बलोचिस्तान में बम धमाके: ग्वादर और पंजगुर में सेना के वाहनों पर हमला, कई जवानों की मौत

खबर सार :-
बलूचिस्तान प्रांत के ग्वादर और पंजगुर ज़िलों में 2 मई को हुए दो अलग-अलग बम धमाकों में पाकिस्तान सेना के वाहनों को निशाना बनाया गया। सरकारी अधिकारियों ने अभी तक इस संबंध में कोई विस्तृत जानकारी नहीं दी है। रिपोर्टों के अनुसार, इन धमाकों में सेना के अधिकारियों और जवानों की मौत हुई है।

बलोचिस्तान में बम धमाके: ग्वादर और पंजगुर में सेना के वाहनों पर हमला, कई जवानों की मौत
खबर विस्तार : -

इस्लामाबाद: पाकिस्तान के बलोचिस्तान प्रांत में एक बार फिर हिंसा की घटनाओं ने सुरक्षा हालात पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्वादर और पंजगुर जिलों में हुए दो अलग-अलग बम धमाकों में पाकिस्तानी सेना के वाहनों को निशाना बनाया गया, जिनमें कई सैन्य जवानों और अधिकारियों के मारे जाने की खबर है। हालांकि, इन घटनाओं को लेकर अब तक आधिकारिक स्तर पर विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है।

कई सैन्य अधिकारियों के मरने का अंदेशा

मिली जानकारी के अनुसार, पहला हमला ग्वादर जिले के पसनी इलाके के शादिकुर में हुआ, जहां अज्ञात हमलावरों ने पाकिस्तानी सेना के एक वाहन को बम से उड़ा दिया। विस्फोट इतना शक्तिशाली था कि वाहन पूरी तरह नष्ट हो गया। इस हमले में कई सैनिकों के हताहत होने की आशंका जताई जा रही है।

इसके कुछ ही समय बाद पंजगुर जिले के चिदगी इलाके में इसी तरह का दूसरा हमला हुआ। इस हमले में भी सेना के वाहन को निशाना बनाया गया, जिसमें कई सैन्य अधिकारियों की मौत की खबर सामने आई है। दोनों हमलों के बाद सुरक्षा एजेंसियों ने इलाके में तलाशी अभियान तेज कर दिया है, लेकिन हमलावरों के बारे में अभी तक कोई ठोस जानकारी नहीं मिल सकी है।

इन घटनाओं की जानकारी ‘द बलोचिस्तान पोस्ट’ की रिपोर्ट में सामने आई है। इसी मीडिया प्लेटफॉर्म की एक अन्य रिपोर्ट के अनुसार, खुजदार जिले से अगवा किए गए एक व्यक्ति को सरकारी एजेंसियों ने रिहा कर दिया है, जबकि एक अन्य व्यक्ति को हिरासत में लिया गया है। इस तरह की घटनाओं को लेकर स्थानीय लोगों में नाराजगी लगातार बढ़ रही है।

विभाजन के समय से चल रहा तनाव

गौरतलब है कि बलोचिस्तान में जबरन गुमशुदगियों के खिलाफ लंबे समय से विरोध प्रदर्शन जारी हैं। क्वेटा प्रेस क्लब के सामने धरना रविवार को 6153वें दिन में प्रवेश कर गया, जो इस क्षेत्र में लोगों के असंतोष और पीड़ा को दर्शाता है।

बलोचिस्तान में अस्थिरता की जड़ें ऐतिहासिक और राजनीतिक कारणों से जुड़ी हैं। 1947 में भारत के विभाजन के समय कलात (वर्तमान बलोचिस्तान का हिस्सा) ने स्वतंत्र रहने की घोषणा की थी, लेकिन मार्च 1948 में पाकिस्तान ने इसे अपने नियंत्रण में ले लिया। इसके बाद से यहां समय-समय पर विद्रोह होते रहे हैं, जिनमें अब तक पांच बड़े आंदोलन शामिल हैं।

प्राकृतिक संसाधनों के बाद भी पिछड़ा है इलाका

वर्तमान सशस्त्र संघर्ष 2000 के दशक की शुरुआत से और अधिक तीव्र हो गया है। यह क्षेत्र प्राकृतिक संसाधनों जैसे गैस, तेल, सोना और तांबा से समृद्ध है, लेकिन इसके बावजूद यह पाकिस्तान का सबसे पिछड़ा और गरीब प्रांत माना जाता है। बलोच राष्ट्रवादी संगठनों का आरोप है कि केंद्र सरकार इन संसाधनों का शोषण करती है, जबकि स्थानीय आबादी को इसका लाभ नहीं मिलता।

इसी असंतोष के चलते बलोच लिबरेशन आर्मी और बलोच लिबरेशन फ्रंट जैसे संगठन सक्रिय हैं, जो ‘आज़ाद बलोचिस्तान’ की मांग को लेकर सुरक्षा बलों पर लगातार हमले करते रहते हैं। हाल के दिनों में इन संगठनों ने कई बड़े हमलों की जिम्मेदारी ली है और दावा किया है कि पिछले 10 दिनों में 40 से अधिक पाकिस्तानी सैनिक मारे गए हैं।

लगातार हो रहे हमले और बढ़ती अशांति से साफ है कि बलोचिस्तान में हालात अभी भी बेहद नाजुक बने हुए हैं और आने वाले समय में स्थिति और गंभीर हो सकती है।
 

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