केंद्रीय कृषि मंत्रालय अपने अधिकारियों को गांव-गांव भेजेगा, मिट्टी की समस्याएं करेंगे दूर
खबर सार :-
किसानों के खेत में कितना उर्वरक डालना है, यह मिट्टी की जांच से पता चल पाएगा। इसके लिए सरकार की योजना राज्यों में चलाई जा रही है।
खबर विस्तार : -
नई दिल्ली, केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने किसानों के फायदे की बात की है। इसके लिए केंद्र सरकार के लोगों को गावों में जाकर फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (एफटीए) के फायदे बताना पड़ेगा। सरकार की ओर से यह निर्णय लिया गया है। भारतीय कृषि क्षेत्र को फायदा एक पुनीत कार्य मानते हुए कृषि मंत्री ने इस दिशा में कार्ययोजना बनाई है। एफटीए के बाद भारतीय किसान कई देशों में जीरो ड्यूटी पर अपने उत्पाद बेच सकते हैं। बशर्तें किसी भी प्रकार के उल्लंघ से बचना है। उनका कहना है कि उस देश के लिए तय गुणवत्ता मानकों पर खरा उतरना पड़ेगा।
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इस बार अक्टूबर में गांव जाएंगे अधिकारी
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह ने कहा कि एफटीए को लेकर किसानों के बीच अच्छी धारणा बनाना है। सरकार की ओर से रबी सीजन के लिए खेत बचाओ अभियान चलाया जाना है। इसमें 22 अक्टूबर से 30 नवम्बर तक लोगों से संपर्क किया जाना है। केंद्रीय मंत्री ने खाद के इस्तेमाल पर भी अपनी राय दी। उन्होेंने किसानों को मिट्टी की जरूरत के अनुसार यूरिया और डीएपी के इस्तेमाल करने के लिए कहा है। पायलट प्रोजेक्ट पर जोर देते हुए कहा कि खरीफ सीजन में कुछ प्रमुख राज्यों के दो-दो जिलों में संतुलित उर्वरक उपयोग का पायलट प्रोजेक्ट चलाया गया था। इस प्रयोग में उर्वरक की खपत 27 प्रतिशत कम हुई और करीब 1,400 करोड़ रुपये की बचत हुई।
अभियान के दौरान वैज्ञानिकों को भी महत्व दिया गया। इसमें आईसीएआर के वैज्ञानिक, कृषि विज्ञान केंद्रों के विशेषज्ञ, आत्मा की टीमें और कृषि विभाग के अधिकारियों से सलाह लेकर बुलाया जाएगा। कई किसान संगठन एफटीए को भारतीय कृषि और किसानों के लिए खतरा बता रहे हैं। केंद्रीय कृषि मंत्री मंगलवार बीते दिन दिल्ली स्थित पूसा में राष्ट्रीय कृषि सम्मेलन-रबी अभियान 2026 के दौरान योजनाओं पर अपनी राय दी। किसानों के लिए फसल चयन, मिट्टी, पानी, बीज और किसान क्रेडिट कार्ड आदि की जरूरत पड़ती है। सरकार की ओर से राष्ट्रीय कृषि योजनाएं लोगों तक पहुंचाई जा रही हैं।
दो-दो जिलों में मिट्टी परीक्षण किया जा रहा
मिट्टी की उर्वरा शक्ति को सुरक्षित रखना भी किसानों के लिए बड़ी चुनौती है। इससे किसानों की लागत घट सकती है। सरकार ने बड़े पैमाने पर जमीनी अभियान चलाने की योजना बनाई है। इसमें पायलट प्रोजेक्ट भी शामिल है। खरीफ सीजन के दौरान यह योजना बनाई गई। इसके तहत प्रमुख राज्यों के दो-दो जिलों में मिट्टी परीक्षण किया जा रहा है। इसके आधार पर रासायनिक खादों के संतुलित उपयोग करना है। पायलट प्रोजेक्ट में यही काम कराए जा रहे हैं। किसानों को उनकी जमीन और फसल के लिए कितनी खाद पर्याप्त है, यह जानकारी योजनाओें और सम्मेलनों के जरिए भी ली जा सकती है। जिन जिलों की मिट्टी के नमूने लेकर खाद आद का प्रबंध किया गया, उन जिलों में उर्वरक की कुल खपत में कमी आई।
2015 के बाद खेती में ऐतिहासिक सुधार आया
देश को 1400 करोड़ से अधिक की सीधी बचत हुई हैं। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि रबी सीजन की यह तैयारी अचानक नहीं हुई है, बल्कि इसके पीछे एक मजबूत और त्रिस्तरीय प्रशासनिक प्रक्रिया रही है। किसानों की समस्याओं और उत्पादन को लेकर सम्मेलन के पहले दिन ही सभी राज्यों के कृषि प्रधान सचिव, कृषि उत्पादन आयुक्त और उनके तकनीकी विशेषज्ञ सुबह 10 बजे पहुंच गए थे। 10 घंटे की चर्चा में खेती के हर पहलू वह भी राज्यवार अहम जानकारियां दी गईं।
राज्यों के कृषि मंत्री इस बैठक में स्वयं उपस्थित रहे। रबी की राष्ट्रीय कार्ययोजना भी तैयार की जा रही है। इधर एक नई जानकारी खुद मंत्री की ओर से दी गई। 2015 के बाद खेती की रफ्तार में ऐतिहासिक सुधार आया है। केंद्रीय कृषि मंत्री ने बताया कि राज्यों की मांग पर वर्ष 2026-27 के रबी सीजन के लिए सभी राज्यों की ओर से कुल मिलाकर 380 लाख मीट्रिक टन उर्वरक (डीएपी, यूरिया, एनपीके आदि) की मांग प्रस्तुत की गई है, जिसकी भरपूर उपलब्धता है।
मोटे अनाजों के रकबे में अच्छी बढ़ोत्तरी दर्ज
कम बारिश के कारण खरीफ फसलों के बुवाई के क्षेत्रफल में कमी आई है। यद्यपि सरकार कह रही है कि यह मामूली है। बुवाई क्षेत्र में सबसे ज्यादा कमी धान की फसल में आई है। इसमें लगभग 16.32 लाख हेक्टेयर क्षेत्रफल घटा है। इसके अलावा मक्का, सोयाबीन और कपास के क्षेत्र में भी थोड़ी गिरावट दर्ज हुई है। शिवराज सिंह ने बताया कि एक बहुत ही उत्साहजनक पहलू यह रहा कि उड़द, बाजरा, ज्वार, तिल, सूरजमुखी और तुअर (अरहर) जैसी दलहनी, तिलहनी और मोटे अनाजों के रकबे में अच्छी बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
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