लखनऊ, मध्य पूर्व में अमेरिका सैन्य गतिविधि बढ़ा रहा है। इसकी पुष्टि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप खुद कर चुके हैं। ईरान और इजरायल के संघर्ष में दखलंदाजी के लिए अमेरिका को इतनी जल्दबाजी है कि अमेरिकी राष्ट्रपति कनाडा की जी-7 शिखर सम्मेलन छोड़कर वापस लौटे थे। पिछले दिन वह कह भी चुके हैं कि ईरान में वह दखल बढ़ाएंगे। ट्रंप ने यह भी कहा था कि ईरान के सुप्रीम नेता अयातुल्ला खामनेई के बारे में उनको पता है। ट्रंप के बारे में कहा जा रहा है कि वह सैन्य ठिकाना भी तलाश रहे हैं।
इसके लिए पाकिस्तान उनकी पसंदीदा जगह बन सकती है। इसीलिए उन्होंने पाक फील्ड मार्शल असीम मुनीर को लंच पर बुलाया था। इधर, मीडिया रिपोर्टां में यह भी हलचल है कि यदि अमेरिका ने इजरायल और ईरान के संघर्ष में दखलंदाजी की तो कई राष्ट्र दूर रहकर इसे केवल देख नहीं सकते हैं। पेंटागन से मध्य पूर्व में अतिरिक्त फाइटर जेट्स, री-फ्यूलिंग टैंकर्स तैनात करने की रिपोर्ट चर्चा में है। चीन और रूस के नाम भी अमेरिकी नीति के विरोध में उछाले जा रहे हैं।
इजरायल और ईरान के बीच संघर्ष थमने का नाम नहीं ले रहा है। इजरायल के साथ अभी तक अमेरिका मजबूती के साथ खड़ा है। हथियारों के मामलों में खामनेई का देश मजबूत खड़ा है। इजरायल के पास ईरान से जंग लड़ने की शक्ति ज्यादा दिन के लिए नहीं है, लिहाजा उसको मदद करने के लिए अमेरिका के कई युद्धपोत ईरान के नजदीक पहुंच रहे हैं। हालांकि, अमेरिका के रक्षामंत्री पीट हेगसेठ ने स्पष्ट किया कि अमेरिकी सैन्य हथियारों की तैनाती और गतिविधि बढ़ाने का मकसद अपने लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। हिंद महासागर में अमेरिका के युद्धपोत पहले से तैनात हैं। इनको वह ईरान की तरफ पहुंचने के निर्देश दे चुका है। ट्रंप ने पिछले दिनों कहा था कि यदि ईरान ने उसके देश के लोगों को नुकसान पहुंचाया तो वह परिणाम भुगतेगा। अब वही ट्रंप कह रहे हैं कि ईरान के आसमान पर हमारा नियंत्रण है।
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