लखनऊ, पिछले दिनों कहा जा रहा था कि करीब सात दिन अमेरिका ईरान पर हमले नहीं करेगा। लेकिन यह सब गुपचुप तरीके से हुए है। एक के बाद एक फाइटर प्लेन के जरिए उन्होंने तीन हमले जारी किए। इन तीनों के हमले से देश तवाह हो गया। अमेरिका के राष्ट्रपति ने खुशी जताई और अपने सैनिको को धन्यवाद किया है। ईरान का परमाणु सपना फिलहाल टूटने के करीब है। इनके खास तीनों न्यूक्लियर प्लांट्स अमेरिकी बमबारी में तबाह हो गए हैं। इजरायल और ईरान के तनाव में अमेरिका की भी एंट्री हो गई है।
इन तीनों साइट्स को तबाह करने के लिए अमेरिका ने बीटू स्टील्थ बांबर फाइटर जेट का इस्तेमाल किया है। अमेरिकी फाइटर जेट खतरनाक पोजीशन ला सकता है। इसी के जरिए ईरान में तबाही मची है। फोर्डो न्यूक्लियर प्लांट को जमीन के नीचे बनाया गया था। इस प्लांट को जमीन के नीचे करीब 300 फीट की गहराई में बनाया था। ईरान यहां पर नातांज न्यूक्लियर प्लांट में हजारों एडवांस्ड सेंट्रीफ्यूज बना रहा था। बी-2 बमवर्षक जेट है। यह एक साथ दो जीबीयू-57 मैसिव ऑर्डनेंस पेनेट्रेटर बम अपने साथ ढो सकता है। इजरायल-ईरान सैन्य संघर्ष आखिर उसकी धमकी के टाइम से पहले अमेरिका की एंट्री हो गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से जो हमले कराए गए, वह उनकी वायु सेना ने किया है। ईरान के तीन न्यूक्लियर ठिकानों पर हमले किए। अमेरिकी हमले से वह तबाह हो चुके हैं। जिन तीनों साइट्स पर भीषण बमबारी की गई उनकी तबाही के बाद अमेरिकी वायु सेना अमेरिका वापस हो गई है। ट्रंप और इजरायल ने इस सैन्य कार्रवाई पर खुशी जताई है। दूसरी ओर ईरान को इस हमले से काफी बड़ा झटका लगा है। पिछले काफी समय से ईरान के इन तीन साइट्स पर परमाणु कार्यक्रम की तैयारी चल रही थी। इनके नष्ट होने से ईरान को काफी नुकसान हुआ है। उसका परमाण सपना टूटने के करीब है। इजराइल 13 जून की सुबह से ही ईरान के कई परमाणु ठिकानों पर हमले कर चुका है।
इसके बाद भी ईरान के न्यूक्लियर प्लांट फोर्डो को इजरायली सेना नुकसान नहीं कर पाया है। ईरान ने फोर्डो प्लांट को अभेद बना दिया था। इसको गहराई में ले जाकर चट्टानों के बीच सुरक्षित कर दिया। इस प्लांट को अमेरिका ने पहाड़ की तरह हिला कर रख दिया है। हवाई हमले से बचाने की क्षमता भी इसमें थी, लेकिन अमेरिका इसपर भारी पड़ा। साल 2006 में ईरान ने यह न्यूक्लिर प्लांट बनाकर शुरू किया था। परमाणु हथियार यहां से डवलप करना था। पहले तो इसकी जानकारी भी दुनिया में किसी देश को नहीं थी, लेकिन बाद में धीरे-धीरे इसकी जानकारी पाई गई।
साल 2009 में इस संयंत्र का पता चला था। विशेषज्ञों का कहना था कि अगर फोर्डो न्यूक्लियर प्लांट को नुकसान पहुंचाना है तो इजरायली सेना या अमेरिकी सेना को जमीन पर उतरना होगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। ईरान की राजधानी तेहरान से करीब 350 किलोमीटर (215 मील) दक्षिण-पूर्व में इस्फहान सिटी है। इसमें सैकड़ों परमाणु वैज्ञानिक मजबूत थे। माना जाता है कि बी-2 अमेरिका का बमवर्षक जेट है। यह दो जीबीयू-57 मैसिव ऑर्डनेंस पेनेट्रेटर ( बम एक साथ ले जा सकता है। हर एक बम का वजन 30000 पाउंड है।
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