मध्य प्रदेश में बनवा दिए फर्जी पासपोर्ट, बांग्लादेशियों का पहचान पत्र भारत का
खबर सार :-
ग्वालियर, केद्र सरकार फर्जी तरीके से रह रहे बांग्लादेशी को देश से बाहर निकालने के लिए जद्दोहद कर रही है, वहीं प्रदेश की सरकारें उनकी मदद कर रही हैं। हैरानी की बात तो यह है कि पुलिस की मदद से उनके पास्पोर्ट के लिए सत्यापन ओके किए गए। करीब चार जिलों में 70 से अधिक मामले सामने आने पर हड़कंप मचा हुआ है।
खबर विस्तार : -
भोपालः मध्य प्रदेश के चार जिलों में कई फर्जी पते पर पासपोर्ट बनवाए गए हैं। यह मामला काफी गंभीर होने के कारण एयरपोर्ट और बंदरगाहों को अलर्ट कर दिया गया हैै। इसकी जांच शुरू कर दी गई है। आशंका के आधार पर इस मामले में पुलिस अधिकारियों की भी मिलीभगत हो सकती है। हालांकि कई गिरफ्तारियां भी की जा चुकी है।
कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए
मध्य प्रदेश के ग्वालियर में बांग्लादेशी नागरिकों के फर्जी भारतीय दस्तावेज बनवाकर उनके पासपोर्ट तैयार करने वाले अंतर्राष्ट्रीय गिरोह का पता लगाया जा रहा है। इस मामले में जांच के शुरुआती दौर में ही कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। स्पेशल टास्क फोर्स ने ग्वालियर, छिंदवाड़ा, बैतूल और पढोंर्णा से जुड़े 12 पुलिस अधिकारियों के अलावा कई विभागों के कर्मचारियों को निशाने पर लिया है। यद्यपि इन लोगों के नाम उस नेटवर्क में हैं, इसकी पुष्टि नहीं की जा सकी है।
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एसटीएफ के अनुसार, 2021 में ग्वालियर के डबरा में फर्जी पासपोर्ट तैयार कराया जा रहा था। उसके बाद यह भोपाल और फिर तो कई और राज्यों में इसने अपनी पकड़ बना ली। भोपाल के गोविंदपुरा क्षेत्र के अन्ना नगर स्थित एक मठ के पते पर करीब 40 पासपोर्ट के लिए आवेदन कराया गया था। दूसरी ओर डबरा की बुद्ध विहार के पत्ते से 17 बांग्लादेशियों के फर्जी तरीके से कागज तैयार कराए गए थे। इन लोगों पहले आधार कार्ड, उसके बाद अन्य प्रक्रियाएं पूरी कीं।
एक ही पते पर करीब 40 आवेदन
बताया जाता है कि अकेले गोविंदपुरा में एक ही पते पर करीब 40 पासपोर्ट के लिए आवेदन किया गया था। चार जिलों में करीब 70 से ज्यादा पासपोर्ट का मामला सामने आने पर केंद्र की इंटेलीजेंस एजेंसियों पर भी अब सवाल उठ रहा है? माना जा रहा है कि इसमें विभागों की मिलीभगत के बिना इस तरह के कागजात फर्जी तरीके से नहीं बन सकते हैं। जब कभी वेरिफिकेशन के लिए प्रक्रिया शुरू होती तो वहां पर पहले से ही फोन आ जाता था। इसमें बता दिया जाता था की कागज को जल्द ही क्लियर करना है।
अब यह मामला चर्चा में आने के बाद जांच एजेंसी पता कर रही है कि आखिर वह किस व्यक्ति के माध्यम से फोन आता था। इस हालिया भंडाफोड़ में नई बात निकल कर आई है। 2021 में विनायक शुक्ला डबरा के पुलिस अधिकारी थे। इस समय वह डीएसपी के पद पर दतिया जिले में हैं। पासपोर्ट वेरीफिकेशन सेल की जिम्मेदारी प्रधान रक्षक भूपेंद्र गुर्जर के पास हुआ करती थी। इस समय सुरेंद्र सिंह थाना प्रभारी है। 17 संदिग्ध के पासपोर्ट एक ही गवाह के पते पर हैं।
17 पासपोर्ट वाले पते पर यात्रा कराई
रियाल चौधरी के नाम को लेकर यह खुलासा हुआ। पूछताछ में उसने बताया की चार अलग-अलग पासपोर्ट उसके नाम पर बने थे। इनमें सभी पर फर्जी दस्तावेज लगाए गए हैं। यह काम करने के लिए उसने दो दलालों को तैनात कर रखा था। इस मामले में कइ्र गिरफ्तारियों हो चुकी हेै। बताया गया कि पहले यह लोग आधार कार्ड तैयार करते थे। इसके बाद पैन कार्ड और नगर निगम से जन्म प्रमाण पत्र बनवा लेते थे। अपने आप को यह लोग बौद्ध का अनुयायी बताते थे।
कई बांग्लादेश क नागरिकों ने भारतीय फर्जी पते पर नागरिकता हासिल की है। इनमें कई को जापान, श्रीलंका, थाइलैंड और मलेशिया की यात्राएं भी 17 पासपोर्ट वाले पते पर कराई गई हैं। उनके भी पासपोर्ट इसी पते पर बने हैं। जब दस्तावेजों का मिलान किया गया तब आधार कार्ड और पासपोर्ट के नाम पर मिलान नहीं हो सका। वोटर आईडी में भी यही था। अब इस मामले को गंभीर मानते हुए केंद्र सरकार ने एयरपोर्ट और बंदरगाह को अलर्ट किया है।
पांच टीमें प्रदेश के बाहरी जिलों में भेजी गई
इजेंलीजेंस एजेंसी को आशंका है कि फर्जी दस्तावेज के आधार पर बनाई गई पासपोर्ट पर अन्य देशों की यात्राएं भी की गई हांेगी। एसटीएफ एसपी राजेश सिंह भदौरिया ने सोमवार को बताया की पांच टीमें बनाकर प्रदेश के बाहरी जिलों में भेजी गई हैं। अब आने वाले समय का इंतजार किया जा रहा है की जांच प्रक्रिया किस आधार पर आगे बढ़ाई जाती है।
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