Mritunjay Dixit
बिहार में विधानसभा चुनाव के दृष्टिगत तेजस्वी यादव के नेतृत्व वाले महागठबंधन के बाद अब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व वाले एनडीए गठबंधन ने भी अपना संकल्प पत्र जारी कर दिया है। दोनों ही गठबंधनों ने अपना संकल्प पूरा करने का वादा किया है। भाजपा गठबंधन ने अपने संकल्प पत्र में 25 प्रमुख संकल्प लिए हैं, जिन्हें सरकार बनने के बाद अगले पांच वर्षों में पूरा किया जाएगा। भाजपा गठबंधन का संकल्प पत्र प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चार प्राथमिकताओं – गरीब, किसान, युवा और महिला उत्थान को ध्यान में रखकर बनाया गया है।
एनडीए का संकल्प पत्र केंद्रीय बजट में बिहार के लिए की गई घोषणाओं को आगे बढ़ाने वाला है। संकल्प पत्र में 1990 से 2005 तक लालू राज में बिहार की स्थिति, 2005 से 2025 के मध्य बिहार में हुए बदलावों और किस प्रकार जंगल राज को छोड़कर बिहार तीव्रता से विकास के पथ पर अग्रसर हुआ है, इसका तुलनात्मक विवरण दिया गया है। एनडीए गठबंधन के संकल्प पत्र में यह भी बताया गया है कि एनडीए सरकार में बिहार में अब तक कितने किलोमीटर सड़कों, पुलों और रेलवे लाइनों का विस्तार हुआ है और कितने क्षेत्रों में विद्युतीकरण का कार्य हो चुका है।
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पहल पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बिहार की 75 लाख महिलाओं के खाते में 10 हजार रुपये डालकर पहले ही उनका दिल जीतने का काम किया है। संकल्प पत्र में इसी अभियान को और गति देने का वादा किया गया है। एनडीए ने अपने संकल्प पत्र में अपना रिपोर्ट कार्ड प्रस्तुत करके यह बताने का प्रयास किया है कि उनके संकल्प सच्चे हैं और उन पर भरोसा किया जा सकता है।
एनडीए गठबंधन के संकल्प पत्र में विकास के संकल्प के साथ-साथ सनातन हिंदू समाज पर भी पर्याप्त ध्यान दिया गया है। बिहार की चुनावी जनसभाओं में छठ मईया की चर्चा हो रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने छठ पूजा को यूनेस्को की सूची में डालवाने के लिए प्रयास करने की बात कही है। संकल्प पत्र में बिहार को आध्यात्मिक पर्यटन का वैश्विक केंद्र बनाने का संकल्प लिया गया है, जिसमें मां जानकी मंदिर, विष्णुपद मंदिर और महाबोधि कॉरिडोर का निर्माण व रामायण, जैन, बौद्ध और गंगा सर्किट का विकास सहित एक लाख ग्रीन होम स्टे स्थापित करने के लिए कोलैटरल-फ्री ऋण की सुविधा देने का संकल्प लिया गया है। यही नहीं, बिहार को कला, संस्कृति और सिनेमा का नया केंद्र बनाने का भी संकल्प लिया गया है।
एनडीए गठबंधन के संकल्प पत्र में युवाओं को नौकरी और रोजगार प्रदान करने, कौशल जनगणना कराकर कौशल आधारित रोजगार देने, तथा हर जिले में मेगा स्किल सेंटर से बिहार को ग्लोबल स्किलिंग सेंटर के रूप में स्थापित करने का संकल्प लिया गया है। मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना से महिलाओं को 2 लाख रुपये तक की सहायता राशि देकर 1 करोड़ महिलाओं को लखपति दीदी बनाने का संकल्प लिया गया है। अति पिछड़ा वर्ग को आर्थिक और सामाजिक रूप से सशक्त बनाने का भी संकल्प लिया गया है। बिहार के जननायक कर्पूरी ठाकुर के नाम से किसान सम्मान निधि की शुरुआत करने का संकल्प, मत्स्य-दुग्ध मिशन योजना से किसानों को समृद्ध करने का संकल्प लिया गया है।
बिहार में सात एक्सप्रेस वे, 3,600 किलोमीटर रेलवे ट्रैक का आधुनिकीकरण, अमृत भारत एक्सप्रेस और नमो रैपिड रेल सेवा का विस्तार करने का संकल्प व्यक्त किया गया है। हर जिले में मेडिकल सिटी और मेडिकल कॉलेज बनाने का संकल्प लिया गया है। पटना, दरभंगा, पूर्णिया, भागलपुर में इंटरनेशनल एयरपोर्ट और चार नए शहरों में मेट्रो रेल चलाने का वादा किया गया है। किसान सम्मान निधि तथा मछली किसानों की सहायता दोगुनी करके 9,000 रुपये करने सहित हर संभाग में अनुसूचित जाति के छात्रों के लिए आवासीय विद्यालय और ईडब्ल्यूएस छात्रों के लिए भी कई वादों की झड़ी लगाई गई है। गरीबों के लिए 50 लाख नए घर और मुफ्त राशन देने सहित आयुष्मान योजना का विस्तार करने का संकल्प करने के साथ ही बिहार को बाढ़ मुक्त बनाने का भी संकल्प लिया गया है।
एनडीए के संकल्प पत्र और महागठबंधन के तेजस्वी यादव के प्रण का तुलनात्मक अध्ययन किया जाए तो पता चलता है कि दोनों ने ही युवाओं को नौकरी देने का वादा किया है। तेजस्वी यादव का कहना है कि वह बिहार के हर परिवार को कम से कम एक सरकारी नौकरी अवश्य देंगे, जबकि नीतीश कुमार पहले ही ऐलान कर चुके हैं कि आने वाले 5 साल में वह 1 करोड़ युवाओं को नौकरी देंगे। विधवा और बुजुर्ग पेंशन की बात की जाए तो तेजस्वी यादव ने अपने प्रण में 1500 रुपये देने की बात कही है, जबकि नीतीश कुमार ने इस पेंशन को पहले से ही 1000 रुपये कर दिया है। दोनों ही गठबंधनों ने बिहार की जनता को मुफ्त बिजली देने का वादा किया है। तेजस्वी के प्रण में रोजगार, सामाजिक न्याय, महिला सशक्तीकरण और किसानों के हितों को प्राथमिकता देने का प्रण लिया गया है। तेजस्वी ने जो सबसे बड़ा प्रण किया है, वह है बिहार के हर परिवार को एक सरकारी नौकरी हर हाल में दी जाएगी और इसके लिए विधानसभा में कानून भी लाया जाएगा।
बिहार के विधानसभा महासमर में एनडीए और महागठबंधन दोनों ने ही अपने-अपने घोषणापत्रों के माध्यम से जनता को लुभाने के लिए पूरी ताकत झोंक दी है। दोनों ने ही अपने खास मतदाता वर्ग को लुभाने के लिए योजनाओं के विस्तार की बहार ला दी है। महिला मतदाता एनडीए के लिए हमेशा ट्रंप कार्ड रही हैं, इस वर्ग को साधने के लिए करीब 1 करोड़ महिलाओं को करोड़पति दीदी बनाने का मार्ग प्रशस्त किया जाएगा, यही नहीं, जीविका दीदी और आशा कार्यकर्ता जैसी सफल योजनाओं का विस्तार किया जाएगा। गरीब वर्गों को केजी से पीजी तक निशुल्क शिक्षा देने की घोषणा की गई है।
ज्ञातव्य है कि बिहार में वर्ष 2020 के विधानसभा चुनावों में महिलाओं ने 66.7 प्रतिशत मतदान एनडीए गठबंधन के पक्ष में किया था। राजनीतिक विश्लेषकों का अनुमान है कि अब यह चुनाव कल्याणकारी, मुफ्तखोरी और विकास बनाम आक्रामक रोजगार गारंटी और स्थायीकरण के बीच सिमट गया है, यद्यपि धार्मिक और जातीय ध्रुवीकरण पर भी बल दिया जा रहा है। जनता को किसके संकल्प या प्रण भाते हैं, यह तो परिणाम ही बताएंगे।
अन्य प्रमुख खबरें
विकसित भारत की नींव रखने वाला साहसिक बजट
सुरक्षा, स्वदेशीकरण और कूटनीति का भारतीय मॉडल !
सोमनाथ से सत्ता तक: आस्था की राजनीति और भाजपा का स्थायी प्रयोग
सृष्टि में ऊर्जा का नवसंचार करने वाला पर्व - मकर संक्रांति
जयंती विशेषः युवा आदर्श: स्वामी विवेकानंद
Bangladesh Elections 2026 : कटघरे में यूनुस सरकार
भारतीय राजनीति के अजातशत्रु - भारतरत्न अटल बिहारी वाजपेयी
BJP and Nitish Kumar in Bihar : भाजपा और नीतीश एक-दूसरे के पूरक
गुरु तेग बहादुर: धर्म और सिद्धांतों की रक्षा के लिये शहादत
बिहार विधानसभा चुनाव परिणाम और छोटे दल
किस्सा जंगलराज का: सत्ता के साये में आईएएस की पत्नी से होता रहा दुष्कर्म
बिहार की राजनीति में मुद्दों की भरमार, सभी दलों ने झोंकी पूरी ताकत
बिहार विधानसभा चुनाव: बाहुबलियों के राज्य में किन्नरों की चर्चा