प्रदेश की धरोहरों को सजाएंगे कलाकार, वाराणसी, लखनऊ और अयोध्या में होंगे आयोजन

खबर सार :-

सांस्कृतिक मेला लगने वाला है। लखनऊ, अयोध्या और वाराणसी में कलाकार बड़ी संख्या में पहुंचेंगे। इसमें चित्रकारी और लोककलाओं के साथ संवाद का सुनहरा अवसर मिलेगा।
ललित कला अकादमी सजाएगी गुप्तारघाट, लखनऊ में जुटेंगे कलाकार

खबर विस्तार : -

लखनऊ : उत्तर प्रदेश के तीन प्रमुख शहरों में यूपी की कला संस्कृति, लोक परंपराओं और चित्रकारी को करीब से समझने का अवसर मिलने वाला है। सरकार की ओर से इस आयोजन को कराए जाने की स्वीकृति मिली है। इनमें विभिन्न संस्थाओं का सहयोग रहेगा। इन कार्यक्रमों का उद्देश्य उत्तर प्रदेश के युवाओं को वरिष्ठ कलाकारों के साथ सीखने और संवाद करने के अवसर देना है। 

युवा कलाकार अनुभवी और वरिष्ठ कलाकारों के साथ बारीकियां सीखेंगे

प्रदेश की समृद्धि शील कला संस्कृति को उनकी नई पीढ़ियां से जोड़ने के लिए कलाकारों को एक मंच पर लाया जाएगा। इसके लिए अयोध्या, लखनऊ और वाराणसी में कार्यशालाएं व शिविर आयोजित किए जाएंगे। लखनऊ की ओर से राज्य ललित कला अकादमी व विभिन्न शैक्षणिक संस्थान इसमें सहयोग करेंगे। उत्तर प्रदेश के युवा कलाकार अनुभवी और वरिष्ठ कलाकारों के साथ बारीकियां सीखेंगे। यह आयोजन अलग-अलग शहरों में तिथियों के अनुसार किए जाएंगे। 

गुप्तार घाट और राम की पैड़ी पर कला साधकों की भागीदारी रहेगी

अयोध्या के लिए 22 से 26 नवंबर तक इसकी घोषणा की गई है। डॉ राम मनोहर लोहिया विवि के सहयोग से गुप्तार घाट और राम की पैड़ी को नया लुक देने की तैयारी की जा रही है। यहां पर राम रामायण और अयोध्या विषय पर आधारित कार्यशाला आयोजित की जाएगी। इसमें एक व्याख्यान श्रृंखला भी होनी है। 10 विशेषज्ञ अपने कलाकारों की मौजूदगी में बारीकियां समझाएंगे।

लखनऊ में राज्य ललित कला अकादमी की ओर से लोकधारा का आयोजन होगा। इसका 18 से 22 नवंबर तक के लिए आयोजन किया जाएगा। इसमें पारंपरिक कला शिविर के दौरान पद्मश्री कलाकारों राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त कलाकारों और पारंपरिक कला के वरिष्ठ कलाकारों के साथ कला साधकों की भी भागीदारी रहेगी।

लोकधारा में वरिष्ठ कलाकारों से संवाद करने का मौका भी मिलेगा

 इस आयोजन में 25 वरिष्ठ कला विद्यार्थी भी शामिल होंगे। इनका चयन शहर के विभिन्न संस्थाओं से किया जाएगा, जहां पर कला संस्कृतियों का आयोजन और पाठ्यक्रम चलाए जा रहे हैं। इस लोकधारा में वरिष्ठ कलाकारों से संवाद और उनसे तकनीकी सीखने का मौका भी मिलेगा। प्रस्तावित प्रतिभागियों में भील, गोदना, पिथौरा, राजस्थानी कोहबर और मधुबनी जैसी विभिन्न लोक एवं पारंपरिक कला साहित्य से जुड़े कलाकारों की यहां पर मौजूदगी होगी। राष्ट्रीय स्तर पर कई ऐसे नाम हैं, जिनकी यहां पर उपस्थित रहेगी। 

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काशी फ्लो अंतर्राष्ट्रीय कलश शिविर का आयोजन दूसरे सप्ताह होगा

पद्मश्री दुर्गाबाई, पद्मश्री शिवम पासवान, पद्मश्री परेश के अलावा कई कलाकारों ने यहां पहुंचने की स्वीकृति प्रदान की है। कला जगत क्षेत्र में इस आयोजन के जरिए वरिष्ठ कलाकार अपने युवाओं को भागीदारी के लिए प्रोत्साहित करेंगे। पांच दिवसीय लोकधारा कार्यक्रम का उद्घाटन होने के बाद इसमें लाइव प्रदर्शन किया जाएगा। 20 नवंबर को मास्टर क्लास, रचनात्मक अभ्यास और मार्गदर्शन तथा 21 को पारंपरिक तकनीकों का प्रदर्शन के अंतर्गत सवाल जवाब करने का मौका मिलेगा। काशी फ्लो अंतर्राष्ट्रीय कलश शिविर एवं प्रदर्शनी का आयोजन दूसरे सप्ताह में किया जाएगा। 

राम मंदिर, काशी विश्वनाथ धाम और कुंभ की परंपरा दिखेगी 

यह आयोजन गंगा महासभा और राज्य ललित कला अकादमी के द्वारा संयुक्त सहयोग से किया जाएगा। काशी फ्लों के जरिए उत्तर प्रदेश में उत्तर प्रदेश की विरासत उसके संरक्षण आदि पर आयोजन होंगे। यहां पर कला आध्यात्मिक विरासत गंगा के बीच संबंधों को केंद्र में रखा जाएगा। अयोध्या का राम मंदिर और राम परंपरा, काशी विश्वनाथ धाम और प्रयागराज की कुंभ परंपरा उत्तर प्रदेश की प्रमुख सांस्कृतिक प्रतिबिंबों से जुड़ी विरासत को रचना प्रदान की जाएगी। 

प्रदेश की विरासत को जीवन में उतारने की मिलेगी प्रेरणा

अयोध्या में राम और रामायण की सांस्कृतिक परंपरा लखनऊ में लोक एवं पारंपरिक कलाओं एवं वाराणसी में गंगा तथा काशी की आध्यात्मिक विरासत को केंद्र में रखकर आयोजन किया जा रहा है।  कार्येक्रमों के लिए प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह विशेष भुमिका है। उन्होंने बताया की विरासत को संग्रहालय और अभिलेख तक सीमित रखने के बजाय उसे कलाकारों, विद्यार्थियों और आम लोगों के जीवन से जोड़ने के लिए ऐसे आयोजन किए जाएंगे। 

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