से पूरे शहर में लागू करने का निर्णय लिया गया है।

अलग तरह से काम करेगा ITMS

डेटा कोर इन्फोटेक के डायरेक्टर बसंत गोस्वामी और ओजस शुक्ला ने बताया कि अभी ज्यादातर चौराहों पर रेड और ग्रीन सिग्नल के लिए पहले से तय टाइमिंग का इस्तेमाल होता है, चाहे एक सड़क पर ट्रैफिक कम हो और दूसरी पर बहुत ज्यादा जाम हो। नया AI-आधारित ITMS बिल्कुल अलग तरह से काम करेगा। 

24 घंटे ट्रैफिक के दबाव का विश्लेषण करेंगे कैमरे 

चौराहों पर लगे AI कैमरे 24 घंटे रियल-टाइम में गाड़ियों की संख्या, कतार की लंबाई और ट्रैफिक के दबाव का विश्लेषण करेंगे। यह सिस्टम अपने आप उस दिशा में ग्रीन सिग्नल का समय बढ़ा देगा जहां ट्रैफिक का दबाव ज्यादा है, और कम ट्रैफिक वाली दिशाओं के लिए समय कम कर देगा। यह पूरी प्रक्रिया बिना किसी मानवीय हस्तक्षेप के अपने आप चलेगी।

रामबाग सर्कल पर मिले शानदार नतीजे

3 जून से 11 जुलाई 2026 तक रामबाग सर्कल पर चलाए गए पायलट प्रोजेक्ट के दौरान AI सिस्टम ने शानदार नतीजे दिए। इस दौरान, सिस्टम ने बिना किसी मानवीय हस्तक्षेप के 4,88,140 से ज्यादा गाड़ियों की आवाजाही को सुचारू बनाया। परीक्षण के दौरान, वाहन चालकों का प्रति लेन 8 से 45 सेकंड का समय बचा, जबकि ग्रीन सिग्नल का औसत समय 33.63 सेकंड दर्ज किया गया। 

कार्बन डाइऑक्साइड का उत्सर्जन भी घटा

चौराहों पर गाड़ियों के बेकार खड़े रहने (आइडलिंग) का समय कम होने और ट्रैफिक का बहाव बेहतर होने से 39 दिनों में कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) उत्सर्जन में 2,535 किलोग्राम की कमी आई। यह औसतन हर दिन 65 किलोग्राम की कमी के बराबर है। 

नियमों को तोड़ने वालों के खिलाफ कार्रवाई

AI-बेस्ड सिस्टम सिर्फ ट्रैफिक ऑपरेशन तक ही सीमित नहीं रहेगा; यह ट्रैफिक नियमों को तोड़ने वालों के खिलाफ अपने-आप कार्रवाई भी करेगा। ट्रायल के दौरान, एक कैमरे ने रोजाना औसतन 4,200 गाड़ियों पर नजर रखी और सिस्टम ने उनमें से लगभग 450 गाड़ियों द्वारा नियम तोड़ने पर अपने-आप जुर्माना लगाने लायक रिकॉर्ड बनाए। यह सिस्टम तेजी से गाड़ी चलाने, रेड लाइट तोड़ने, गलत साइड से गाड़ी चलाने और लेन के नियमों को तोड़ने जैसी गलतियों का अपने-आप पता लगा लेगा। अगर किसी गाड़ी पर कोई जुर्माना बकाया है, तो नंबर प्लेट स्कैन होते ही कंट्रोल रूम को पूरी जानकारी मिल जाएगी। 

स्मार्ट सिटी मिशन के साथ जोड़ी जाएगी तकनीक

डेटा कोर इन्फोटेक के डायरेक्टरों ने कहा कि इस टेक्नोलॉजी को आगे चलकर स्मार्ट सिटी मिशन के साथ जोड़ा जाएगा। रामबाग सर्कल पर एक जंक्शन के सफल ऑटोनॉमस AI कंट्रोल के बाद, दूसरे चरण में कई जंक्शनों के बीच तालमेल (सिंक्रोनाइजेशन) लागू किया जाएगा। इस सिस्टम के तहत, एक चौराहे का AI दूसरे चौराहे के AI से बातचीत करेगा ताकि पूरे रास्ते पर ट्रैफ़िक का बहाव सही बना रहे।

"ग्रीन कॉरिडोर" बनाने का फीचर भी होगा शामिल

भविष्य में इसमें VIP मूवमेंट और इमरजेंसी सेवाओं जैसे फायर ब्रिगेड और एम्बुलेंस के लिए अपने-आप "ग्रीन कॉरिडोर" बनाने का फीचर भी शामिल किया जाएगा, ताकि इमरजेंसी के समय ये गाड़ियां ट्रैफिक जाम में न फंसें। 

संवेदनशील जगहों पर ध्यान दे पाएंगे ट्रैफिक पुलिस

इस नई टेक्नोलॉजी को लागू करने से लोगों का सफर का समय कम होगा, ईंधन की बचत होगी और प्रदूषण का स्तर भी घटेगा। इससे ट्रैफिक पुलिस को मैन्युअल रूप से सिग्नल चलाने की जरूरत नहीं पड़ेगी, जिससे वे भीड़-भाड़ और दुर्घटनाओं की आशंका वाले इलाकों के साथ-साथ स्कूलों, बाजारों और दूसरी संवेदनशील जगहों पर ट्रैफिक मैनेजमेंट पर बेहतर ढंग से ध्यान दे पाएंगे।

 

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