Jagdeep Dhankhar Resigns: उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने सोमवार को अचानक इस्तीफा दे दिया। उन्होंने स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए तत्काल प्रभाव से अपने पद से इस्तीफा दे दिया। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को भेजे पत्र में उन्होंने कहा कि उनका यह फैसला चिकित्सकीय सलाह पर आधारित है। अपने त्यागपत्र में धनखड़ ने राष्ट्रपति के प्रति आभार व्यक्त किया और उनके कार्यकाल के दौरान उनके साथ रहे सहयोग और सौहार्दपूर्ण संबंधों की सराहना की। धनखड़ ने प्रधानमंत्री और मंत्रिपरिषद का भी धन्यवाद किया और कहा कि इस कार्यकाल में उन्हें बहुत कुछ सीखने को मिला। धनखड़ ने सांसदों से मिले स्नेह, विश्वास और सम्मान को अपनी स्मृतियों में संजोए रखने की बात कही।
बता दें कि जगदीप धनखड़ ने 11 अगस्त 2022 को भारत के 14वें उपराष्ट्रपति के रूप में पदभार ग्रहण किया। उन्होंने संविधान के अनुच्छेद 67(ए) के तहत इस्तीफा दिया है। साथ ही उन्होंने स्वास्थ्य कारणों का भी हवाला दिया। उपराष्ट्रपति का पदभार ग्रहण करने से पहले वे पश्चिम बंगाल के राज्यपाल और राजस्थान से सांसद रह चुके हैं। उपराष्ट्रपति के रूप में वे राज्यसभा के सभापति की भूमिका भी निभा रहे थे। उन्होंने उपराष्ट्रपति पद पर रहते हुए प्राप्त अनुभवों और ज्ञान को अमूल्य बताया।
उधर कांग्रेस ने मंगलवार को दावा किया कि जगदीप धनखड़ के उपाध्यक्ष पद से इस्तीफे के पीछे उनके द्वारा बताए गए स्वास्थ्य कारणों के अलावा भी कई और गंभीर कारण थे। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने X पर लिखा- सोमवार को जगदीप धनखड़ ने दोपहर 12:30 बजे राज्यसभा कार्य मंत्रणा समिति की अध्यक्षता की। सदन के नेता जेपी नड्डा और संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू सहित अधिकांश सदस्य इसमें उपस्थित थे। कुछ चर्चा के बाद, कार्य मंत्रणा समिति ने शाम 4:30 बजे फिर से बैठक करने का निर्णय लिया।
जगदीप धनखड़ नड्डा और रिजिजू बैठक में आने का इंतज़ार कर रहे थे, लेकिन वे नहीं आए। कांग्रेस नेता ने दावा किया कि धनखड़ को व्यक्तिगत रूप से सूचित नहीं किया गया था कि दोनों वरिष्ठ मंत्री बैठक में शामिल नहीं हो रहे हैं और धनखड़ को यह बात बुरी लगी और फिर उन्होंने कार्य मंत्रणा समिति की बैठक मंगलवार दोपहर 1 बजे के लिए पुनर्निर्धारित कर दी।
रमेश ने दावा किया कि सोमवार को दोपहर 1 बजे से शाम 4:30 बजे के बीच कुछ बेहद गंभीर घटना घटी, जिसके कारण नड्डा और रिजिजू जानबूझकर दूसरी कार्य मंत्रणा समिति की बैठक से अनुपस्थित रहे। पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने यह भी कहा कि धनखड़ मानदंडों, शिष्टाचार और नियमों के प्रति बेहद सचेत थे और उनका मानना था कि उनके कार्यकाल के दौरान इन नियमों का लगातार उल्लंघन किया जा रहा था।
उपराष्ट्रपति राज्यसभा का सभापति होता है। संविधान में इस बारे में कुछ नहीं कहा गया है कि उपराष्ट्रपति की मृत्यु या कार्यकाल समाप्त होने से पहले उनके त्यागपत्र देने या उपराष्ट्रपति के राष्ट्रपति के रूप में कार्य करने की स्थिति में उनका कार्यभार कौन संभालेगा। अगर यह पद ख़ाली हो जाता है, तो यह काम राज्यसभा के उपसभापति या किसी अन्य राज्यसभा सदस्य की ओर से किया जाता है, जिसे भारत के राष्ट्रपति ने अधिकृत किया हो।
संविधान में कहा गया है कि उपराष्ट्रपति का पद जल्द से जल्द भरा जाना चाहिए। यानी इस पद पर चुनाव की व्यवस्था जल्द से जल्द करनी होगी। संविधान के अनुच्छेद 68 की धारा 2 के अनुसार, उपराष्ट्रपति की मृत्यु, त्यागपत्र या पद से हटाए जाने या किसी अन्य कारण से हुई रिक्ति को भरने के लिए जल्द से जल्द चुनाव कराने का प्रावधान है।
संविधान के अनुच्छेद 66 के अनुसार, संसद के दोनों सदनों (लोकसभा और राज्यसभा) के सदस्यों से मिलकर बना निर्वाचक मंडल उपराष्ट्रपति का चुनाव करता है। आनुपातिक प्रतिनिधित्व के अनुसार, चुनाव एकल संक्रमणीय मत द्वारा होता है। यह मतदान गुप्त मतदान द्वारा होता है।
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