पूजा में डीजे की जगह ढाक की बढ़ी मांग, विरासत को सहेजने का मौका मिला
खबर सार :-
मेदिनीपुर, पश्चिम बंगाल में नवरात्र पर्व का उत्साह पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है। इस बार यहां पर वाद्य यंत्रों में बदलाव देखा जा रहा है। लोग जहां आर्केस्ट्रा और डीजे पर थिरकना पसंद करते थे, वहीं इस बार पारंपरिक ढाक पसंद कर रहे हैं। वह बात अलग है कि नया दौर आने के बाद भी कलाकार नहीं मिल रहे हैं।
खबर विस्तार : -
मेदिनीपुर, पश्चिम बंगाल में नवरात्र के दौरान इस बार ढाक ही बजाया जाएगा। सरकार ने यहां पर धूम धड़ाका करने वाले वाद्य यंत्रों पर रोक लगाई है। हालांकि, यह रोक कुछ नियमों के तहत है, फिर भी ढाक की मांग बढ़ जाने से इस का व्यापार करने वालों को अच्छी कमाई मिल रही है। पश्चिम बंगाल की नवरात्रि की प्रसिद्ध पूरी दुनिया में है। पश्चिम बंगाल में पूजा के दौरान डीजे और तेज आवाज वाले माइक पर सख्ती चल रही है। यही कारण है कि पारंपरिक ढाक की मांग बढ़ गई है। पूरब और पश्चिम मेदिनीपुर जिले में ढाक का कारोबार किया जाता है।
यह भी पढ़ें : सीईसी ज्ञानेश कुमार के खिलाफ 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर मार्च करेगा AAP का छात्र संगठन ASAP
पारंपरिक विरासत को फिर मिल रहा मौका
यहां पर इस बार बेहतर कारोबार की उम्मीद है। पूजा समितियों ने भी तय कर लिया है कि वह अपने पारंपरिक और पुराने वाद्य यंत्र को पूजा में शामिल करेंगे। यहां के बुजुर्गों में अपने पारंपरिक ढाक के प्रति उत्साह देखा जा रहा है। इससे कारोबारियों में भी खुशी की लहर है। लोग पारंपरिक ढाक की ओर रुख कर रहे हैं, जिससे कलाकारों के बीच उत्साह है। कलाकार भी इनकी तैयारी में व्यस्त हैं। पूर्व मेदिनीपुर के शहीद मातंगिनी ब्लॉक के महिषदा, काखदा, बामनआड़ा सहित कई गांवों में बड़ी संख्या में ढाक कलाकार रहते हैं। इस बार लोगों के लिए यह एक अच्छा रोजगार बन गया है। कोई ढाक की मरम्मत कर रहा है तो कोई उसकी चमड़ी कसकर सुर ठीक कर रहा है। हर साल इसमें मंदी रहती थी, लेकिन इस बार कलाकारों को एडवांस में बुलाया जा रहा है। कलाकारों को एडवांस में बुकिंग के पैसे मिल रहे हैं।
एडवांस भी देने के लिए तैयार हैं लोग
महिषदा गांव के ढाक काफी दूर तक बजाए जाते हैं। यहां के कलाकारों ने बताया कि इस बार ढाक और बैंड पार्टी की मांग बढ़ी है। माना जा रहा है कि डीजे के कारण वायु प्रदूषण रहता है। इस ध्वनि प्रदूषण में लोग बीमार होते हैं। वहीं पर्यावरण को भी नुकसान पहुंचता है। इसलिए इस पर रोक लगाई गई है। इसका फायदा स्थानीय और पारंपरिक वाद्य यंत्रों को मिल रहा है जो लोगों से दूर हो चुके थे। संभवतः डीजे बजाने पर रोक के कारण पारंपरिक वाद्य यंत्रों की ओर लोगों का रुझान बढ़ा है। कई स्थानों पर तो ढाक की भी बुकिंग नहीं हो पा रही है। यह पारंपरिक कला के अंतर्गत जरूर आता है, लेकिन बरसों से उपेक्षित रहा था। लोगों ने इसे बजाना बंद कर दिया था। नई पीढ़ी में इसको पसंद करने वाले युवा बहुत कम हैं। इसीलिए कलाकारों का संकट गहरा गया है। कुछ स्थानों पर इतनी अधिक बुकिंग आ रही है कि कलाकारों की कमी के कारण कई जगहों की बुकिंग स्वीकार नहीं कर पा रहे हैं।
काम मिल रहा तो करने वाले नहीं मिल रहे
पश्चिम मेदिनीपुर के लोगों ने गुरुवार को एक कार्यक्रम के दौरान बताया कि डीजे के बढ़ते चलन से उनके कारोबार के साथ पूजा के भक्ति रस में भी कमी आई थी। उन्होंने कहा कि अब डीजे पर रोक के बाद पूजा पंडालों की समितियां फिर से ढाक की ओर बढ़ रही हैं। लोगों को इस बात की खुशी है कि उनकी सांस्कृतिक विरासत को अपनाया जाने लगा है और पुरानी परंपराओं को स्वीकार किया जा रहा है। यह कलाकारों के लिए अच्छी बात है और हमारी सांस्कृतिक परंपरा के लिए भी महत्वपूर्ण है।
कोलकाता, खड़गपुर, टाटा और जमशेदपुर के अलावा दिल्ली, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र से भी बयाना आया है। इस आमंत्रण के बाद लोगों में खुशी है। वह अपनी कमाई बढ़ाने के साथ दूसरे राज्यों में घूमने का आनंद भी उठा पाएंगे। गांव के कई कलाकार पूजा के दौरान दूसरे राज्यों में जाने की तैयारी कर रहे हैं।मेदिनीपुर के ढाक कलाकार ने बताया कि बुकिंग बढ़ने के साथ तैयारियां भी तेज हो गई हैं। बारिश का मौसम खत्म होने के बाद अब पूजा सामने है। इसलिए ढाक की चमड़ी, बांधने की व्यवस्था और अन्य सामान को अच्छी तरह जांचा जा रहा है, ताकि पूजा के दौरान कोई परेशानी न हो।
दूर से आने वालों को मायूस होकर लौटना पड़ रहा
झाड़ग्राम के सुर संगम वाद्य यंत्र विक्रेता ने बताया कि वन क्षेत्र में पारंपरिक रूप से पूजा की जाती है। इस दौरान ढाक का ही इस्तेमाल होता रहा है। इस बार स्थिति काफी बेहतर है। ढाक सहित पारंपरिक वाद्य यंत्रों को लेकर अच्छा रुझान देखने को मिल रहा है। सबसे बड़ी चिंता इस बात की है कि मांग तो बढ़ गई, लेकिन अब कलाकारों की संख्या कम हो रही है। दूर-दूर से आने वाले लोगों को मायूस होकर लौटना पड़ रहा है।
पूजा समिति अभी अपने कार्यक्रम को लेकर उत्साहित हैं, लेकिन उन्हें भी कलाकार नहीं मिल पा रहे हैं। यह पहला अवसर है, जिसमें इतनी बड़ी संख्या में मांग की जा रही है और कलाकार भी नहीं है। इससे पहले यहां पर जमीनी स्तर पर ढाक बैंड पार्टी हुआ करती थी, अब उनका चलन नहीं रहा है।
यह भी पढ़ें : नितिन नवीन ने राहुल गांधी को दी नसीहत, कहा-हिम्मत है तो इस्तीफा दें
अन्य प्रमुख खबरें
-
अलविदा नाना पाटेकर: कभी हंसाया-कभी रुलाया, हर किरदार से जीता दिल
2026-10-08
-
नाना पाटेकर के निधन पर बाॅलीवुड में शोक की लहर, स्टार्स ने जताया दुख
2026-10-08
-
Nana Patekar का क्रिकेट था पहला प्यार, कोहली के थे जबरा फैन
2026-10-08
-
गांव में रहना पसंद करते थे नाना पाटेकर, केबीसी में बताई वजह
2026-10-08
-
नाना पाटेकर के निधन से फिल्म और राजनीति जगत स्तब्ध, प्रधानमंत्री ने दी श्रद्धांजलि
2026-10-08
-
काजल राघवानी ने काट ली थी कलाई की नस, भोजपुरी अभिनेत्री ने बताई आपबीती
2026-10-06
-
'भारत में शांति नहीं' वाले बयान पर मचे घमासान पर संजय दत्त ने दी सफाई
2026-10-06
-
बॉक्स ऑफिस पर 'दृश्यम 3' का जलवा बरकरार, 200 करोड़ का आंकड़ा पार
2026-10-05
-
Khatron Ke Khiladi: कौन है 'खतरों के खिलाड़ी 15' के विनर अविनाश मिश्रा
2026-10-05
-
Bigg Boss 20 से बाहर होने के बाद छलका ईशा रिखी का दर्द
2026-10-05
-
Drishyam 3 ने दो दिन में ही पार किया 100 करोड़ का आंकड़ा
2026-10-04
-
Garba की हलचल: अहमदाबाद में मां अम्बे के welcome में करेंगे गरबा डांस
2026-10-04
-
Drishyam 3 Box Office: दृश्यम 3 ने पहले ही दिन की रिकॉर्डतोड़ कमाई
2026-10-03
-
Drishyam 3 X Review: अजय देवगन की फिल्म दृश्यम 3 का चला जादू
2026-10-02
-
नवजोत सिंह सिद्धू बन गए दादा, घर आई नन्ही परी ! पोती का नाम रखा 'आर्या'
2026-10-02