भक्तों और पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र है हिसार का अग्रोहा धाम, महाराजा अग्रसेन से जुड़ा है इतिहास

खबर सार :-

हरियाणा के हिसार में स्थित अग्रोहा धाम भक्तों और पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र है। कहा जाता है कि महाराजा अग्रसेन ने अग्रोहा नगरी को मां महालक्ष्मी के आशीर्वाद से बसाया था।
हिसार में स्थित है अग्रोहा धाम, मां लक्ष्मी के आशीर्वाद से बसी थी नगरी

खबर विस्तार : -

नई दिल्ली: जैसे-जैसे दिवाली का त्योहार नजदीक आता है, हर जगह देवी लक्ष्मी की पूजा की तैयारियां शुरू हो जाती हैं। इस शुभ अवसर पर भक्त देवी महालक्ष्मी का आशीर्वाद लेने और अपने परिवार की सुख-समृद्धि के लिए प्रार्थना करने मंदिरों में जाते हैं। देशभर में देवी लक्ष्मी को समर्पित कई प्रसिद्ध मंदिर हैं, लेकिन हरियाणा के हिसार जिले में स्थित 'अग्रोहा धाम' की कहानी वाकई अनोखी है।

यह स्थान महाराजा अग्रसेन और अग्रवाल समुदाय के इतिहास से जुड़ा है। प्रचलित मान्यताओं के अनुसार, महाराजा अग्रसेन देवी महालक्ष्मी के आशीर्वाद से एक नया राज्य स्थापित करना चाहते थे। इसके लिए वे और उनकी पत्नी रानी माधवी एक उपयुक्त जगह की तलाश में निकल पड़े। कहा जाता है कि अपनी यात्रा के दौरान उन्होंने बाघ के बच्चों और भेड़िये के बच्चों को एक साथ खेलते हुए देखा। महाराजा अग्रसेन और रानी माधवी ने इसे एक शुभ संकेत माना—यह सोचकर कि यह वीरों की भूमि है, जहां एक समृद्ध राज्य की स्थापना की जा सकती है। इसके बाद, उन्होंने इसी जगह पर 'अग्रोहा' शहर की स्थापना की। समय के साथ यह शहर फला-फूला और व्यापार तथा कृषि के क्षेत्र में अत्यंत समृद्ध हो गया।

1984 में बनकर तैयार हुआ मंदिर

हालांकि समय के साथ अग्रोहा का ऐतिहासिक महत्व कम होता गया, लेकिन इसकी पहचान को फिर से बहाल करने के प्रयास जारी रहे। 1907 में ब्रह्मानंद ब्रह्मचारी नामक एक संत यहां आए और उन्होंने अग्रवाल समुदाय को इसके विकास के लिए काम करने के लिए प्रेरित किया। इसके बाद, 1908 में 'अग्रवाल दरबार' नामक एक संगठन का गठन किया गया। यहां एक गौशाला, एक शिव मंदिर और 18 'सती' स्मारक भी स्थापित किए गए। आधुनिक अग्रोहा धाम के निर्माण का निर्णय 1976 में पूरे भारत से आए अग्रवाल प्रतिनिधियों के एक सम्मेलन के दौरान लिया गया था। इस उद्देश्य के लिए 'अग्रोहा विकास ट्रस्ट' का गठन किया गया। मंदिर का निर्माण 1976 में शुरू हुआ और मुख्य मंदिर 1984 में बनकर तैयार हो गया। इसके बाद, इस परिसर के भीतर अन्य सुविधाएं और आकर्षण भी विकसित किए गए।

यह भी पढ़ें:- UP में धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा, काशी-मथुरा-अयोध्या पर्यटकों से गुलजार

तीन मुख्य भागों में बंटा है मंदिर

अग्रोहा धाम की सबसे खास विशेषता इसका मंदिर परिसर है, जिसे तीन मुख्य भागों में बांटा गया है। मंदिर परिसर के मध्य भाग में देवी महालक्ष्मी विराजमान हैं। पश्चिमी हिस्से में देवी सरस्वती को समर्पित एक मंदिर है, और पूर्वी हिस्से में महाराजा अग्रसेन को समर्पित एक अन्य मंदिर है। यहां आने वाले भक्त इन तीनों का आशीर्वाद प्राप्त करने आते हैं। देवी महालक्ष्मी को धन, वैभव और समृद्धि की देवी माना जाता है, जबकि देवी सरस्वती ज्ञान और बुद्धि की देवी हैं। भक्तों के लिए, एक ही परिसर में इन दोनों देवियों के दर्शन करना एक अत्यंत विशेष अनुभव है।

41 नदियों के जल से भरा गया जलाशय

अग्रोहा धाम में केवल मंदिर ही नहीं, बल्कि कई अन्य आकर्षण भी हैं जो भक्तों और पर्यटकों को मंत्रमुग्ध कर देते हैं। मंदिर परिसर के पीछे 'शक्ति सरोवर' नामक एक विशाल जलाशय है। विशेष बात यह है कि 1988 में, इस जलाशय को देशभर की 41 नदियों के जल से भरा गया था। इसके उत्तर-पश्चिमी किनारे पर 'समुद्र मंथन' को दर्शाती एक सुंदर झांकी है। हर साल शरद पूर्णिमा के अवसर पर अग्रोहा धाम में 'महाकुंभ' उत्सव का आयोजन किया जाता है। इस दौरान, देशभर से बड़ी संख्या में भक्त देवी महालक्ष्मी और महाराजा अग्रसेन का आशीर्वाद लेने आते हैं। उत्सव के दौरान, पूरा परिसर गहरी भक्ति के वातावरण से सराबोर हो जाता है।

धार्मिक प्रसंगों को दर्शाती कई झांकियां मौजूद

इसके अलावा, इस परिसर में भगवान कृष्ण की लीलाओं, गजमुक्तेश्वर के स्वरूप और अन्य महत्वपूर्ण धार्मिक प्रसंगों को दर्शाती कई झांकियां मौजूद हैं। यहां जमीन के स्तर से लगभग 15 फीट नीचे देवी वैष्णो देवी को समर्पित एक गुफा भी बनाई गई है। भक्त यहाँ तिरुपति बालाजी, भैरवनाथ, बाबा अमरनाथ और भगवान हनुमान की पूजा-अर्चना भी कर सकते हैं। परिसर में भगवान हनुमान की 90 फीट ऊंची भव्य प्रतिमा मुख्य आकर्षण का केंद्र है।

यह भी पढ़ें:- बदला बांधवगढ़ का मौसम, जंगल की सुरक्षा के लिए टाइगर रिजर्व प्रबंधन अलर्ट

अन्य प्रमुख खबरें