Bangladesh New PM: बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) लगभग दो दशक बाद दक्षिण एशियाई देश में सत्ता में लौट आई है। बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) के चेयरमैन तारिक रहमान (Tarique Rahman) मंगलवार को बांग्लादेश के नए प्रधानमंत्री के तौर पर शपथ लेंगे। वह आज शाम 4:00 बजे ढाका में प्रधानमंत्री की शपथ लेंगे। साथ ही भारत और बांग्लादेश के बीच रिश्तों में एक नए युग की शुरुआत होगी। साथ ही नए पीएम तारिक रहमान के सामने कई चुनौतियां होगी।
रिपोर्ट के मुताबिक, कैबिनेट के लिए शपथ ग्रहण समारोह पार्लियामेंट बिल्डिंग के साउथ प्लाजा में होगा। ऐसे इवेंट आमतौर पर प्रेसिडेंशियल पैलेस में होते हैं, लेकिन आज का शपथ ग्रहण समारोह साउथ प्लाजा में हो रहा है। यह इवेंट जुलाई 2024 में हिंसक विरोध प्रदर्शनों के दौरान जान गंवाने वालों की याद में साउथ प्लाजा में हो रहा है। यह समारोह बांग्लादेश की सियासत में एक अहम पल हो सकता है।
नई सरकार के शपथ ग्रहण समारोह में कई जानी-मानी अंतरराष्ट्रीय हस्तियां मौजूद रहेंगी। इसमें भूटान के प्राइम मिनिस्टर शेरिंग तोबगे, भारतीय लोकसभा स्पीकर ओम बिरला और पाकिस्तान के प्लानिंग मिनिस्टर अहसान इकबाल के शामिल होने की उम्मीद है। नेपाल के फॉरेन मिनिस्टर बाला नंद शर्मा, श्रीलंका की हेल्थ मिनिस्टर नलिंडा जयतिस्सा, ब्रिटेन की इंडो-पैसिफिक अंडर-सेक्रेटरी सीमा मल्होत्रा और मालदीव के प्रेसिडेंट मोहम्मद मुइजू शामिल हैं।
दरअसल 18 साल तक निर्वासित रहने के बाद तारिक रहमान (Tarique Rahman) मंगलवार को बांग्लादेश के प्रधानमंत्री के तौर पर शपथ लेंगे। लेकिन इस ताज के साथ तारिक रहमान को बड़ी चुनौतियों का भी सामना करना पड़ेगा। इन चुनौतियों से उनका निपटना आने वाले दशकों में ढाका का भविष्य तय करेगा। नए पीएम तारिक रहमान को जमात के कट्टरपंथ, खुद पर लगे भ्रष्टाचार के दाग, अर्थव्यवस्था, बांग्लादेश में बढ़ती आईएसआई की ताकत और भारत के साथ बिगड़े रिश्ते की चुनौतियों से निपटना होगा।
बांग्लादेश की घरेलू पॉलिटिक्स को मैनेज करना होगा। इसमें बड़ी संख्या में अवामी लीग के सपोर्टर शामिल हैं, जिन्होंने अपनी पार्टी पर बैन लगने के बाद जमात-ए-इस्लामी को वोट दिया था। रहमान को उन्हें साथ लेकर चलना होगा। साथ ही 77 सीट वाली जमात-ए-इस्लामी के कट्टरपंथ से भी निपटना होगा। इसके बाद बांग्लादेश के बेकाबू स्टूडेंट लीडर आते हैं, जिन्हें लगता है कि वे सरकार गिरा सकते हैं। शुक्र है कि रहमान के पास उनसे निपटने के लिए 297 में से 209 सीटों का मज़बूत बहुमत है।
तारिक रहमान पर पहले भी कई बार करप्शन के आरोप लग चुके हैं। रहमान को डार्क प्रिंस कहा जाता था, जब उनकी मां खालिदा ज़िया 2001 से 2006 तक बांग्लादेश की प्राइम मिनिस्टर थीं। 2007 में मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप में गिरफ्तार होने के बाद उन्हें 17 महीने की जेल भी हुई थी।
बांग्लादेश में युवाओं की आबादी बहुत ज़्यादा है, और उन्हें नौकरियों की ज़रूरत है। तारिक रहमान उन्हें नाराज़ नहीं कर सकते। इस बीच, बांग्लादेश की इकॉनमी रेडीमेड कपड़ों पर ज़्यादा निर्भर हो गई है। फॉरेन एक्सचेंज रिज़र्व कम हो गया है, और महंगाई बढ़ गई है।
कई रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि पाकिस्तान की इंटेलिजेंस एजेंसी, ISI,जमात-ए-इस्लामी को अपना साथी मानती है। ISI ने बांग्लादेश के स्टूडेंट मूवमेंट में भी बड़ी भूमिका निभाई थी। यह भारत के लिए चिंता की बात है, लेकिन इससे निपटना तारिक रहमान के लिए भी एक बड़ी चुनौती है।
तारिक रहमान को बांग्लादेशी पॉलिटिक्स में तारिक ज़िया के नाम से जाना जाता है। उनकी मुख्य पहचान यह है कि वे ज़ियाउर रहमान और पूर्व पीएम खालिदा ज़िया के बेटे हैं। उनकी ज़िंदगी और पॉलिटिकल पहचान काफी हद तक उनके परिवार के नाम से जुड़ी हुई है। उनका जन्म 1967 में हुआ था, जब बांग्लादेश को ईस्ट पाकिस्तान के नाम से जाना जाता था, जिसका मतलब है कि यह अभी भी आज के पाकिस्तान का हिस्सा था। 1971 के लिबरेशन वॉर (बांग्लादेश की आज़ादी की लड़ाई) के दौरान, तारिक रहमान जब 4 वर्ष के थे तब उन्हें हिरासत में लिया गया था वो भी कुछ समय के लिए। इसी वजह से, उनकी पार्टी, BNP उन्हें “युद्ध के सबसे कम उम्र के कैदियों में शामिल” बताकर सम्मान देती है।
तारिक रहमान की उम्र केवल 15 साल के थे जब उनके पिता ज़ियाउर रहमान की हत्या कर दी गई थी। 2007 में उन्हें भ्रष्टाचार के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। उन्होंने जेल में शारीरिक और मानसिक टॉर्चर का आरोप लगाया। रिपोर्ट्स के मुताबिक, उनकी रिहाई राजनीति से दूर रहने की शर्त पर हुई थी। उस साल रिहा होने के बाद, वह 2008 में मेडिकल इलाज के लिए लंदन चले गए और फिर कभी बांग्लादेश नहीं लौटे।
तारिक रहमान के शपथ लेने के साथ ही करीब लगभग 35 सालों बाद बांग्लादेश को एक पुरुष प्रधानमंत्री मिलेगा। मुस्लिम देश बांग्लादेश में, 1991 से 2024 तक सिर्फ़ महिलाएं (खालिदा ज़िया और शेख हसीना) ही प्रधानमंत्री पद पर रहीं।
बांग्लादेश के रेगुलर (नॉन-केयरटेकर) प्रधानमंत्रियों की लिस्ट में आखिरी पुरुष प्रधानमंत्री काज़ी ज़फ़र अहमद थे, जिन्होंने 12 अगस्त, 1989 से 6 दिसंबर, 1990 तक सेवा की। 2024 में शेख हसीना के इस्तीफ़े के बाद, मुहम्मद यूनुस अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार बने।
गौरतलब है कि बांग्लादेश में 13वां संसदीय चुनाव 12 फरवरी को हुआ था। 13वें संसदीय चुनाव में 300 में से 299 सीटों पर वोटिंग हुई। 13 फरवरी की रात को 297 सीटों के लिए जीतने वाले कैंडिडेट्स का अनाउंसमेंट किया था। BNP ने 297 में से 209 सीटें जीती हैं। हालांकि, हाई कोर्ट के ऑर्डर के बाद, चटगांव-2 और चटगांव-4 के लिए नोटिफिकेशन अभी तक जारी नहीं किए गए हैं।
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