सीईसी ज्ञानेश कुमार को निलंबित करने की मांग पर सुप्रीम कोर्ट का अंतरिम आदेश से इनकार, केंद्र और आयोग को नोटिस

खबर सार :-

सुप्रीम कोर्ट ने सीईसी ज्ञानेश कुमार को निलंबित करने की मांग वाली याचिकाओं पर अंतरिम आदेश देने से इनकार कर दिया। केंद्र और चुनाव आयोग को नोटिस जारी किया गया है।
ज्ञानेश कुमार को निलंबित करने की मांग पर सुप्रीम कोर्ट का इनकार

खबर विस्तार : -

नई दिल्लीः सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार को निलंबित करने या उनकी शक्तियां वापस लेने की मांग वाली याचिकाओं पर तत्काल कोई अंतरिम आदेश पारित करने से इनकार कर दिया। याचिकाओं में मुख्य चुनाव आयुक्त के काम करने के तरीके और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी Special Intensive Revision (SIR) से जुड़े फैसलों पर सवाल उठाए गए हैं। मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने मामले की सुनवाई की। अदालत ने इस याचिका को ज्ञानेश कुमार के खिलाफ दायर एक अन्य याचिका के साथ जोड़ दिया। साथ ही केंद्र सरकार, चुनाव आयोग, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयुक्तों सुखबीर संधू तथा विवेक जोशी को नोटिस जारी किया।

सीईसी की शक्तियां वापस लेने की मांग

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता विकास सिंह ने कहा कि 2023 के कानून के बाद चुनाव आयोग के अधिकारों में विस्तार हुआ है और मामले में कुछ अंतरिम उपाय किए जाने की आवश्यकता है। उन्होंने चुनाव आयोग की विश्वसनीयता पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि स्थिति ऐसी हो गई है कि नागरिक खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। विकास सिंह ने अदालत से मांग की कि मामले की सुनवाई पूरी होने तक मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की शक्तियों को निलंबित किया जाए या उनसे वापस लिया जाए। वहीं, याचिकाकर्ता की ओर से पेश अधिवक्ता मेनका गुरुस्वामी ने कहा कि नागरिकों का मतदान का अधिकार खतरे में है और मुख्य चुनाव आयुक्त पर पक्षपात के आरोप लगाए। उन्होंने अदालत के सामने कहा कि देश में पहले निष्पक्ष और स्वतंत्र चुनाव होते रहे हैं, लेकिन मौजूदा स्थिति को लेकर गंभीर चिंताएं हैं।

SIR और फॉर्म 6 में बदलाव पर भी सवाल

मेनका गुरुस्वामी ने इसी मामले से जुड़ी दूसरी याचिका में मतदाता पंजीकरण से संबंधित फॉर्म 6 में किए गए बदलावों पर भी सवाल उठाए। उन्होंने SIR प्रक्रिया में कथित खामियों का मुद्दा उठाते हुए कहा कि इसका सीधा संबंध नागरिकों के मतदान के अधिकार से है। सुनवाई के दौरान पीठ ने याचिकाकर्ता की ओर से की गई मांगों को लेकर सवाल भी पूछे। हालांकि, मेनका गुरुस्वामी ने अपनी याचिका में की गई मांगों पर कायम रहने की बात कही। दलीलों को सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने सीईसी ज्ञानेश कुमार को निलंबित करने अथवा उनकी शक्तियां वापस लेने के संबंध में तत्काल अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया। हालांकि, अदालत ने मामले में संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।

मीडिया रिपोर्ट के बाद उठा विवाद

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर विवाद की शुरुआत एक मीडिया रिपोर्ट के बाद हुई। रिपोर्ट में चुनाव आयोग के भीतर SIR प्रक्रिया को लेकर अधिकारियों के बीच कथित मतभेदों का उल्लेख किया गया था। रिपोर्ट के मुताबिक, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने SIR प्रक्रिया को लेकर आयोग के भीतर कई बार अपनी चिंताएं दर्ज कराई थीं। बताया गया कि पिछले करीब 10 महीनों के दौरान दोनों चुनाव आयुक्तों ने कम से कम 14 बार औपचारिक रूप से आपत्तियां दर्ज कराईं। इनमें चार आपत्तियां एक ही दिन में दर्ज किए जाने का भी दावा किया गया। हालांकि, इन आरोपों और रिपोर्ट में सामने आई जानकारियों को लेकर अंतिम स्थिति संबंधित पक्षों के जवाब और अदालत में होने वाली आगे की सुनवाई के बाद ही स्पष्ट होगी।

विपक्ष फिर ला सकता है महाभियोग प्रस्ताव

इस बीच विपक्ष मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ एक बार फिर महाभियोग प्रस्ताव लाने की तैयारी में है। इससे पहले अप्रैल 2026 में भी विपक्ष की ओर से ज्ञानेश कुमार के खिलाफ महाभियोग नोटिस दिया गया था। बताया गया कि लोकसभा में यह प्रस्ताव खारिज हो गया था, जबकि राज्यसभा में इससे संबंधित प्रक्रिया अभी लंबित है। सूत्रों के अनुसार, इस बार भी कांग्रेस प्रस्ताव की अगुवाई कर सकती है। कांग्रेस ने इस मुद्दे पर विपक्षी दलों के साथ बातचीत शुरू की है और संभावना जताई जा रही है कि अगले दो सप्ताह के भीतर प्रस्ताव लाया जा सकता है।

अवमानना कार्रवाई की मांग भी सामने आई

मुख्य चुनाव आयुक्त से जुड़ा एक अन्य मामला भी सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच चुका है। एक वकील ने भारत के अटॉर्नी जनरल को पत्र लिखकर ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कथित तौर पर अवमानना कार्रवाई शुरू करने की मांग की है। फिलहाल सुप्रीम कोर्ट में सीईसी की शक्तियों, SIR प्रक्रिया और चुनाव आयोग के कामकाज को लेकर दायर याचिकाओं पर आगे की सुनवाई महत्वपूर्ण होगी। अदालत द्वारा जारी नोटिस के जवाब और संबंधित पक्षों की दलीलों के बाद यह स्पष्ट होगा कि मामले में आगे क्या कानूनी दिशा तय होती है।

FAQ:

1. सुप्रीम कोर्ट ने सीईसी ज्ञानेश कुमार को लेकर क्या फैसला दिया?

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को निलंबित करने या उनकी शक्तियां वापस लेने की मांग पर तत्काल अंतरिम आदेश पारित करने से इनकार कर दिया।

2. सुप्रीम कोर्ट ने किन पक्षों को नोटिस जारी किया है?

अदालत ने केंद्र सरकार, चुनाव आयोग, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयुक्त सुखबीर संधू तथा विवेक जोशी को नोटिस जारी किया है।

3. याचिकाकर्ताओं ने सीईसी की शक्तियां वापस लेने की मांग क्यों की?

याचिकाकर्ताओं ने सीईसी के कामकाज और SIR प्रक्रिया से जुड़े फैसलों पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि इससे चुनाव आयोग की विश्वसनीयता और नागरिकों के मतदान के अधिकार को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा हुई हैं।

4. SIR क्या है?

SIR यानी Special Intensive Revision (विशेष गहन पुनरीक्षण) मतदाता सूची के पुनरीक्षण की प्रक्रिया है। इसके तहत मतदाता सूची में नामों और पात्रता से जुड़ी जानकारी की विस्तृत जांच की जाती है।

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