महिला पहलवानों की याचिका पर बृजभूषण शरण सिंह को नोटिस जारी, 9 अक्टूबर को होगी अगली सुनवाई

खबर सार :-

राऊज एवेन्यू सेशंस कोर्ट ने महिला पहलवानों की याचिका पर बृजभूषण शरण सिंह को नोटिस जारी किया है। मामले की अगली सुनवाई 9 अक्टूबर को होगी।
महिला पहलवानों की याचिका: बृजभूषण शरण सिंह को नोटिस, 9 अक्टूबर को सुनवाई

खबर विस्तार : -

नई दिल्ली: दिल्ली की राऊज एवेन्यू सेशंस कोर्ट ने यौन शोषण के मामले में भारतीय कुश्ती संघ के पूर्व अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह और पूर्व सचिव विनोद तोमर को राहत मिलने के फैसले के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई की है। अदालत ने इस मामले में बृजभूषण शरण सिंह को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। स्पेशल जज दिग्विनय सिंह ने इस पूरे प्रकरण की अगली सुनवाई के लिए 9 अक्टूबर की तारीख मुकर्रर की है।

मजिस्ट्रेट कोर्ट के फैसले को दी गई चुनौती

यह कानूनी प्रक्रिया चार महिला पहलवानों की ओर से दाखिल की गई पुनरीक्षण याचिका पर शुरू हुई है। याचिकाकर्ताओं ने राऊज एवेन्यू कोर्ट के मजिस्ट्रेट स्तर के उस आदेश को सेशंस कोर्ट में चुनौती दी है, जो गत 3 अगस्त को पारित किया गया था। महिला पहलवानों का तर्क है कि मजिस्ट्रेट अदालत का वह फैसला तथ्यात्मक रूप से सही नहीं है और इसे केवल चुनिंदा साक्ष्यों को आधार बनाकर सुनाया गया है।

याचिका में मुख्य रूप से यह आरोप लगाया गया है कि निचली अदालत ने मामले की सुनवाई के दौरान स्थापित कानूनी प्रक्रियाओं और नियमों की अनदेखी की। गौरतलब है कि मजिस्ट्रेट कोर्ट ने अपने 3 अगस्त के फैसले में यह आधार बनाया था कि पीड़ित महिला पहलवान लंबे समय तक चुप रहीं और आरोपितों के साथ उनके सामान्य संबंध बने रहे, जिसके चलते बृजभूषण शरण सिंह और विनोद तोमर को बरी करने का आदेश दिया गया था।

चार्जशीट और बचाव पक्ष का रुख

इस मामले से जुड़ी पृष्ठभूमि को देखें तो दिल्ली पुलिस ने अपनी चार्जशीट में भारतीय दंड संहिता की धारा 354, 354डी, 354ए और 506 (1) के तहत गंभीर आरोप लगाए थे। अपनी पिछली दलीलों के दौरान बृजभूषण शरण सिंह के वकील राजीव मोहन ने अदालत को बताया था कि घटना की तिथि यानी 7 सितंबर 2022 को उनके मुक्किल देश में मौजूद ही नहीं थे। इसके अलावा, बचाव पक्ष की ओर से यह भी कहा गया था कि ओवरसाइट कमेटी की जो रिपोर्ट तैयार की गई थी, उसे केंद्र सरकार ने दिल्ली पुलिस कमिश्नर को भेजा था।

वकीलों के तर्क और कानूनी पहलू

दूसरी ओर, महिला पहलवानों की पैरवी कर रही वकील रेबेका जॉन ने सुनवाई के दौरान ओवरसाइट कमेटी के गठन पर सवाल उठाए थे। उनका तर्क था कि उक्त कमेटी का गठन नियमों और तय प्रक्रियाओं के अनुसार नहीं किया गया था। उन्होंने यह भी दलील दी थी कि जिन विशिष्ट आरोपों के आधार पर पुलिस ने चार्जशीट दाखिल की है, अदालत को उसी के अनुरूप आरोप तय करने चाहिए।

कानूनी प्रक्रिया 

इस पूरे कानूनी विवाद की जड़ में दिल्ली पुलिस द्वारा दाखिल वह चार्जशीट है जिसमें बृजभूषण शरण सिंह और विनोद तोमर को आरोपित बनाया गया था। मजिस्ट्रेट अदालत ने साक्ष्यों के मूल्यांकन के आधार पर दोनों को बरी कर दिया था, जिसके बाद यह मामला सेशंस कोर्ट में पहुंचा है। अब अदालत द्वारा नोटिस जारी किए जाने के बाद सभी पक्षों की नजरें आगामी 9 अक्टूबर को होने वाली सुनवाई पर टिकी हैं, जहां अदालत याचिका पर आगे की कानूनी कार्यवाही तय करेगी।

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