दुनियाभर में बच्चों के लिए समस्या बन रहा मोटापा! 24 साल में 4 गुना तक बढ़ी दर, WHO ने जताई चिंता

खबर सार :-

बच्चों में मोटापा एक बड़ी समस्या बनकर उभर रहा है। WHO के अनुसार, 1990 के बाद से 5 से 19 साल के बच्चों और किशोरों में मोटापे की दर में 4 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।
बच्चों में तेजी से बढ़ रहा मोटापा, WHO ने जारी की ग्लोबल गाइडलाइन

खबर विस्तार : -

नई दिल्ली: मोटापा अब सिर्फ वयस्कों की समस्या नहीं रह गया है; बच्चों और किशोरों में बढ़ता वजन भी चिंता का विषय बनता जा रहा है। बदलती जीवनशैली, शारीरिक गतिविधि की कमी और खान-पान की आदतों में बदलाव के कारण बच्चों में मोटापे के मामले तेजी से बढ़े हैं। इस बढ़ती समस्या को देखते हुए विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने बच्चों और किशोरों में मोटापे की देखभाल और इलाज के लिए अपनी पहली वैश्विक गाइडलाइंस जारी की हैं।

WHO के अनुसार, 2024 में दुनियाभर में 5 से 19 साल की उम्र के लगभग 17 करोड़ (170 मिलियन) बच्चे और किशोर मोटापे से पीड़ित थे। इस संख्या में 5 से 9 साल की उम्र के लगभग 7 करोड़ बच्चे और 10 से 19 साल की उम्र के लगभग 10 करोड़ किशोर शामिल थे। चिंता की बात यह है कि 1990 के बाद से इस आयु वर्ग में मोटापे की दर चार गुना बढ़ गई है; उस समय यह दर लगभग 2 प्रतिशत थी जो 2024 तक बढ़कर 8 प्रतिशत हो गई।

मोटापा बढ़ा सकता है NCD का जोखिम

WHO का कहना है कि मोटापा एक ऐसी स्थिति है जो लंबे समय तक बनी रह सकती है और दोबारा हो सकती है। इसका असर सिर्फ बच्चे के वजन तक ही सीमित नहीं रहता; बचपन का मोटापा आगे चलकर कई गैर-संचारी रोगों (non-communicable diseases) के जोखिम को बढ़ा सकता है, जिनमें टाइप 2 डायबिटीज और दिल से जुड़ी बीमारियां शामिल हैं। इसके अलावा, मोटापे से जूझ रहे बच्चों को स्कूल या समाज में मजाक, भेदभाव और बुलीइंग (धौंस-पट्टी) का सामना करना पड़ सकता है, जिससे उनके आत्मविश्वास और मानसिक स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ सकता है।

बच्चों में मोटापा होने के कारण

बच्चों में मोटापा होने के कई कारण हो सकते हैं। गलत खान-पान, शारीरिक गतिविधियों में कमी इनमें प्रमुख हैं। आजकल की व्यस्त दिनचर्या में बच्चों के खान-पान पर भी विशेष रूप से ध्यान देना जरूरी है। बढ़ती उम्र में बच्चों को संतुलित पोषण की जरूरत होती है और जंक फूड से इनकी पूर्ति नहीं की जा सकती। इसके अलावा, ज्यादा देर तक टीवी और मोबाइल पर समय बिताना और खेल-कूद जैसे शारीरिक गतिविधियां न करना, जिससे शरीर में मौजूद अतिरिक्त कैलोरी बर्न नहीं होता। अगर बच्चे को किसी स्वास्थ्य समस्या से दवाइयां लेनी पड़ रही हैं तो इनके साइड इफेक्ट्स की वजह से भी बच्चों में मोटापा हो सकता है।

बच्चों में कैसे कम करें मोटापा?

बच्चों में मोटापा कम करने के लिए उनकी दिनचर्या पर विशेष ध्यान देना होगा। बच्चों को पौष्टिक भोजन से लेकर पर्याप्त नींद की भी जरूरत होती है। 

  • बच्चों को नाश्ते के रूप में जंक फूड न परोसें। याद रखें कि इनसे उनकी भूख तो मिट सकती है, लेकिन ये उनकी सेहत के लिए बिल्कुल भी अच्छा नहीं है। चिप्स, कोल्ड ड्रिंक्स, चाॅकलेट, पिज्जा और बर्गर या मैदे से बनी चीजें बच्चों को बिल्कुल न दें।
  • आप बच्चों को नाश्ते के रूप में घर में सूजी, पोहा या मिलेट्स से बनी चीजें दे सकती हैं। इससे उनकी भूख भी शांत होगी और ये उनके स्वास्थ्य के लिए भी फायदेमंद रहेगा।
  • बच्चों के लिए शारीरिक गतिविधि करना बहुत जरूरी है। प्रतिदिन कम से कम 1 घंटा उनके लिए आउटडोर गेम खेलना जरूरी है। बच्चों को साइकिल चलाने, रस्सी कूद या दौड़ने के लिए प्रोत्साहित करें।
  • बच्चों की नींद पर विशेष ध्यान दें। अक्सर बच्चे रात में देर से सोते हैं, जिससे उनकी नींद पूरी नहीं होती है। कम सोने से भूख नियंत्रित करने वाले हार्मोन पर असर पड़ता है। इससे बच्चे को ज्यादा भूख लगती है।
  • बच्चों की डाइट में ताजे फलों को शामिल करे। याद रखें कि ताजे फलों में फाइबर होता है, जिससे पाचन सुधरता है। वहीं, फू्रट जूस में फाइबर नहीं होता। इसलिए उनमें जूस के बजाए ताजे फल खाने की आदत डालें। इसके अलावा खीरा, मूली और टमाटर से बना सलाद और दही भी दिन में एक बार खाने के साथ बच्चों को जरूर दें।

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जीवनशैली को बेहतर बनाने पर जोर 

इन नई गाइडलाइंस में, WHO इलाज के दौरान सिर्फ वजन घटाने पर ध्यान देने के बजाय समग्र स्वास्थ्य और जीवनशैली को बेहतर बनाने पर जोर देता है। संगठन मोटापे से जूझ रहे बच्चों और किशोरों के लिए एक व्यवस्थित आहार, नियमित शारीरिक गतिविधि और सकारात्मक व्यवहार संबंधी बदलाव जैसे उपायों की सलाह देता है। 

मोटापे के इलाज के लिए दवा या सर्जरी नहीं

WHO ने यह भी स्पष्ट किया है कि छोटे बच्चों के लिए दवा या सर्जरी को मानक इलाज के तौर पर नहीं अपनाया जाना चाहिए। 0 से 9 साल की उम्र के बच्चों में मोटापे के इलाज के लिए दवा, बैरिएट्रिक सर्जरी और वजन घटाने वाले उपकरणों की सलाह नहीं दी जाती है। 10 से 19 साल के किशोरों के लिए, दवा पर तभी विचार किया जा सकता है जब विशेषज्ञों की देखरेख में चलाया गया जीवनशैली कार्यक्रम उम्मीद के मुताबिक नतीजे न दे पाए। 

बच्चे की मानसिक सेहत पर भी ध्यान देना जरूरी 

गाइडलाइंस में मानसिक स्वास्थ्य को नजरअंदाज न करने के महत्व पर भी जोर दिया गया है; एंग्जायटी, डिप्रेशन, कम आत्मविश्वास और भावनात्मक परेशानी जैसी समस्याएं बच्चे के खान-पान और शारीरिक गतिविधि की आदतों पर असर डाल सकती हैं। इसलिए, मोटापे के साथ-साथ बच्चे की मानसिक सेहत पर भी समय रहते ध्यान देना जरूरी है।

FAQ

1- बच्चों में मोटापा होने के क्या कारण हैं?

बच्चों में मोटापा मुख्य रूप से अनियमित दिनचर्या, गलत खान-पान और शारीरिक गतिविधियां न होने की वजह से होता है। इसके अलावा अन्य कारणों से भी मोटापा हो सकता है।

2- बच्चों में मोटापा को कैसे नियंत्रित किया जा सकता है?

बच्चों को जंक फूड बिल्कुल न दे। मैदे से परहेज करें। इसके अलावा बच्चों के लिए पर्याप्त नींद और खेल-कूद भी बहुत जरूरी है।

3- WHO ने क्या गाइडलाइन जारी की है?

WHO के अनुसार, 1990 के बाद से बच्चों में मोटापे की दर चार गुना बढ़ी है। संगठन ने सिर्फ वजन घटाने के बजाए समग्र स्वास्थ्य और जीवनशैली को बेहतर बनाने पर जोर दिया है।


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