New Start Treaty का अंत:  दुनिया भर में परमाणु संतुलन पर मंडराता खतरा

खबर सार :-
न्यू स्टार्ट संधि का अंत केवल अमेरिका और रूस का द्विपक्षीय मुद्दा नहीं है, बल्कि यह पूरी दुनिया की सुरक्षा से जुड़ा सवाल है। परमाणु हथियारों पर नियंत्रण हटने से हथियारों की नई दौड़ शुरू हो सकती है, जिससे वैश्विक अस्थिरता बढ़ेगी। ऐसे समय में कूटनीति और नए हथियार नियंत्रण समझौतों की जरूरत पहले से कहीं अधिक है।

New Start Treaty का अंत:  दुनिया भर में परमाणु संतुलन पर मंडराता खतरा
खबर विस्तार : -

End of New Start Treaty: अमेरिका और रूस के बीच रणनीतिक परमाणु हथियारों को सीमित करने वाली ऐतिहासिक न्यू स्टार्ट संधि अब औपचारिक रूप से समाप्त होने जा रही है। इसके साथ ही शीत युद्ध के बाद पहली बार ऐसा होगा, जब दुनिया की दो सबसे बड़ी परमाणु शक्तियों के बीच हथियार नियंत्रण को लेकर कोई भी कानूनी रूप से बाध्यकारी समझौता मौजूद नहीं रहेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यह स्थिति वैश्विक सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती बन सकती है।

क्या है न्यू स्टार्ट संधि?

न्यू स्टार्ट यानी न्यू स्ट्रेटेजिक आर्म्स रिडक्शन ट्रीटी पर वर्ष 2010 में अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति बराक ओबामा और रूस के तत्कालीन राष्ट्रपति दिमित्री मेदवेदेव ने हस्ताक्षर किए थे। यह संधि दोनों देशों के बीच सामरिक परमाणु हथियारों की संख्या को सीमित करने और पारदर्शिता बढ़ाने के उद्देश्य से बनाई गई थी।

परमाणु हथियारों पर तय की गई थी सख्त सीमा

इस समझौते के तहत अमेरिका और रूस को अपने-अपने तैनात रणनीतिक परमाणु हथियारों की संख्या सीमित करनी थी। इसमें अधिकतम 1,550 तैनात न्यूक्लियर वॉरहेड्स, 700 से अधिक तैनात मिसाइल और बॉम्बर्स की बात थी। इसके अलावा, दोनों देशों को एक-दूसरे की परमाणु साइट्स पर निरीक्षण (On-Site Inspection) की अनुमति देनी होती थी, ताकि पारदर्शिता बनी रहे।

New Start Treaty: 2021 में खत्म होनी थी संधि

न्यू स्टार्ट संधि की मूल अवधि 10 साल की थी, जो 2021 में समाप्त होनी थी। हालांकि, अंतिम समय पर इसे पांच साल के लिए बढ़ा दिया गया, जिससे इसकी वैधता फरवरी 2026 तक हो गई। उस समय इसे वैश्विक स्थिरता के लिए राहत की खबर माना गया था।

रूस ने क्यों रोका निरीक्षण?

फरवरी 2023 में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने एक बड़ा फैसला लेते हुए अमेरिकी निरीक्षकों को रूसी परमाणु ठिकानों पर जाने से रोक दिया। पुतिन का कहना था कि जब अमेरिका और उसके नाटो सहयोगी खुले तौर पर यूक्रेन युद्ध में रूस की हार को लक्ष्य बना रहे हैं, तब ऐसे माहौल में परमाणु साइट्स का निरीक्षण कराना असंभव है।

पूरी तरह पीछे नहीं हटा रूस

हालांकि, निरीक्षण रोकने के बावजूद रूस ने यह दावा किया कि वह संधि से पूरी तरह बाहर नहीं हुआ है। क्रेमलिन ने यह भरोसा दिलाया था कि वह न्यू स्टार्ट के तहत तय परमाणु हथियारों की सीमा का सम्मान करता रहेगा।

एक साल और मोहलत की पेशकश

सितंबर 2025 में पुतिन ने घोषणा की कि रूस एक और साल तक परमाणु हथियारों की लिमिट का पालन करने को तैयार है और अमेरिका से भी ऐसा करने की अपील की। उन्होंने चेतावनी दी थी कि न्यू स्टार्ट को पूरी तरह खत्म होने देना वैश्विक अस्थिरता को जन्म देगा और परमाणु हथियारों के प्रसार का खतरा बढ़ेगा।

बढ़ता वैश्विक तनाव और परमाणु धमकियां

हाल के वर्षों में अंतरराष्ट्रीय मंच पर तनाव तेजी से बढ़ा है। यूक्रेन युद्ध, मध्य-पूर्व संकट और एशिया-प्रशांत क्षेत्र में सैन्य गतिविधियों के बीच अब किसी भी बड़े संघर्ष में परमाणु हथियारों की धमकी आम होती जा रही है। ऐसे माहौल में न्यू स्टार्ट का खत्म होना स्थिति को और खतरनाक बना सकता है। नई हथियारों की दौड़ की आशंका, फरवरी 2026 के बाद अमेरिका और रूस अपने-अपने परमाणु कार्यक्रमों को लेकर पूरी तरह स्वतंत्र हो जाएंगे। इससे नए और अधिक घातक हथियारों का विकास, सैन्य ताकत दिखाने की होड़ और हथियार नियंत्रण की वैश्विक व्यवस्था कमजोर होने जैसे खतरे पैदा हो सकते हैं।

संयुक्त राष्ट्र की चिंता

संयुक्त राष्ट्र महासचिव पहले ही इस संधि के अंत को लेकर चिंता जता चुके हैं। उनका कहना है कि हथियार नियंत्रण समझौतों का टूटना दुनिया को और असुरक्षित बनाता है और गलत आकलन की स्थिति में विनाशकारी परिणाम सामने आ सकते हैं।

अन्य प्रमुख खबरें