Mritunjay Dixit
लगातार पराजय के बाद भी कांग्रेस के गांधी परिवार को लग रहा है कि भारत में राहुल गांधी अत्यंत लोकप्रिय हैं किंतु उन्हें हर बार निर्वाचन आयोग के माध्यम से बेईमानी करके, वोट चोरी करके चुनाव में हरवा दिया जाता है। लोकसभा चुनाव -2024 के बाद आयोजित हरियाणा, दिल्ली और महाराष्ट्र के विधानसभा चुनावों में लोकसभा चुनावों के विपरीत चुनाव परिणाम आ गये वहां पर भाजपा की पूर्ण बहुमत की सरकारें फिर बन गई और बस यही बात राहुल गांधी और कांग्रेस सहित विपक्ष को हजम नही हो पा रही है। राहुल गांधी के नेतृत्व में समूचा विपक्ष एक बार फिर चुनाव आयोग के खिलाफ खड़ा हो गया है और उस पर वोट चोरी करने का आरोप लगा रहा है। दरअसल नेशनल हेराल्ड से लेकर वाड्रा के जमीन घोटाले तक पूरा परिवार जमानत पर है। ऐसे में राहुल गांधी वोट चोरी का मुद्दा उछालकर व एसआईआर का विरोध कर लोकतंत्र के तथाकथित रक्षक की छवि बनाना चाह रहे हैं।
राहुल गाँधी ने इस बार अपने विरोध की फुलझड़ी एस.आई.आर. के विरोध में सुलगाई और फिर प्रेस कांफ्रेंस के एटम बम तक पहुँच गए। किंतु यह नया एटम भी फुस्स हो गया है तो अब उनकी टीम इस मुद्दे को धार देने के लिए सोशल मीडिया पर आक्रामक अभियान चला रही है। चुनाव आयोग को सोशल मीडिया पर आग लगा देंगे, भारत को बांग्लादेश बना देंगे जैसे पोस्ट के सहारे देश में मोदी सरकर के प्रति नफरत की भावना को प्रबल करने का महाअभियान चलाया जा रहा है। अब इस अभियान में हिंदू पर्वो को प्रतिक बनाकर उनका भी अपमान किया जा रहा है जैसे एक पोस्ट में राखी है और उसकी डोर को बीजेपी व चुनाव आयोग पकडे़ हुए है उसके मध्य में रक्षाबंधन लिखा है। वोट चोरी करने का यह आंदोलन बिल्कुल उसी तरह चलाया जा रहा है जिस प्रकार बांग्लादेश में “रजाकार- रजाकार“ आंदोलन चलाकर तत्कालीन सराकर के खिलाफ आंदोलन चलाया गया था। किंतु वोट चोरी के इस प्रकरण को लाकर विपक्ष ने यह साबित कर दिया कि भारत की ईवीएम बिल्कुल सही है और अगर कहीं किसी में कमी है तो वह है “वोटर लिस्ट“ (जिसको ठीक करने के लिए ही एस.आई.आर हो रहा है।
असल में बिहार के विरोधी दलों के नेताओं विशेषकर पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव के पत्र को आधार मानकर चुनाव आयोग ने विधानसभा चुनावों से पहले मतदाता सूची का गहन परीक्षण अभियान प्रारंभ किया है जिसे ( एसआईआर) कहा जा रहा है किंतु जब यह कार्य आरम्भ हुआ तब अचानक ही विपक्ष विरोध पर उतर आया है। चुनाव आयोग अपने अभियान के माध्यम से वोटर लिस्ट की सभी गड़बड़ियों को पूरी तरह से ठीक कर रहा है और इसमें किसी को भी आपत्ति नहीं होनी चाहिए थी। चुनाव आयोग बार- बार कह रहा है कि जो पात्र मतदाता है उनका नाम किसी भी हालत में सूची से नहीं काटा जाएगा जबकि हर अपात्र मतदाता को सूची से बाहर किया जाएगा। असल बात यह है कि इस सूची से अवैध बांग्लादेशी, रोहिंग्या, अन्य घुसपैठियों तथा सभी अवैध मतदाताओं का नाम खोजकर हटाया जा रहा है अतः अब मुस्लिम तुष्टिकरण में संलिप्त रहने वाले विरोधी दलों ने अपना गियर बदल दिया है व मतदाता सूची के गहन परीक्षण को असंवैधानिक बताकर संसद के मानसून सत्र में भी अवरोध पैदा कर दिया है।
इस बीच राहुल गांधी ने विपक्ष के आरोपों को धार देने के लिए पत्रकार वार्ता के माध्यम से वोट चोरी करने का एटम बम फोड़ ही दिया किंतु हर बार की तरह उनका यह एटम बम भी मानसून के मौसम में फुस्स हो गया । चुनाव आयोग ने राहुल के आरोपों को पूरी तरह से खारिज करने के साथ ही उन्हें नोटिस जारी कर शपथपत्र के साथ सबूत प्रस्तुत करने को कहा है। हरियाणा, कर्नाटक और महाराष्ट्र राज्य निर्वाचन आयोग की ओर से नोटिस जारी किया जा चुका है। चुनाव आयोग का कहना है कि राहुल गांधी या तो सबूत दें या फिर देश से माफी मांगे।
राहुल गांधी अब खुलकर अराजकता फ़ैलाने का प्रयास कर रहे हैं। राहुल गांधी के पास यदि वोट चोरी के सबूत हैं तो उन्हें ये सबूत लेकर चुनाव आयोग जाना चाहिए था तो आयोग सुबूतों की जांच करवा लेता जिससे दूध का दूध और पानी का पानी हो जाता। किंतु राहुल गांधी की नियत साफ नही हैं उन्हें तो केवल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की छवि सहित भारत की सभी संस्थाओं की छवि को आघात ही पहुंचाना है।
आज वोट चोरी करने के नाम पर हल्लबोल करने वाले वह समय भूल गये जब बूथ लूटा लिए जाते थे, लोकतंत्र लूटतंत्र बनकर रह गया था। बिहार में गहन मतदाता परीक्षण अभियान का विरोध कर रहे लोग यह भूल गये हैं कि देश का पहला एसआईआर अभियान नेहरू जी के जमाने में (1952) हुआ था फिर वह लगतार तीन बार हुआ और नेहरू जी ही तीन बार भारत के प्रधानमंत्री बने और उस समय जो विपक्ष था उसने इस प्रक्रिया का विरोध नहीं किया और न ही संसद ठप की।
देश में पहली वोट चोरी करके कांग्रेस पार्टी ने डा. अम्बेडकर को लोकसभा चुनावों में पराजित करवा दिया था। भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में वोट चोरी का अभूतपर्व दौर 1952 से 1984 तक देखा गया फिर 2004 से 2013 तक का दौर भी बहुत भयावह था। आज उत्तर प्रदेश के समाजवादी हों या फिर बिहार में तेजस्वी का परिवार सभी बूथ दर बूथ लूटने के महारथी थे। कांग्रेस को याद रखना चाहिए कि पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या के बाद केवल एक सीट का ही चुनाव रद्द होना चाहिए था लेकिन तब के चुनाव आयुक्त ने देश भर का बचा हुआ चुनाव रद्द करवा दिया और राजीव की श्रद्धांजलि सभा में सवार होकर देश का चुनावी परिदृष्य बदलवाने में महती भूमिका निभाई थी।
ऐसा प्रतीत होता है कि जिस प्रकार अमेरिका व पाकिस्तान को भारत की बढ़ती शक्ति पसंद नही आ रही हैं उसी प्रकार राहुल गांधी को भी भारत का विकास पसंद नही आ रहा है। राहुल गांधी सदा से ही भारत विरोधी विदेशी ताकतों के साथ खड़े दिखाई पड़ते हैं। राहुल गांधी अपने अभियान से भारत की जनता में संदेह पैदा कर रहे हैं और भ्रम की राजनीति कर अपना स्वार्थ सिद्ध करना चाहते हैं। हो सकता है कि राहुल गांधी नये मतदाता के मन में सन्देश उत्पन्न करने में सफल हो जाएं किंतु उनमें ऐसी योग्यता नहीं है कि वह अपने अभियान से सत्ता में बदलाव कर सकें।
वोट चोरी का यह अभियान भारतीय लोकतंत्र के विरुद्ध गहरा षड्यंत्र प्रतीत हो रहा है। अगर वोट चोरी हो रहे हैं तो राहुल गाँधी वायनाड और रायबरेली के आंकड़े लेकर क्यों नहीं आए? झारखंड, पश्चिम बंगाल या तमिलनाडु के आंकड़े और सबूत क्यों नहीं दिखाएं। उनका अभियान एकतरफा है इसलिए संदेह तो उत्पन्न होगा ही। गांधी परिवार की नजर में जहां कांग्रेस जीतती वहां पर सब ठीक बाकी जगह सब गलत, ऐसा नहीं चलने वाला।
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