गंगा एक्सप्रेसवे की 35 किलोमीटर लंबी पट्टी पर वायुसेना के गंगा एक्सप्रेसवे अभ्यास ने न केवल सैन्य कौशल की नई मिसाल पेश की है, बल्कि बदलते भू-राजनीतिक समीकरणों में भारत की तैयारियों का भी स्पष्ट संकेत दिया है। उत्तर प्रदेश के शाहजहाँपुर जिले में आयोजित इस अभ्यास में वायुसेना के प्रमुख लड़ाकू विमानों, राफेल, सुखोई-30 एमकेआई, मिराज 2000, मिग-29, जैगुआर, के साथ-साथ भारी परिवहन विमान सी-130जे सुपर हरक्यूलिस, एएन-32 और एमआई-17 वी5 हेलीकॉप्टरों ने भी हिस्सा लिया। यह अभ्यास ऐसे समय में हुआ है जब कश्मीर के पहलगाम में 22 अप्रैल को हुए आतंकी हमले में 26 नागरिकों की मौत हो गई। भारत ने इसके पीछे पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद को जिम्मेदार ठहराया है। उस हमले के बाद से दोनों देशों के बीच तनाव अपने चरम पर है।
भारत की यह सैन्य सक्रियता एक गहरे संदेश के तौर पर देखी जा रही है कि अगर उसके पारंपरिक वायुसेना अड्डे पर पहले हमले किए भी जाएँ, तो भी वह जवाबी कार्रवाई की पूरी क्षमता रखता है। यदि भारत के अंबाला, पठानकोट या श्रीनगर जैसे मुख्य एयरबेस को पहले हमले में निष्क्रिय किया जाता है, तो गंगा एक्सप्रेसवे जैसे वैकल्पिक रनवे भारतीय वायुसेना को बिना किसी बाधा के संचालन की शक्ति देंगे। इसके साथ ही कैट-!! उतकनीक और मोबाइल एयरफील्ड लाइटिंग सिस्टम की मदद से अब भारतीय वायुसेना अंधेरे और खराब मौसम में भी संचालन कर सकती है। यह सामरिक लाभ पाकिस्तान जैसी ताकतों के लिए चिंता का विषय है, जो आमतौर पर रात में भारतीय अभियानों की संभावना को कम आंकती रही हैं। एक्सप्रेसवे जैसे स्थानों पर अभ्यास कर, वायुसेना अपने विमानों को पारंपरिक ठिकानों से दूर रख सकती है, जिससे दुश्मन की योजना बनाना और भी कठिन हो जाता है। यह रणनीति केवल पाकिस्तान तक सीमित नहीं है। पूर्वी सीमा पर चीन के साथ लगातार बढ़ते तनाव को देखते हुए, इस तरह के अभ्यास भारतीय रक्षा नीति के बहु-आयामी दृष्टिकोण को रेखांकित करते हैं। लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (LAC) पर चीन की वायु शक्ति का सामना करने के लिए भी भारत अपनी युद्ध प्रणाली को लचीला और तकनीकी रूप से सक्षम बना रहा है। इस अभ्यास का सफलतापूर्वक एक ही रात में संपन्न होना, वह भी खराब मौसम में, भारत की तकनीकी कुशलता और जुझारूपन का प्रमाण है। जहाँ पाकिस्तान ड्रोन गिराने और वायुसीमा उल्लंघन के दावे कर रहा है, वहीं भारत ने यह दिखा दिया है कि वह 24-7 लड़ाई के लिए तैयार है, चाहे ज़मीन पारंपरिक हो या हाईवे।
इतिहास और वर्तमान की कड़ी में यह अभ्यास
1971 के भारत-पाक युद्ध में जब पाकिस्तान ने ऑपरेशन चंगेज़ ख़ान के तहत भारतीय एयरबेसों पर प्रारंभिक हमला किया था, तो उसने अमृतसर, अंबाला और पठानकोट जैसे अड्डों को निशाना बनाया था। भारत उस समय आश्चर्यचकित जरूर हुआ, पर लड़ाई में अंततः जीत भारत की हुई। वहीं, 2019 के बालाकोट एयरस्ट्राइक में भारत ने यह सिद्ध कर दिया कि वह न केवल जवाबी हमला कर सकता है, बल्कि निर्णायक भी साबित हो सकता है। आज जब पाकिस्तान के पास जेएफ-17 और एफ-16 जैसे फाइटर जेट्स हैं और उसके 12 से अधिक एयरबेस सक्रिय हैं, तो भारत की रणनीति अब एक कदम आगे जाती दिख रही है। वायु अभियानों को एक्सप्रेसवे जैसे अज्ञात और छिटपुट ठिकानों से संचालित करना। भारत को सैन्य क्षमता में पाकिस्तान से कई कदम आगे दिख रहा है।
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