दुर्गा पूजा पर इस तरह अपनाएं बंगाली लुक, लाल बाॅर्डर वाली साड़ी और बिंदी बढ़ाएंगी खूबसूरती

खबर सार :-

पश्चिम बंगाल में दुर्गा पूजा की रौनक चारों तरफ दिखाई देती है। पूजा पंडाल आकर्षक लाइटों से सजे होते हैं। वहीं, महिलाएं लाल बाॅर्डर वाली सफेद साड़ी पहनना पसंद करती हैं, जानें क्यों-
दुर्गा पूजा पर खास है लाल-सफेद साड़ी, बिंदी के साथ निखरेगा स्टाइल

खबर विस्तार : -

कोलकाता: जैसे-जैसे दुर्गा पूजा नजदीक आती है, पश्चिम बंगाल और खासकर कोलकाता रोशनी, कला, सजावट और धार्मिक उत्सव के रंग में रंग जाता है। तंग गलियों से लेकर मुख्य चौराहों तक, शहर अपने पंडालों (अस्थायी टेंट), शानदार रोशनी और तरह-तरह की सजावट की थीम से लोगों का मन मोह लेता है। इस दौरान पारंपरिक पहनावा भी उत्सव का एक अहम हिस्सा होता है।

दुर्गा पूजा के लिए अलग-अलग इलाकों में अस्थायी पंडाल बनाए जाते हैं। इनकी सजावट अक्सर ऐतिहासिक स्मारकों, मंदिरों या सामाजिक-सांस्कृतिक विषयों से प्रेरित होती है, जिसमें पारंपरिक बंगाली संस्कृति से लेकर आधुनिक कलात्मक सोच तक सब कुछ शामिल होता है। पंडालों के अलावा, आस-पास के इलाकों को भी रोशन किया जाता है; सड़कों और खास जगहों पर रंग-बिरंगी लाइटें, झांकियां और आधुनिक तकनीक से बने डिस्प्ले लगाए जाते हैं।

'महालया' का खास महत्व

दुर्गा पूजा की तैयारियों में 'महालया' का खास महत्व है। इस मौके से जुड़ी एक अहम परंपरा है 'चक्षु दान' यानी देवी दुर्गा की मूर्ति की आंखों को रंगने या बनाने की रस्म। पारंपरिक रूप से, मूर्तियां मिट्टी, बांस और कपड़े से बनाई जाती हैं। त्योहार के दौरान, लोग नए कपड़े पहनते हैं और अलग-अलग पंडालों में जाते हैं; रात में इन पंडालों को देखने के लिए बाहर निकलने की परंपरा सार्वजनिक उत्सव का एक अहम हिस्सा बन गई है। दुर्गा पूजा की परंपराओं में 'धुनुची' नृत्य का भी खास स्थान है; यह पारंपरिक नृत्य 'संध्या आरती' (शाम की प्रार्थना) के दौरान 'धुनाची' (मिट्टी का धूपदान) के साथ किया जाता है।

लाल बॉर्डर वाली सफेद साड़ी का आकर्षण

वहीं, 'विजयादशमी' के दिन जब देवी दुर्गा को विदाई दी जाती है, तब महिलाओं के बीच 'सिंदूर खेला' की परंपरा निभाई जाती है, जिसमें वे एक-दूसरे को सिंदूर लगाती हैं। त्योहार का समापन मूर्तियों के विसर्जन के साथ होता है। दुर्गा पूजा के दौरान, बंगाली महिलाओं के पारंपरिक पहनावे में लाल बॉर्डर वाली सफेद साड़ी खास तौर पर आकर्षण का केंद्र होती है, जिसे आमतौर पर 'लाल-पार' साड़ी कहा जाता है। यह साड़ी पारंपरिक बंगाली पहनावे की पहचान है और इसे सूती (कॉटन) और रेशम (सिल्क) जैसे कपड़ों से बनाया जाता है। बंगाल में 'तांत' जैसी पारंपरिक साड़ियों की एक अलग पहचान है। 

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शक्ति और ऊर्जा का प्रतीक है लाल रंग

इस साड़ी के इन दो रंगों से जुड़ी पारंपरिक मान्यताएं भी हैं। लाल रंग को शक्ति और ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है, जबकि सफेद रंग पवित्रता का प्रतीक है; यही वजह है कि दुर्गा पूजा के दौरान लाल-सफेद साड़ी को खास तौर पर पसंद किया जाता है। हालांकि, इसे सभी बंगाली महिलाओं के लिए जरूरी पहनावा मानना ​​सही नहीं होगा। साड़ी पहनने का पारंपरिक बंगाली अंदाज भी 'लाल-पार' साड़ी को एक अनोखी पहचान देता है; इसमें पल्लू और बॉर्डर को इस तरह से सेट किया जाता है कि साड़ी का लाल किनारा साफ तौर पर दिखाई दे।

बंगाली लुक में गहनों की भी अहम भूमिका

दुर्गा पूजा जैसे मौकों पर लाल बॉर्डर वाली सफेद साड़ी पहनने का रिवाज यहां के सांस्कृतिक और धार्मिक माहौल में गहराई से रचा-बसा है। पारंपरिक बंगाली लुक में गहनों की भी अहम भूमिका होती है। साड़ी के साथ सोने के हार, झुमके, चूड़ियां और पारंपरिक डिजाइन वाले गहने पहने जाते हैं, जो दुर्गा पूजा के दौरान पारंपरिक बंगाली पहनावे की खूबसूरती को और बढ़ा देते हैं।

फूलों के गजरे और लाल बिंदी भी है खास

नवरात्रि के दौरान अगर आप भी ऐसी साड़ी पहनने की सोच रही हों तो एक बात का खास ध्यान रखें। लाल बाॅर्डर वाली सफेद साड़ी पहनने के साथ अगर पूरे लुक को खूबसूरत बनाना हो तो अपने बालों में फूलों के गजरे के साथ माथे पर एक बड़ी लाल रंग की बिंदी लगाना न भूलें। ये आपके बंगाली लुक में चार चांद लगा देंगे। साड़ी के साथ पारंपरिक गहने, गजरा, बिंदी के साथ हल्का मेकअप भी अच्छा लगता है। जरूरी नहीं है कि आप हेवी मेकअप लगाएं। काजल, आई लाइनर और लिपस्टिक के साथ आप अपने लुक को कंप्लीट कर सकती हैं।

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