बदहाली की भेंट चढ़ा पूर्व CM शिवराज का प्रोजेक्ट, नर्मदा नदी के तट पर बनीं 3 कुटियां टूटने की कगार पर

खबर सार :-

पूर्व सीएम शिवराज ने 21 जनवरी 2022 को शंभूधारा रिजर्व फाॅरेस्ट एरिया में 7 मेडिटेशन हट बनाने की घोषणा की। आज देखरेख के अभाव में इनमें से 3 कुटिया जर्जर हालत में हैं।
अनदेखी का शिकार बनीं अमरकंटक की 3 कुटियां, ध्यान के लिए हुआ था निर्माण

खबर विस्तार : -

अनूपपुर: मध्य प्रदेश के अनूपपुर जिले में नर्मदा नदी के उद्गम स्थल अमरकंटक के रिजर्व फाॅरेस्ट एरिया में शंभूधारा के पास ध्यान और मानसिक शांति का अनुभव देने के लिए प्रकृति के बीच सात मेडिटेशन हट (ध्यान कुटिया) बनाई गई थीं। इनमें से तीन कुटिया अब खंडहर हो चुकी हैं। पानी के स्रोत के पास प्राकृतिक चीजों से बनी ये कुटिया सही देखरेख न होने के कारण जर्जर होकर गिर गईं।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, मध्य प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने 21 जनवरी 2022 को इस प्रोजेक्ट की घोषणा की थी। इसके बाद, मध्य प्रदेश इको-टूरिज्म डेवलपमेंट बोर्ड के जरिए शंभूधारा रिजर्व फाॅरेस्ट एरिया में सात मेडिटेशन हट बनाई गईं। इनमें से तीन कुटिया देखरेख के अभाव में पूरी तरह गिर चुकी हैं। इन ढांचों को बनाने में मिट्टी, पत्थर, बांस, लकड़ी और मोवा घास जैसी प्राकृतिक चीजों का इस्तेमाल किया गया था, ताकि जंगल के प्राकृतिक स्वरूप को नुकसान पहुंचाए बिना पर्यटकों और आध्यात्मिक साधकों को शांत माहौल मिल सके। इस प्रोजेक्ट का मकसद लोगों को प्रकृति के बीच अकेले समय बिताने, योग और ध्यान करने और मानसिक शांति पाने का मौका देना था। लेकिन, बनने के बाद इनकी नियमित देखरेख और संरक्षण पर ठीक से ध्यान न दिए जाने के कारण इनकी हालत लगातार बिगड़ती गई।

लापरवाही ने ध्यान स्थल को बर्बाद किया

स्थानीय रिपोर्ट्स बताती हैं कि बारिश, खराब मौसम और देखरेख की कमी के कारण ये कुटिया धीरे-धीरे जर्जर हो गईं। समय पर मरम्मत और संरक्षण के उपाय न किए जाने के कारण, प्राकृतिक चीजों से बने ये ढांचे कमजोर पड़ गए और आखिरकार गिर गए। यह स्थिति सिर्फ कुछ कुटिया के नुकसान तक ही सीमित नहीं है; यह प्रकृति-आधारित पर्यटन को बढ़ावा देने के प्रयासों की कुल प्रभावशीलता पर भी सवाल उठाती है। अगर इनके बनने के बाद नियमित निरीक्षण, मरम्मत और संरक्षण के लिए कोई प्रभावी सिस्टम होता, तो शायद इन ढांचों को मौजूदा हालत में पहुंचने से बचाया जा सकता था। 

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वन विभाग की जिम्मेदारी पर सवाल

खबर है कि शंभूधारा में बनी इन ध्यान कुटियों (मेडिटेशन हट्स) के रखरखाव की जिम्मेदारी अमरकंटक वन विभाग की है। इससे यह सवाल उठता है कि अगर इन ढांचों के रखरखाव की जिम्मेदारी संबंधित विभाग की थी, तो इनकी मरम्मत और संरक्षण के लिए समय पर कदम क्यों नहीं उठाए गए? पहले भी इन ध्यान कुटियों की जर्जर हालत की ओर संबंधित विभाग का ध्यान दिलाया गया है। इसके बावजूद, सुधार और संरक्षण के लिए कोई ठोस कार्रवाई न होने से विभाग की लापरवाही पर सवाल उठ रहे हैं। हालांकि, इस मामले पर संबंधित विभाग का आधिकारिक पक्ष अभी सामने नहीं आया है।

खर्च और रखरखाव का आकलन हो

इस पूरे मामले में यह स्पष्ट करना जरूरी है कि प्रोजेक्ट के निर्माण पर कितनी राशि खर्च हुई, निर्माण के बाद रखरखाव के क्या नियम तय किए गए, किन अधिकारियों या इकाइयों को जिम्मेदारी सौंपी गई, और क्या इन ढांचों का समय-समय पर निरीक्षण किया गया। अगर नियमित रखरखाव के लिए कोई बजट या सिस्टम था, तो उसके इस्तेमाल और निगरानी की भी समीक्षा होनी चाहिए। इससे यह पता लगाने में मदद मिलेगी कि ध्यान कुटियों की मौजूदा हालत प्राकृतिक कारणों से है या समय पर रखरखाव न होने से नुकसान और बढ़ गया।

मरम्मत से शंभूधारा में नई जान आ सकती है

अमरकंटक धार्मिक, प्राकृतिक और इको-टूरिज्म का एक अहम केंद्र है। शंभूधारा की ध्यान कुटियों में इस इलाके में प्रकृति-आधारित पर्यटन को बढ़ावा देने की क्षमता है। इसलिए, संबंधित विभाग को साइट का निरीक्षण करना चाहिए, क्षतिग्रस्त ढांचों का तकनीकी आकलन करना चाहिए और पुनर्निर्माण व नियमित रखरखाव के लिए एक ठोस कार्ययोजना बनानी चाहिए। प्राकृतिक संसाधनों से बनी इन कुटियों की मरम्मत करते समय पर्यावरण संतुलन, वन क्षेत्र के नियमों और स्थानीय प्राकृतिक स्थितियों का ध्यान रखना भी जरूरी होगा। साथ ही, ऐसी स्थिति दोबारा न बने, इसके लिए नियमित निरीक्षण और जवाबदेही का सिस्टम बनाना होगा। 

क्या कहते हैं फॉरेस्ट रेंज ऑफिसर 

अब यह देखना बाकी है कि संबंधित विभाग शंभूधारा में इन जर्जर ध्यान कुटियों के संरक्षण और मरम्मत के लिए कब ठोस कदम उठाता है, या प्रकृति के बीच विकसित यह प्रोजेक्ट उपेक्षा का शिकार बना रहेगा। अमरकंटक रेंज के फॉरेस्ट रेंज ऑफिसर वीरेंद्र श्रीवास्तव ने मंगलवार को बताया कि वन विभाग ने पहले एक इको-फ्रेंडली मेडिटेशन सेंटर बनाया था। हालांकि, सरकार ने इसकी मरम्मत के लिए फंड जारी नहीं किया है। एक नए मेडिटेशन सेंटर के निर्माण का प्रस्ताव सरकार को भेजा गया है।

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