हिमालयी कूटनीति में 'ग्रैंड शिफ्ट': क्या बीजिंग की 'मौन स्वीकृति' भारत के लिए UNSC के द्वार खोलेगी?

खबर सार :-
India China UNSC support : बीजिंग ने भारत की UNSC स्थायी सदस्यता की आकांक्षाओं का सम्मान करने का संकेत देकर कूटनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है। विदेश सचिव विक्रम मिसरी और चीनी उप विदेश मंत्री मा झाओक्सू के बीच हुई बैठक में सीमा शांति, वीजा सरलीकरण और कैलाश मानसरोवर यात्रा की बहाली पर सकारात्मक चर्चा हुई।

हिमालयी कूटनीति में 'ग्रैंड शिफ्ट': क्या बीजिंग की 'मौन स्वीकृति' भारत के लिए UNSC के द्वार खोलेगी?
खबर विस्तार : -

नई दिल्ली: वैश्विक राजनीति के रंगमंच पर अक्सर अनपेक्षित मोड़ आते हैं, लेकिन 10 फरवरी 2026 की तारीख भारत-चीन संबंधों के इतिहास में एक 'टर्निंग पॉइंट' के रूप में दर्ज की जा सकती है। नई दिल्ली के गलियारों में हुई एक उच्चस्तरीय बैठक ने उन अटकलों को हवा दे दी है, जिन्हें अब तक कूटनीतिक रूप से असंभव माना जाता था। चीन, जिसने दशकों से संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में भारत की स्थायी सदस्यता की राह में 'वीटो' की दीवार खड़ी कर रखी थी, उसके सुर अब बदलते नजर आ रहे हैं। चीनी कार्यकारी उप विदेश मंत्री मा झाओक्सू और भारत के विदेश सचिव विक्रम मिसरी के बीच हुई गहन चर्चा के बाद जो संदेश निकलकर आया है, वह केवल सीमा विवाद तक सीमित नहीं है। बीजिंग ने पहली बार आधिकारिक तौर पर यह स्वीकार किया है कि वह वैश्विक मंच पर भारत की बड़ी भूमिका और UNSC में उसकी स्थायी सदस्यता की आकांक्षाओं का न केवल 'सम्मान' करता है, बल्कि उन्हें 'समझता' भी है।

 India China UNSC support : कूटनीति की नई बिसात: 'प्रतिरोध' से 'सम्मान' तक का सफर

दशकों से चीन का रुख भारत की सुरक्षा परिषद की दावेदारी पर टालमटोल वाला रहा है। वह अक्सर इस मुद्दे को पाकिस्तान के साथ जोड़ने या 'व्यापक सुधारों' की आड़ में दबाने की कोशिश करता था। लेकिन फरवरी 2026 की इस बैठक ने एक नया नैरेटिव सेट किया है। जानकारों का मानना है कि यह बदलाव अचानक नहीं आया है। गलवान घाटी के संघर्ष के बाद उपजे शीतयुद्ध जैसे हालात और आर्थिक प्रतिबंधों ने दोनों देशों को यह अहसास कराया है कि 'स्थिरता' ही एकमात्र विकल्प है। बैठक के दौरान जिस तरह से चीन ने भारत की आकांक्षाओं के प्रति सकारात्मक संकेत दिए हैं, उसे अंतरराष्ट्रीय संबंधों के विशेषज्ञ 'सॉफ्ट सिग्नलिंग' कह रहे हैं। यह संकेत देता है कि चीन अब भारत को एक ऐसे वैश्विक खिलाड़ी के रूप में देख रहा है, जिसे अब और अधिक समय तक दरकिनार करना बीजिंग के अपने हितों के खिलाफ हो सकता है।

 India China UNSC support : कैलाश मानसरोवर और 'सॉफ्ट पावर' का पुनरुद्धार

सिर्फ उच्च राजनीति ही नहीं, बल्कि सांस्कृतिक और धार्मिक सेतुओं को भी फिर से जोड़ने की कवायद शुरू हो गई है। विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने इस बैठक में कैलाश मानसरोवर यात्रा के फिर से संचालन का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। यह यात्रा केवल हिंदुओं की आस्था का केंद्र नहीं है, बल्कि यह दोनों देशों के बीच भरोसे की बहाली का सबसे बड़ा पैमाना है।

कोविड-19 और सीमा पर तनाव के बाद से बंद पड़ी इस यात्रा को फिर से शुरू करने और इसके विस्तार पर चीन की सहमति, ग्राउंड लेवल पर शांति की बहाली का संकेत है। इसके अलावा, दोनों देशों के बीच एयर सर्विस एग्रीमेंट को जल्द अंतिम रूप देने पर चर्चा हुई। इसका सीधा मतलब यह है कि आने वाले महीनों में नई दिल्ली और बीजिंग या शंघाई के बीच सीधी उड़ानें फिर से आसमान में दिखाई देंगी, जो गलवान विवाद के बाद से लगभग ठप पड़ी थीं।

 India China UNSC support : मोदी-शी 'कॉमन अंडरस्टैंडिंग', कूटनीति का नया रोडमैप

इस पूरी वार्ता का आधार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच पूर्व में बनी 'कॉमन अंडरस्टैंडिंग' (साझा समझ) को बताया गया है। बैठक में इस बात पर जोर दिया गया कि वर्तमान की जटिल और बदलती वैश्विक परिस्थितियों में दोनों देशों का एक साथ आना न केवल एशिया, बल्कि पूरी दुनिया के लिए जरूरी है। चीन के उप विदेश मंत्री, जो ब्रिक्स (BRICS) शेरपा बैठक के सिलसिले में भारत आए थे, उनका यह रुख दिखाता है कि 'ग्लोबल साउथ' की अगुवाई की होड़ के बावजूद, चीन को भारत के साथ तालमेल बिठाना ही होगा। रूस-यूक्रेन संघर्ष और मध्य पूर्व के संकटों के बीच, भारत और चीन का स्थिर होना वैश्विक व्यवस्था को संतुलित करने के लिए अनिवार्य है।

 India China UNSC support : वीजा और पीपल-टू-पीपल कांटेक्ट, जमी बर्फ पिघलने के आसार

सीमा पर सैनिकों की पीछे हटने की प्रक्रिया के बाद अब 'वीजा युद्ध' को समाप्त करने की तैयारी है। बैठक में दोनों पक्षों ने स्वीकार किया कि व्यापार और शिक्षा के लिए लोगों का आना-जाना जरूरी है। वीजा नियमों में ढील देने और 'प्रैक्टिकल स्टेप्स' उठाने पर बनी सहमति यह बताती है कि अब बात सिर्फ मेज तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि धरातल पर भी बदलाव दिखेंगे। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने भी स्पष्ट किया कि द्विपक्षीय संबंधों की समीक्षा का मुख्य उद्देश्य संवेदनशील मुद्दों पर चिंताओं को दूर करना और विश्वास की कमी को पाटना है।

 India China UNSC support : क्या राह अभी भी कठिन है?

हालाँकि चीन के सुर बदले हैं, लेकिन कूटनीतिक गलियारों में एक सावधानी भी बरती जा रही है। 'सम्मान करने' और 'समर्थन देने' में एक महीन अंतर होता है। चीन ने अभी तक स्पष्ट रूप से 'समर्थन' शब्द का प्रयोग नहीं किया है, लेकिन 'सम्मान और समझ' की भाषा भारत के लिए एक बड़ी कूटनीतिक जीत मानी जा रही है। यह भारत की उस बढ़ती ताकत का प्रमाण है जिसने चीन को अपनी रणनीति पर पुनर्विचार करने के लिए मजबूर किया है। चीन का यह हृदय परिवर्तन क्या वाकई वास्तविक है या यह केवल ब्रिक्स और अन्य वैश्विक मंचों पर भारत को शांत रखने की एक चाल है, यह आने वाला समय बताएगा। लेकिन फिलहाल के लिए, नई दिल्ली और बीजिंग के बीच का 'बर्फ' पिघलना शुरू हो गया है।

 India China UNSC support : एक नए युग की आहट

10 फरवरी की यह बैठक भारत की विदेश नीति के लिए एक मील का पत्थर साबित हो सकती है। यदि चीन भविष्य में UNSC के मुद्दे पर भारत के पक्ष में खड़ा होता है, तो यह वैश्विक भू-राजनीति का सबसे बड़ा उलटफेर होगा। अभी के लिए, कैलाश मानसरोवर की गूंज और UNSC पर मिला सकारात्मक इशारा यह बताने के लिए काफी है कि ड्रैगन अब भारत के साथ सीधी टक्कर के बजाय 'स्थिर सह-अस्तित्व' की भाषा बोलना सीख रहा है।

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