'मरेंगे तो देश के लिए, जीएंगे तो देश के लिए'...जनसेवा के 25 वर्ष पूरे होने पर PM मोदी ने देश को किया संबोधित
खबर सार :-
पीएम मोदी ने जनसेवा के 25 साल पूरे होने पर देश को संबोधित किया। देश के विकास और भविष्य की योजनाओं के लिए किए जा रहे प्रयासों का ज़िक्र करते हुए उन्होंने कहा कि भारत 140 करोड़ सपनों की धरती है और देश को विकसित बनाने के लिए सभी को मिलकर काम करना होगा।
खबर विस्तार : -
PM Modi Speech: प्रधानमंत्री मोदी ने जनसेवा में 25 साल पूरे कर लिए हैं। इस मौके पर बुधवार को उन्होंने दिल्ली में 'विकसित भारत संकल्प सभा' को संबोधित किया। अपने संबोधन में पीएम मोदी ने देश के भविष्य के लिए बड़े लक्ष्य तय किए और देश भर में मौजूद अद्भुत ऊर्जा और आत्मविश्वास का जिक्र किया। पीएम ने कहा हमें विकसित भारत बनाना है। हम इसे करके दिखाएंगे। भारत 140 करोड़ सपनों की धरती है और देश को विकसित बनाने के लिए सभी को मिलकर काम करना होगा।
'मरेंगे तो देश के लिए, जीएंगे तो देश के लिए'
पीएम मोदी ने कहा कि भारत 140 करोड़ सपनों का देश है और यहां संभावनाओं की कोई कमी नहीं है। पीएम मोदी ने कहा, "हमें आजादी तब मिली जब देश के लोगों ने अपनी जान की कुर्बानी दी। अब हमें विकसित भारत के लिए जीना है।" उन्होंने कहा कि राष्ट्र प्रथम उनका संकल्प है और राष्ट्र समृद्धि उनका लक्ष्य। हम 'मरेंगे तो देश के लिए, जीएंगे तो देश के लिए, भक्ति होगी देश के लिए और क्रिएट करेंगे तो देश के लिए। उन्होंने आगे कहा, 'कर्म मेरा धर्म होगा, कर्तव्यपरायणता मेरा ध्यान होगा।'
हमें 2047 तक विकसित भारत बनाना है
उन्होंने लाल किले से दिए गए 'सबका प्रयास' (सबकी कोशिश) के मंत्र को याद किया। PM ने कहा, "लाल किले से मैंने 'सबका प्रयास' की बात कही थी। भारत को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए जरूरी उत्साह और भावना एक ही संदेश देती है: हम काम पूरा करने के लिए दृढ़ संकल्पित हैं।"
पीएम मोदी ने कहा, "हमें 2047 तक विकसित भारत बनाना है। हम इसे करके दिखाएंगे। हमें दुनिया की शीर्ष तीन अर्थव्यवस्थाओं में शामिल होना है हम इसे करके दिखाएंगे। हमें आत्मनिर्भर भारत बनाना है। हम इसे करके दिखाएंगे। हमें ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग हब बनना है, हम इसे करके दिखाएंगे। हमें ओलंपिक की मेजबानी करनी है, हम इसे करके दिखाएंगे। हमें अंतरिक्ष के क्षेत्र में बड़ी छलांग लगानी है। हम इसे करके दिखाएंगे। लोगों में जो ऊर्जा, उत्साह और आत्मविश्वास है, वह वाकई काबिले-तारीफ है।"
उन्होंने आगे कहा, "जिस देश के लोगों की रगों में खून की तरह आत्मविश्वास दौड़ता हो, उस देश को कोई नहीं रोक सकता। लोग 25 साल की इस लगातार यात्रा को सरकार के मुखिया के तौर पर एक बड़ी उपलब्धि मानते हैं। लेकिन मेरे लिए, यह न तो अपनी तारीफ करवाने का मामला है और न ही ऐसा कोई मौका।"
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काम ही मेरा धर्म है
अपनी राजनीतिक यात्रा के बारे में बात करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि उन्होंने कभी पद पाने के लिए काम नहीं किया। उन्होंने कहा, "मेरा राजनीतिक रिपोर्ट कार्ड पूरी तरह से संगठन के काम पर आधारित था। मैंने चुनाव प्रचार तो संभाला, लेकिन खुद कभी चुनाव नहीं लड़ा। अगर मुझे चुनावी राजनीति में चमकने की इच्छा होती, तो मैं बहुत पहले ही मैदान में उतर सकता था, लेकिन मेरा स्वभाव ऐसा नहीं था।
बचपन से मिली परवरिश और संस्कारों ने मुझे सिखाया कि निजी महत्वाकांक्षा के बजाय किसी मिशन के लिए जीना चाहिए।" उन्होंने आगे कहा, "मुझे जो भी जिम्मेदारियां मिलीं, मैंने उन्हें बस पूरा किया। मेरे जीवन का एक ही लक्ष्य था: देश की निस्वार्थ सेवा। मेरे लिए काम ही सब कुछ है; काम ही मेरा धर्म है।" पीएम ने कहा कि वे कर्म को ही अपना कर्तव्य मानते हैं। पीएम मोदी ने कर्म को सिर्फ जिम्मेदारी नहीं, बल्कि देश के प्रति उनकी साधना बताया। देश के लिए काम, देश के लोगों के लिए काम। और इसमें मुख्य भावना यही है 'मा फलेषु कदाचन'! न तो नतीजे की चिंता, न ही श्रेय लेने की।"
प्रधानमंत्री ने अपने बचपन को किया याद
अपने बचपन को याद करते हुए PM ने कहा, "मुझे याद है कि जब मैं वडनगर में स्कूल जाता था, तो हमारे शिक्षक हमें कई तरह के पाठ पढ़ाते थे, और मैं हमेशा क्लास में सबसे पहले पहुंचने वाले छात्रों में से एक होता था। सीखने का वह उत्साह मेरे जीवन का हिस्सा बन गया और आज भी मैं खुद को एक छात्र ही मानता हूं। मैं हर दिन कुछ नया सीखने की कोशिश करता हूं।"
पीएम मोदी ने कहा, "जब देश की बात आती है, तो पद, प्रतिष्ठा और अधिकार का कोई महत्व नहीं रह जाता। इस शाश्वत देश में जन्म लेना ही सबसे बड़ा आशीर्वाद है 'अमृत' है। सत्ता का सुख इसके सामने कुछ भी नहीं है। दुनिया में कहीं भी पद और प्रतिष्ठा मिल सकती है, लेकिन भारत जैसी पवित्र भूमि कहीं और नहीं मिलती। वह भारत जिसने अंधेरे के दौर में भी मानवता को ज्ञान और मूल्यों का प्रकाश दिया।"
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