नई दिल्लीः मध्य एशिया में ईरान और इजराइल के बीच चल रहे युद्ध में अमेरिका की एंट्री हो चुकी है। इस वजह से पूरी दुनिया तीसरे विश्व युद्ध की कगार पर पहुंच चुकी है। अमेरिका ने रविवार को बी-2 बॉम्बर का इस्तेमाल कर ईरान के तीन परमाणु संयंत्रों को तबाह कर दिया है। ईरान पर अमेरिका के इस हवाई हमले की पाकिस्तान की सरकार ने कड़ी निंदा की है। पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने कहा कि ईरान के पास आत्मरक्षा का अधिकार है। इससे निश्चित तौर पर क्षेत्र में तनाव और अधिक बढ़ जाएगा।
पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय ने रविवार को जारी बयान में कहा कि इजराइल के बाद अमेरिका की ओर से ईरान की न्यूक्लियर फैसिलिटी पर किए हमलों की पाकिस्तान निंदा करता है। हम इस क्षेत्र में तनाव के और बढ़ने की आशंका से बेहद चिंतित हैं। हम दोहराते हैं कि यह हमले अंतर्राष्ट्रीय कानून के सभी मानदंडों का उल्लंघन करते हैं। ईरान को संयुक्त राष्ट्र चार्टर के तहत खुद का बचाव करने का वैध अधिकार है। यह भी कहा कि ईरान के खिलाफ चल रहे आक्रमण के कारण तनाव और हिंसा में बढ़ोत्तरी होना बेहद परेशान करने वाली है। तनाव बढ़ने से क्षेत्र में और उससे इतर भी गंभीर रूप से हानिकारक प्रभाव पड़ेंगे। हम लोगों के जीवन और संपत्तियों का सम्मान करने और संघर्ष को तुरंत खत्म करने की अनिवार्य आवश्यकता पर जोर देते हैं।
पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय ने कहा कि मध्य एशिया में तनाव के बीच सभी पक्षों को अंतर्राष्ट्रीय कानून, विशेष रूप से अंतर्राष्ट्रीय मानवीय कानूनों का पालन करना चाहिए। संयुक्त राष्ट्र चार्टर के सिद्धांतों और उद्देश्यों के अनुरूप संवाद और कूटनीति ही इस क्षेत्र में संकट का समाधान निकालने का एकमात्र व्यावहारिक मार्ग है। गौरतलब है कि अमेरिका ने भारतीय समयानुसार रविवार को सुबह 4.30 बजे ईरान के तीन प्रमुख न्यूक्लियर प्लांट्स पर हमला किया। इनमें फोर्डो, नतांज और एस्फाहान की साइट्स शामिल हैं। इस हमले के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बयान जारी किया है, उन्होंने दावा किया कि ईरान पिछले 40 साल से अमेरिका के खिलाफ काम कर रहा है। डोनाल्ड ट्रंप ने बताया कि हमले के पीछे का मकसद ईरान की न्यूक्लियर एनरिचमेंट कैपेसिटी को बर्बाद करना था। दरअसल, पाकिस्तान का अमेरिका की कार्रवाई के खिलाफ आया ताजा बयान इसलिए हैरान करने वाला है, क्योंकि एक दिन पहले ही पाकिस्तान की सरकार ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित किए जाने की वकालत की थी।
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