Bangladesh Hindu Violence: बांग्लादेश में हिंदू और अन्य धार्मिक अल्पसंख्यकों के खिलाफ जारी हिंसा, उत्पीड़न और असुरक्षा को लेकर अमेरिका में गहरी चिंता देखी जा रही है। इसी कड़ी में बीते कुछ दिनों के दौरान अमेरिका के 25 प्रमुख शहरों में शांतिपूर्ण जागरूकता रैलियों का आयोजन किया गया। इन प्रदर्शनों का उद्देश्य किसी राजनीतिक एजेंडे (Political Agenda) को आगे बढ़ाना नहीं, बल्कि पीड़ितों के लिए वैश्विक स्तर पर संवेदना और समर्थन व्यक्त करना था।
इन रैलियों में भाग लेने वाले लोग कड़ाके की ठंड, बर्फीली हवाओं और जमी हुई सड़कों के बावजूद बड़ी संख्या में सिटी हॉल, सिविक सेंटर्स और सार्वजनिक स्थलों पर एकत्र हुए। प्रदर्शनकारियों ने मोमबत्तियां जलाकर, मौन रखकर और सामूहिक प्रार्थनाओं के माध्यम से बांग्लादेश में हिंसा के शिकार हिंदुओं और अन्य अल्पसंख्यकों के प्रति एकजुटता दिखाई।
आयोजकों ने स्पष्ट किया कि ये सभी रैलियां पूरी तरह गैर-राजनीतिक थीं और इनका मकसद केवल मानवीय मूल्यों की रक्षा करना था। एक मीडिया विज्ञप्ति के अनुसार, प्रदर्शनकारियों ने कमजोर और असुरक्षित अल्पसंख्यकों की सुरक्षा के लिए शांतिपूर्ण अपील जारी की। इन आयोजनों में किसी भी तरह के नारेबाजी या उग्र गतिविधि से बचते हुए गरिमा और संयम बनाए रखा गया।
मिडवेस्ट से लेकर पूर्वी और पश्चिमी तट तक फैले इन प्रदर्शनों में लिंचिंग, आगजनी, यौन हिंसा और लक्षित हत्याओं जैसी रिपोर्टेड घटनाओं के खिलाफ विरोध दर्ज कराया गया। प्रदर्शनकारियों ने आम नागरिकों को इन घटनाओं की जानकारी देते हुए अंतरराष्ट्रीय समुदाय से हस्तक्षेप और दबाव की मांग की, ताकि बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
इस राष्ट्रव्यापी अभियान का समन्वय दैपायन देब, दीप्ति महाजन, गीता सिकंद और दिव्या जैन ने किया। दैपायन देब ने कहा, “ये रैलियां शांतिपूर्ण, गरिमामय और पूरी तरह मानवीय उद्देश्य से प्रेरित थीं।” दीप्ति महाजन ने ज़ोर देते हुए कहा कि यह राजनीति का नहीं, बल्कि करुणा का विषय है। “जब निर्दोष लोगों को निशाना बनाया जाता है, तो डर या असुविधा से ऊपर उठकर खड़ा होना ज़रूरी होता है।”
गीता सिकंद ने बताया कि इन रैलियों में विभिन्न समुदायों और धर्मों के लोगों की भागीदारी ने आपसी एकता और सह-अस्तित्व का संदेश दिया। बड़ी संख्या में बांग्लादेशी हिंदू अमेरिकियों ने भी हिस्सा लेकर अपने परिजनों और समुदाय के भविष्य को लेकर चिंता जताई। उन्होंने बांग्लादेश सरकार की कथित उदासीनता पर भी सवाल उठाए।
दिव्या जैन ने इन अभियानों को “शांत लेकिन प्रभावशाली संकल्प” करार दिया। उन्होंने कहा, “यह शांत शक्ति थी, जो दिखाती है कि जागरूकता सामने आने से ही शुरू होती है।” कई शहरों में स्थानीय निर्वाचित प्रतिनिधियों और नागरिक नेताओं की मौजूदगी ने इन रैलियों को और मजबूती दी।
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