रसायन नष्ट कर रहा मिट्टी की उर्वरा शक्ति, खेत बन रहे बंजर
खबर सार :-
हमें अपने खेतों की उर्वरा शक्ति बढ़ानी होगी। जैविक खाद का प्रबंध कर रसायन से बचना होगा। फसल चक्र पर ध्यान और अच्छे बीज अपनाकर खेती सुधारने का प्रयत्न करना पड़ेगा।
खबर विस्तार : -
लखनऊ, खरपतवार फसलों के लिए नुकसानदायक माने जाते हैं। इनको नष्ट करने के लिए रसायन का इस्तेमाल किया जाता है। अंधाधुंध दवाओं के उपयोग ने ही फसल की पैदावार बढ़ाना शुरू कर दिया, लेकिन इसने मिट्टी को कमजोर भी कर दिया। फसल चक्र प्रभावित हुई। बंजरभूमि बढ़ी और बीमारियां भी बढ़ गईं। यदि खरपतवार का प्रबंधन हरी खाद के रूप में किया जाए, तो वे मिट्टी की उर्वरा शक्ति बढ़ाने में मदद कर सकते हैं।
खेतों में खरपतवार अपने आप आ जाते हैं। इनकी जड़ें बहुत गहरी होती हैं। यह गहरी परतों से पोटेशियम, कैल्शियम, मैग्नीशियम और आयरन जैसे खनिज तत्वों को खींचकर ऊपरी सतह पर ले आती हैं। जब ये पौधे मरते हैं और सड़ते हैं, तो ये सभी पोषक तत्व मिट्टी में मिल जाते हैं। यह बातें दशकों पहले की गई शोध का हिस्सा हैं। यह शोध का निचोड़ किसानों तक प्रायोगिक तरीके से पहुंचाया ही नहीं गया। एक कमरे में बैठकर गोष्ठियां कभी भी चिंताजनक स्थिति से उबार ही नहीं सकती हैं।
मिट्टी की संरचना में सुधार कर पाना अब कठिन हो रहा
यही कारण है कि मिट्टी की संरचना में सुधार कर पाना अब कठिन हो रहा है। गहरी और मजबूत जड़ों वाले खरपतवार प्राकृतिक रूप से कठोर मिट्टी को ढीला और भुरभुरा बनाते हैं। यही प्रक्रिया मिट्टी में हवा और पानी का आवागमन आसान कराती है। पहले तो किसानों को ज्यादा पैदावार बढ़ाने के लिए उत्साहित किया गया। उद्योगापतियों के खाद भरे गोदाम खाली कराकर खेतों में झोंका गया। फिर नई खाद बनाई, वह भी खेत पहुंचाई। इसका परिणाम अब विपरीत हो रहा है।
वह खरपतवार नष्ट करा दिए जो मिट्टी को ढककर रखते हैं। इससे तेज बारिश या हवा से उपजाऊ ऊपरी मिट्टी का कटाव रुकता था। इनकी जाल जैसी रेशेदार जड़ें मिट्टी को मजबूती से बांधकर रखती हैं। धीरे धीरे यह प्रक्रिया बंद होने लगी। यह जानकारी होने चाहिए कि जब खरपतवारों को फूल आने से पहले काटकर या जुताई करके मिट्टी में मिला दिया जाता है, तो वे हरी खाद का काम करते हैं। इससे मिट्टी में कार्बनिक पदार्थ और ह्यूमस की मात्रा बढ़ती है। किसान वैज्ञानिक इन विषयों पर बात ही नहीं करते हैं।
केंचुओं को भोजन और आश्रय प्रदान करने की क्षमता प्रभावित
जबकि मिट्टी के लाभदायक जीवाणुओं और केंचुओं को भोजन और आश्रय प्रदान करने की क्षमता प्रभावित हो गई। इससे मिट्टी की जैविक सक्रियता तेज हो जाती है। इसके विपरीत ेिकसानों ने वह सब किया जो सबके लिए नुकसानदायक रहा। इसमें मिट्टी, फसलचक्र, उर्वराशक्ति और मानव स्वास्थ्य के साथ पशु व केंचुए भी प्रभावित हुए।
खराब या ग़लत खाना खाने से हमारा पेट ख़राब हो जाता है। मिट्टी तो हम सभी को भोजन की व्यस्था देती है।
कृषि योग्य भूमि की ताक़त यानी मृदा उर्वरता कम होने पर फ़सलें ख़राब व कमज़ोर पैदा होती हैं। माना जा रहा है कि जबसे यूरिया, डीएपी, फास्फोरस, जिंक, पोटाश, कीटनाशक, फर्टिलाइजर बीज हम अपनाने लगे हैं, हमारी कृषि भूमि कमज़ोर होने लगी है। यही कारण है कि मृदा उर्वरता में गिरावट हुई है। किसानों के पास जैविक खाद बेहद कम हैं। उनके पास देसी बीजों का भंडार नहीं है। खरपतवारनाशी दवाओं और कीटनाशकों का चलन बढ़ गया तो खेती में उगने वाला खरपतवार मर गया।
खेतों से मिलने वाला हरा चारा भी पशुओं को नहीं मिल पा रहा
इससे मिलने वाली उर्वरता भी कृषि भूमि को नहीं मिल पा रही है। खेतों से मिलने वाला हरा चारा भी पशुओं को नहीं मिल पा रहा है। फ़सलों की पैदावार और मृदा उर्वरता के कम होने के मुख्य कारण ख़राब कृषि पद्धति, ख़राब उर्वरक, ख़राब कीटनाशक और ख़राब बीज हैं। इसके साथ ही कृषि भूमि पर कार्बन की जमती परत, प्रौद्योगिकी और सूचना तक किसानों की अपर्याप्त पहुँच, बुनियादी ढाँचे का कमज़ोर होना भी इसके कारण हैं। सूखा, बाढ़ और चक्रवात जैसी अत्यधिक मौसमी आपदाएँ भी मृदा उर्वरता को कम कर रही हैं।
यह कुछ ऐसी जानकारियां हैं, जो वैज्ञानिक काफी पहले बता चुके हैं। सरकार का श्रीअन्न के प्रति और किसानों को दो गुना लाभ के वादा को पूरा करने के लिए नई कोशिशों में इनको फिर शामिल किया जा रहा है। दिल्ली में इस संबंध में लगातार वैज्ञानिकों के साथ चर्चा की जा रही है। केद्र के अधिकारी और मंत्री प्रदेशों के अधिकारी और मंत्री के साथ इन विषयों पर ध्यान देने के लिए कह रहे हैं। वैज्ञानिक पूसा में सुझाव दे रहे हैं, हमें अपने खेतों की उर्वरा शक्ति बढ़ानी होगी। जैविक खाद का प्रबंध कर रसायन से बचना होगा। फसल चक्र पर ध्यान और अच्छे बीज अपनाकर खेती सुधारने का प्रयत्न करना पड़ेगा ।
यह भी पढ़ेंः बांदाः पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने खोला राज: सिर पर मिलीं चोटें, खून बहने और कोमा में जाने से हुई दो मासूम भाइयों की मौत
अन्य प्रमुख खबरें
-
MP में MSP पर धान खरीद के लिए 6.80 लाख किसानों ने कराया रजिस्ट्रेशन
2026-10-09
-
कर्नाटक में सूखे से 90 प्रतिशत फसलें प्रभावित, राज्य सरकार देगी राहत
2026-10-08
-
रबी उत्पादन में 30 लाख मीट्रिक टन वृद्धि का लक्ष्य, दलहन-तिलहन के बीजों पर अनुदान
2026-10-07
-
Siwan में उद्यान निदेशालय खुशबू पर फिदा, अनुदान देकर उगवा रहे गेंदा फूल
2026-10-07
-
UP में बाढ़ से प्रभावित किसानों को मिलेगी मदद, 12 अक्टूबर तक होगा सर्वे
2026-10-06
-
बांदा की प्राकृतिक खेती और देशी बीज संरक्षण की पहल को सराहा
2026-10-06
-
MP में श्वेत क्रांति, दुग्ध उत्पादन से बदल रही गांवों की अर्थव्यवस्था
2026-10-05
-
मप्र में MSP पर धान खरीद के लिए 3 लाख से अधिक किसानों ने कराया पंजीयन
2026-10-05
-
फसल चक्र अपनाना छोड़ा, इसलिए कम हुई मिट्टी की ताकत
2026-10-05
-
मप्रः 10 अक्टूबर तक किसान करा सकेंगे पंजीयन: खाद्य मंत्री राजपूत
2026-10-01
-
CCFI की 63वीं AGM में टिकाऊ कृषि, रसायनों के संतुलित इस्तेमाल और निर्यात पर जोर
2026-10-01
-
प्लास्टिक हमारे लिए अभिशाप, यूपी में बांस उद्योग के लिए सरकार प्रतिबद्ध: ब्रजेश पाठक
2026-09-30
-
एमएसपी पर दालों और तिलहनों की खरीद को मंजूरी, यूपी, कर्नाटक और तेलंगाना को मिलेगा लाभ
2026-09-30
-
खेतों की मिट्टी की जांच कर खाद का पैमाना देंगे वैज्ञानिक, विदेश माल भेज सकेंगे किसान
2026-09-30
-
यूपी में फल-फूल रहा मशरूम का उत्पादन, किसानों में बढ़ी लोकप्रियता
2026-09-29