लखनऊ में साइबर सुरक्षा जागरूकता माह का शुभारंभ, नागरिकों को ऑनलाइन धोखाधड़ी से बचाने के लिए 'ऑपरेशन डिजिटल कवच' शुरू

खबर सार :-

लखनऊ में 01 अक्टूबर 2026 से साइबर सुरक्षा जागरूकता माह और ऑपरेशन डिजिटल कवच की शुरुआत। ऑनलाइन ठगी और डिजिटल अरेस्ट से बचाव की पूरी जानकारी।
लखनऊ में साइबर सुरक्षा जागरूकता माह शुरू, ऑपरेशन डिजिटल कवच का ऐलान

खबर विस्तार : -

लखनऊ: पुलिस कमिश्नरेट लखनऊ में आम जनमानस को ऑनलाइन धोखाधड़ी से सुरक्षित रखने के उद्देश्य से आज 01 अक्टूबर 2026 से साइबर सुरक्षा जागरूकता माह का शुभारंभ हो रहा है। पुलिस महानिदेशक साइबर क्राइम उत्तर प्रदेश के दिशा-निर्देशों तथा पुलिस आयुक्त लखनऊ और संयुक्त पुलिस आयुक्त अपराध एवं मुख्यालय, कमिश्नरेट लखनऊ के निर्देशन में इस अभियान की शुरुआत की गई है। इस अवसर पर पुलिस कमिश्नरेट लखनऊ क्राइम ब्रांच द्वारा “ऑपरेशन डिजिटल कवच” के अंतर्गत पूरे अक्टूबर माह नागरिकों को साइबर अपराधों से सावधान रहने के प्रति जागरूक किया जाएगा।

साइबर सुरक्षा के 5 आवश्यक कदम

साइबर अपराधी प्रतिदिन नए तरीकों से हमला करते हैं, जिससे बचने के लिए प्रत्येक नागरिक को पांच जरूरी कदम उठाने की सलाह दी गई है। इनमें हर खाते का पासवर्ड मजबूत और अलग रखना, टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन (2FA) चालू करना, ओटीपी, पिन या सीवीवी किसी को न बताना, फोन और ऐप केवल ऑफिशियल ऐप स्टोर से अपडेट रखना शामिल है। इसके अलावा सरकारी कार्यालयों को अपने सिस्टम अपडेट रखने, ऑफलाइन बैकअप रखने और किसी भी साइबर घटना की जानकारी 6 घंटे के भीतर सीईआरटी-इन (CERT-In) को रिपोर्ट करने के निर्देश दिए गए हैं।

बिजली-गैस कनेक्शन और डिजिटल अरेस्ट से बचाव

रात के समय बिजली या गैस कनेक्शन काटने के नाम पर अनजान नंबर से आने वाले कॉल या मैसेज पूरी तरह फर्जी और साइबर ठगों का जाल होते हैं। ठग डर पैदा कर, अनजान नंबर से व्हाट्सएप पर एपीके फाइल डाउनलोड करवाकर और कॉल फॉरवर्डिंग कोड (*21#) डायल करवाकर बैंक खाते खाली कर लेते हैं। इसके अलावा “डिजिटल अरेस्ट” के नाम पर भी लोगों को ठगा जाता है। लखनऊ में वर्ष 2026 में साइबर क्राइम थाना में पंजीकृत डिजिटल अरेस्ट के 07 अभियोगों में साइबर क्राइम पुलिस द्वारा 1.01 करोड़ रुपये से अधिक की धनराशि फ्रीज या होल्ड कराई गई है तथा 16.81 लाख रुपये की धनराशि पीड़ितों को वापस कराई जा चुकी है। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि भारतीय कानून में डिजिटल अरेस्ट जैसी कोई व्यवस्था नहीं है।

गूगल के नाम पर हो रही ठगी और अन्य खतरे

साइबर ठग गूगल, गूगल पे, जीमेल और गूगल मैप्स जैसी सेवाओं के नाम पर भी नागरिकों को निशाना बना रहे हैं। फर्जी कस्टमर केयर नंबर, गूगल पे के नाम पर कैशबैक या रिवॉर्ड का झांसा, गूगल मैप्स या रिव्यू टास्क ठगी, फर्जी गूगल सिक्योरिटी अलर्ट और गूगल फॉर्म के जरिए ठगी की जा रही है। इसके अलावा फर्जी लिंक, एपीके फाइल, यूपीआई या क्यूआर कोड ठगी, रिमोट एक्सेस ऐप (AnyDesk, TeamViewer आदि), नौकरी व निवेश का प्रलोभन, सेक्सटॉर्शन और इंस्टेंट लोन ऐप के जरिए भी ठगी के मामले सामने आ रहे हैं।

साइबर ठगी होने पर क्या करें

साइबर ठगी होने पर हर मिनट कीमती होता है और जितनी जल्दी शिकायत की जाएगी, धनराशि फ्रीज होने की संभावना उतनी ही अधिक होगी। ठगी होने पर तुरंत 1930 पर कॉल करें या cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज कराकर 14 अंकों का एकनॉलेजमेंट नंबर सुरक्षित रखें। इसके अलावा अपने बैंक या यूपीआई ऐप को सूचित कर खाता या कार्ड ब्लॉक कराएं और चैट, कॉल रिकॉर्ड, ट्रांजैक्शन आईडी व स्क्रीनशॉट को सबूत के तौर पर सुरक्षित रखें।

उत्तर प्रदेश में साइबर अपराधों पर लगाम लगाने और नागरिकों को जागरूक करने के लिए समय-समय पर अभियान चलाए जाते हैं। इसी कड़ी में पुलिस कमिश्नरेट लखनऊ द्वारा 'ऑपरेशन डिजिटल कवच' के तहत अक्टूबर माह को साइबर सुरक्षा जागरूकता माह के रूप में मनाने की पहल की गई है, ताकि बढ़ते ऑनलाइन फ्रॉड और डिजिटल अरेस्ट जैसे मामलों से आम जनता को सुरक्षित रखा जा सके।

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