200 क्षत्रिय महिलाओं ने दिखाया तलवारों का प्रदर्शन, जीप पर खड़े होकर की तलवारबाजी

खबर सार :-

राजकोट, शहर के पैलेस रोड स्थित ऐतिहासिक रणजीत विलास पैलेस में नवरात्रि रासोत्सव 2026 के तहत भगिनी सेवा फाउंडेशन द्वारा दो दिवसीय तलवार रास का प्रदर्शन किया गया। इसमें 200 से ज़्यादा क्षत्रिय महिलाओं और बेटियों ने हिस्सा लिया। हर किसी ने अपना अनूठा प्रदर्शन दिखाने की कोशिश की।
महिलाओं ने नवरात्र पर किया शक्ति प्रदर्शन, देवी मां के स्वरूपों को खुद पर उतारने की कोशिश

खबर विस्तार : -

राजकोट, नवरात्र के भक्तिमयी वातावरण में परंपराओं का निर्वहन किया गया है। इस त्योहार पर गुजरात के राजकोट में क्षत्रिय समुदाय की महिलाओं और बेटियों ने सोमवार रात पारंपरिक तलवार रास पेश करके शौर्य और शक्ति की पूजा का एक अनोखा नजारा पेश किया। इस दौरान उनका प्रदर्शन देखकर दर्शकों ने दांतों तले उंगलियां दबा लीं। कुछ देर के लिए तो लगा कि जमीन खिसकने वाली है। 

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वाहनों पर भी करती हैं कला का प्रदर्शन

 बीती रात कार्यक्रम में पारंपरिक तलवार रास के साथ-साथ महिलाओं और बेटियों ने टू-व्हीलर और फोर-व्हीलर पर भी तलवार रास किया। इन प्रदर्शनों को देखने वाले दंग रह गए। ऐसा लगा कि यह सालों की प्रैक्टिस है। बात यह नहीं कि हथियारों के साथ किए गए इस प्रदर्शन में क्षत्रिय परंपरा और भगवती की पूजा का मेल देखने को मिला, महत्व यह है कि इनके मन और लगन की सफलता हकीकत में बनी। इसमें तलवार रास के अलावा, दिवाड़ा रास और थाली रास सहित विभिन्न पारंपरिक रास का प्रदर्शन काफी लोगों ने पहली बार ही देखा होगा। कार्यक्रम की खास बात तो यह भी रही कि नवरात्र के पावन अवसर पर राजकोट के रणजीत विलास पैलेस में क्षत्रिय समाज की बहनों द्वारा डीजे या आधुनिक गरबा के बजाय प्राचीन परंपरा को महत्व दिया गया। यह बदलाव वास्तव में हतप्रभ कर देने वाला है। जिस कल्चर के पीछे दुनिया दीवानी है, उसे इस आयोजन में छोड़ दिया गया। 

अनुभव के आधार पर शौर्य प्रदर्शन करती हैं महिलाएं

आयोजन इतना प्रभावशाली और अनुभव पर आधारित रहा कि बहनों ने बाइक और खुली जीप पर धारदार तलवारों के साथ रास किया। ऐसा लगने लगा कि कला का मोहक प्रदर्शन किया जा रहा है। यद्यपि यह बेहद रिस्की भी था। परंपरागत प्रशिक्षण ही इसकी सफलता बन सकी। उपस्थित सभी को मंत्रमुग्ध कर देने वाला कार्यक्रम तलवार रास के अलावा बहनों ने दिवाड़ा रास, थाली रास और टिप्पणी रास में भी रंग जमाया। नवरात्रि के दौरान रणजीत विलास पैलेस में वर्ष 2006 से तलवार रास का आयोजन किया जा रहा है।

यही इस कारण की सफलता है कि यह लंबे समय से बराबर किया जा रहा है। हमेशा की तरह ही उत्सव के दूसरे और तीसरे दिन विशेष कार्यक्रम हुए। इस कार्यक्रम में राजकोट से कादंबरीदेवी की मौजूदगी रही। उन्होंने बताया कि हम ब्रह्मचारिणी भगवती देवी की पूजा करते हैं। यह कार्यक्रम उन्हीं को याद करके शुरू हो रहा है। यहां पर सबसे ज्यादा जोर संगठन पर रहता है। कार्यक्रम में क्षत्रिय बहनें भी मेहनत और इंतज़ाम कर रही हैं। महारानी कादंबरी देवी ने कहा कि आप देखेंगे कि वे हर तरह के स्टंट करती हैं। वही बातें उन्होंने दोहराईं। हर किसी को स्टंट से बचना चाहिए। 

15 सालों से परंपरा निभा रही है संस्था

वैसे भी आम जीवन में एक राहगीर के तौर पर स्टंट नहीं करना चाहिए। रास तलवार को कहा गया है। यह उनके लिए सम्मान का प्रतीक है। यह समाज को संदेश भी देने में सक्षम होता है। वह कहती हैं कि हमारी इस दिव्य कला और संस्कृति को आदर और सम्मान मिलना चाहिए। महिलाओं की मेहनत उनकी कला को देखकर मिल जाती है। इसीलिए अपनी बात को नया अंदाज देने की कोशिश देवयानीबा झाला करती हैं। वह कहती हैं कि नवरात्रि की तरह इस बार भी महल के अंदर यह रास कार्यक्रम किया जा रहा है।

दरअसल यह यहां का पारंपरिक और शौर्यपूर्ण नृत्य शैली है। इसमें दिवाड़ा रास, प्रॉप रास का प्रदर्शन किया जाता है। गौरतलब है कि भगिनी सेवा फाउंडेशन पिछले 15 सालों से हेरिटेज वॉक, साफा बनाने की ट्रेनिंग, पर्यावरण के प्रति जागरूकता और सैनिकों को इको-फ्रेंडली राखियां भेजने जैसी गतिविधि कर रही है।इतिहास में कई पर्व और त्योहारों के साथ लोककला, गायन, वादन और डिजाइन के अनोखी तरकीब बिना मशीन के होती थी। सिलाई, बुनाई और कढ़ाई सब हाथ से हो जाया करती थीं, अब मशीनों से यह होने लगा है। परंपरा पर विज्ञान का असर पड़ा है। 

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