ढाका: 2024 के बड़े जनआंदोलन के बाद बांग्लादेश में पहली बार हुए राष्ट्रीय चुनावों ने देश की राजनीति की दिशा बदलने के संकेत दे दिए हैं। शुरुआती रुझानों में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी को स्पष्ट बढ़त मिलती दिख रही है और उसके शीर्ष नेता तारिक रहमान दो सीटों से जीत दर्ज कर अगले प्रधानमंत्री बनने की मजबूत स्थिति में नजर आ रहे हैं। अब निगाहें 299 संसदीय सीटों के अंतिम परिणामों पर टिकी हैं, जो सत्ता की तस्वीर साफ करेंगे। यह चुनाव अंतरिम सरकार के प्रमुख सलाहकार मोहम्मद यूनुस की देखरेख में 12 फरवरी को कराया गया। मतदाताओं ने दो अहम मुद्दों पर वोट डाला। पहला, नई संसद का गठन। दूसरा, संविधान में प्रस्तावित बदलाव जिसे जुलाई चार्टर कहा जा रहा है। लंबे राजनीतिक अस्थिरता के बाद यह चुनाव लोकतांत्रिक प्रक्रिया की वापसी के रूप में देखा जा रहा है।
बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी के नेता तारिक रहमान ने ढाका 17 और बोगुरा 6 सीट से चुनाव लड़ा। शुरुआती नतीजों में उन्होंने दोनों सीटों पर जीत दर्ज की। यह जीत केवल प्रतीकात्मक नहीं मानी जा रही। करीब 17 साल तक निर्वासन में रहने के बाद उनकी वापसी अब सत्ता के दरवाजे तक पहुंचती दिख रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि BNP बहुमत का आंकड़ा पार कर लेती है तो रहमान को प्रधानमंत्री पद की दावेदारी में कोई बड़ी बाधा नहीं होगी। पार्टी के भीतर उनका कद पहले से स्थापित है और चुनावी प्रदर्शन ने उसे और मजबूत किया है।
इस चुनाव की सबसे बड़ी बात यह रही कि पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की पार्टी अवामी लीग इसमें शामिल नहीं हुई। पार्टी को चुनाव लड़ने की अनुमति नहीं मिली। शेख हसीना, जो फिलहाल देश से बाहर हैं, ने इस पूरे चुनाव को दिखावा करार दिया। अवामी लीग की अनुपस्थिति ने चुनावी समीकरण को पूरी तरह बदल दिया। विशेषज्ञों के अनुसार विपक्ष की सबसे बड़ी ताकत के बाहर रहने से BNP को सीधा लाभ मिला। हालांकि कुछ आलोचक यह भी कह रहे हैं कि बिना पूर्ण राजनीतिक भागीदारी के चुनाव की वैधता पर सवाल उठ सकते हैं। अंतिम नतीजे और मतदान प्रतिशत इन बहसों को और दिशा देंगे।
बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी ने जीत का दावा किया है, लेकिन समर्थकों से जश्न नहीं मनाने की अपील की। पार्टी ने कहा कि समर्थक शुक्रवार की नमाज में शामिल होकर पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया को याद करें। इसे राजनीतिक शिष्टाचार और संयम का संकेत माना जा रहा है। पार्टी नेतृत्व ने कार्यकर्ताओं से शांति बनाए रखने और लोकतांत्रिक प्रक्रिया का सम्मान करने को कहा है। चुनाव बाद हिंसा की आशंका को देखते हुए यह अपील अहम मानी जा रही है।
चुनाव परिणामों के बीच कुछ सीटों पर अनियमितताओं के आरोप भी सामने आए हैं। ढाका 13 सीट पर बांग्लादेश खिलाफत मजलिस के अमीर मौलाना ममनुल हक ने मतगणना प्रक्रिया पर सवाल उठाए। उनका कहना है कि बैलेट पेपर की डिजाइन में खामी के कारण उनके पक्ष में पड़े हजारों वोट रद्द कर दिए गए।ममनुल हक, जो 11 दलों के गठबंधन समर्थित उम्मीदवार हैं, ने देर रात औपचारिक शिकायत दर्ज कराई। शिकायत ढाका 13 के रिटर्निंग अधिकारी को अगारगांव स्थित चुनाव आयोग मुख्यालय में सौंपी गई। उन्होंने निष्पक्ष जांच और स्पष्ट स्पष्टीकरण की मांग की है।
इसी तरह NCP के इलेक्शन स्टीयरिंग कमेटी चेयरमैन आसिफ महमूद सजीब भुइयां ने भी प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कुछ सीटों पर नतीजों में छेड़छाड़ की कोशिश का आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि ढाका 15 में पहले 20 से 22 हजार वोटों का अंतर था, लेकिन अचानक विरोधी उम्मीदवार को विजेता घोषित कर दिया गया। ढाका 16 और 17 सीटों को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। उन्होंने मांग की कि जिन सीटों पर आरोप लगे हैं, वहां परिणाम घोषित करने से पहले स्पष्ट जांच हो। इन आरोपों ने चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता पर नई बहस छेड़ दी है।
इस चुनाव का एक अहम पहलू जुलाई चार्टर पर जनमत था। प्रस्तावित संवैधानिक बदलावों का उद्देश्य शासन ढांचे में सुधार और राजनीतिक स्थिरता लाना बताया जा रहा है। यदि संसद में बहुमत और जनमत दोनों से इसे समर्थन मिलता है तो देश की संवैधानिक संरचना में महत्वपूर्ण परिवर्तन हो सकते हैं। राजनीतिक पर्यवेक्षकों का कहना है कि नई संसद की संरचना और संविधान संशोधन का परिणाम मिलकर आने वाले वर्षों की नीति दिशा तय करेंगे। यह केवल सरकार बदलने का मामला नहीं, बल्कि शासन प्रणाली में संभावित बदलाव का भी संकेत है।
Bangladesh Election Results : आगे की राजनीतिक दिशा
कुल 299 सीटों के अंतिम नतीजे शुक्रवार को आने की उम्मीद है। यदि रुझान कायम रहते हैं और BNP स्पष्ट बहुमत हासिल करती है तो बांग्लादेश की राजनीति में सत्ता का संतुलन बदल जाएगा। लंबे समय तक प्रभाव में रही अवामी लीग का दौर कमजोर पड़ सकता है। तारिक रहमान के संभावित प्रधानमंत्री बनने से विदेश नीति, आर्थिक सुधार और प्रशासनिक ढांचे में नई प्राथमिकताएं सामने आ सकती हैं। निवेश, रोजगार और राजनीतिक स्थिरता जैसे मुद्दे नई सरकार के सामने पहली चुनौती होंगे। फिलहाल माहौल उत्सुकता और सतर्कता का है। जीत के दावे और अनियमितताओं के आरोप साथ साथ चल रहे हैं। अंतिम परिणाम ही तय करेंगे कि आंदोलन के बाद शुरू हुई यह लोकतांत्रिक यात्रा किस दिशा में आगे बढ़ेगी।
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