आपके नमक में कितना है आयोडीन? स्वास्थ्य समस्याओं से बचने के लिए सही मात्रा का सेवन जरूरी
खबर सार :-
आयोडीन की कमी से कई तरह की स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं। इसके महत्व के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए हर साल 21 अक्टूबर को ग्लोबल आयोडीन डेफिशिएंसी प्रिवेंशन डे मनाया जाता है।
खबर विस्तार : -
नई दिल्ली: हमारे घरों में सुबह से लेकर रात तक बनने वाले लगभग हर खाने में नमक का इस्तेमाल होता है। चाहे दाल हो, सब्जी हो या सलाद, नमक के बिना खाने का स्वाद अधूरा लगता है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि आप जो नमक रोज इस्तेमाल करते हैं, उसमें आयोडीन की सही मात्रा है या नहीं? यह सवाल इसलिए जरूरी है क्योंकि आयोडीन की कमी से कई तरह की स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं।
यह थायरॉयड ग्रंथि से लेकर बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास तक हर चीज पर असर डाल सकता है। इसी महत्व को उजागर करने और लोगों में जागरूकता बढ़ाने के लिए, हर साल 21 अक्टूबर को 'ग्लोबल आयोडीन डेफिशिएंसी डिसऑर्डर्स प्रिवेंशन डे' (आयोडीन की कमी से होने वाले विकारों की रोकथाम के लिए वैश्विक दिवस) मनाया जाता है।
आयोडीन क्या है
आयोडीन एक जरूरी पोषक तत्व है, जिसकी शरीर को थोड़ी मात्रा में जरूरत होती है। यह थायरॉयड ग्रंथि को थायरॉयड हार्मोन बनाने में मदद करता है। ये हार्मोन शरीर के मेटाबॉलिज्म (भोजन को ऊर्जा में बदलने की प्रक्रिया) को नियंत्रित करने, शरीर का तापमान बनाए रखने और सामान्य विकास में अहम भूमिका निभाते हैं।
आयोडीन की कमी का असर
जब शरीर को पर्याप्त आयोडीन नहीं मिलता, तो थायरॉयड ग्रंथि जरूरी मात्रा में हार्मोन नहीं बना पाती। इससे हाइपोथायरायडिज्म जैसी स्थिति हो सकती है, जिसके लक्षणों में थकान, सुस्ती, वजन बढ़ना, ठंड ज्यादा लगना और रोजमर्रा के काम करने में कठिनाई आना शामिल हो सकता है। आयोडीन की कमी का एक और परिणाम 'घेंघा' (goiter) है। इस स्थिति में थायरॉयड ग्रंथि का आकार बढ़ जाता है, जिससे अक्सर गर्दन के सामने वाले हिस्से में सूजन दिखाई देती है। लंबे समय तक आयोडीन की कमी रहने से शरीर के सामान्य कामकाज पर भी बुरा असर पड़ सकता है।
गर्भावस्था में आयोडीन जरूरी
गर्भावस्था के दौरान आयोडीन का सेवन बहुत महत्वपूर्ण हो जाता है, क्योंकि इस समय गर्भ में पल रहे बच्चे का मस्तिष्क और तंत्रिका तंत्र (nervous system) विकसित हो रहा होता है। इस दौरान आयोडीन की गंभीर कमी बच्चे के मानसिक और शारीरिक विकास में बाधा डाल सकती है। कुछ मामलों में इससे गर्भपात, समय से पहले प्रसव और अन्य गंभीर जटिलताओं का खतरा भी बढ़ सकता है। शिशुओं और छोटे बच्चों में आयोडीन की कमी उनकी सीखने की क्षमता और विकास को प्रभावित कर सकती है; इसलिए गर्भवती महिलाओं, स्तनपान कराने वाली माताओं और बच्चों के पोषण पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए। हालांकि, आयोडीन का बहुत ज्यादा सेवन भी हानिकारक हो सकता है, इसलिए डॉक्टर की सलाह के बिना आयोडीन सप्लीमेंट नहीं लेने चाहिए।
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आयोडीन युक्त नमक का करें सेवन
आयोडीन की कमी से बचने का एक आसान तरीका रोजाना आयोडीन युक्त नमक (iodized salt) का इस्तेमाल करना है। नमक खरीदते समय यह जरूर देख लें कि उसकी पैकिंग पर 'आयोडीन युक्त' (iodized) लिखा हो। नमक की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए, इसे नमी और गर्मी से दूर, एक बंद डिब्बे में रखना चाहिए। अपने आहार में नमक की मात्रा सीमित रखें, क्योंकि बहुत अधिक नमक का सेवन आयोडीन की जरूरतें पूरी करने का सही तरीका नहीं है। नमक का ज्यादा सेवन हाई ब्लड प्रेशर और दिल से जुड़ी समस्याओं का खतरा बढ़ा सकता है।
आयोडीन के अन्य स्त्रोत
आयोडीन दूध, दही, अंडे और कुछ प्रकार के सीफूड (समुद्री भोजन) में भी पाया जाता है। इसमें आयोडीन की मात्रा इस बात पर निर्भर करती है कि भोजन किस प्रकार का है और उसे कैसे तैयार किया गया है। संतुलित आहार और आयोडीन युक्त नमक का सही इस्तेमाल शरीर में आयोडीन की जरूरतें पूरी करने में मदद कर सकता है।
FAQ
1- ग्लोबल आयोडीन डेफिशिएंसी डिसऑर्डर प्रिवेंशन डे क्या है?
अच्छे स्वास्थ्य तथा शारीरिक और मानसिक विकास के लिए आयोडीन के महत्व के बारे में जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से हर साल 'ग्लोबल आयोडीन डेफिशिएंसी डिसऑर्डर प्रिवेंशन डे' मनाया जाता है।
2- ग्लोबल आयोडीन डेफिशिएंसी डिसऑर्डर प्रिवेंशन डे कब मनाया जाता है?
ग्लोबल आयोडीन डेफिशिएंसी डिसऑर्डर प्रिवेंशन डे हर साल 21 अक्टूबर को मनाया जाता है।
3- आयोडीन के मुख्य स्रोत क्या हैं?
आयोडीन युक्त नमक, दूध, दही और पनीर, अंडे की जर्दी, हरे पत्तेदार सब्जियां आयोडीन के मुख्य स्रोत हैं।
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