सुप्रीम कोर्ट का सात राज्यों को नोटिस, सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित रखने का आदेश, नीट पेपर को लेकर हुआ था प्रदर्शन

खबर सार :-

नीट-यूजी परीक्षा में अनियमितताओं के विरोध में देश की राजधानी दिल्ली के अलावा कई राज्यों में प्रदर्शन हुए थे। कई जगह पर हिंसा भी हुई थी। उसके बाद पुलिस ने कार्रवाई की थी। पूरे मामले पर कोर्ट ने दिल्ली, बिहार, महाराष्ट्र, असम, पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश और केरल सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
सुप्रीम कोर्ट का सात राज्यों को नोटिस, सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित रखने का आदेश, नीट पेपर को लेकर हुआ था प्रदर्शन

खबर विस्तार : -

नई दिल्ली, नीट-यूजी परीक्षा में अनियमितताओं के विरोध में देश की राजधानी दिल्ली के अलावा कई राज्यों में प्रदर्शन हुए थे। कई जगह पर हिंसा भी हुई थी। उसके बाद पुलिस ने कार्रवाई की थी। इसको लेकर सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को सुनवाई की। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने मामले की सुनवाई की। पूरे मामले पर कोर्ट ने दिल्ली, बिहार, महाराष्ट्र, असम, पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश और केरल सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। 

देशभर में एक समान दिशा-निर्देश बनाया जाना चाहिए

सुप्रीम कोर्ट ने सभी संबंधित अधिकारियों को प्रदर्शन के दौरान घटनास्थल के सभी सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित रखने के लिए कहा है। अदालत ने यह भी स्पष्ट कर दिया कि जिन लोगों के खिलाफ पहले से कोई आपराधिक मामला दर्ज नहीं था, लेकिन प्रदर्शन के दौरान उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया। इस पर अभी फुटेज देखे जाने हैं, फिलहाल नया मामला उनके  खिलाफ नहीं होगा। कोर्ट से यह मांग की थी कि भविष्य में शांतिपूर्ण प्रदर्शनों के लिए देशभर में एक समान दिशा-निर्देश बनाया जाना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट इस पर निर्देश दे। याचिकाकर्ताओं ने कुछ पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी। इसमें सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश की निगरानी में एसआईटी से जांच की मांग की गई थी।

अपनी मांगें संवैधानिक दायरे में रखीं

कोर्ट में सुनवाई के दौरान सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि यह छात्रों का पूरी तरह शांतिपूर्ण प्रदर्शन था। इस दौरान उन्होंने अपनी मांगें संवैधानिक दायरे में रखीं। आगे उन्होंने कहा कि ऐसा कई बार हुआ, जबकि आंदोलनों में अक्सर कुछ बिन बुलाए लोग आ जाते हैं। इनका एजेंडा अलग होता है। ऐसे लोग धीरे-धीरे आंदोलन का हिस्सा बन जाते हैं। अपनी बात रखते हुए कहा कि लोकतंत्र में आंदोलन स्वाभाविक है। पहले भी हुए। प्रदर्शन के दौरान कुछ हिंसात्मक वारदातें हुईं, जिनमें आंसू गैस के गोले छोड़ने की बात हो रही है। आगे कहा कि अब समय आ गया है, यह तय किया जाए कि आंसू गैस जैसे साधनों का इस्तेमाल किन परिस्थितियों में और किस तरीके से किया जाना चाहिए।

बिना किसी रोक-टोक के कार्रवाई की

याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकर नारायण ने अपनी बात रखी। इसमें अदालत को बताया कि एक एएसआई ने खुद कार के शीशे तोडे। इस व्यक्ति का वीडियो मौजूद है। पीडित छात्रों का पक्ष रखते हुए अदालत को बताया कि पुलिस ने बिना किसी रोक-टोक के कार्रवाई की। यदि ऐसे मामलों की जिम्मेदारी तय नहीं होगी, पुनरावृत्ति होती रहेगी। पूरे मामले की जांच के लिए एसआईटी में सुप्रीम कोर्ट के किसी पूर्व न्यायाधीश को शामिल करने की अपील हुई। जवाब में सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि अदालत का मानना है कि यह स्वतंत्र, निष्पक्ष और पारदर्शी जांच का विषय है। धरना प्रदर्षन में जिसने भी कानून का उल्लंघन किया है, उस पर कार्रवाई होगी। यदि जवाबदेही तय नहीं हुई तो जांच का कोई मतलब नहीं बनता।

नाबालिगों को तुरंत रिहा किया जाना चाहिए

एसआईटी की संरचना पर अदालत ने अभी कोई फैसला नहीं किया है। वरिष्ठ अधिवक्ता शादान फरासत ने सुनवाई के दौरान अदालत को बताया कि बिहार सरकार ने एफआईआर वापस लेने की घोषणा की है। वहां 150 से अधिक नाबालिग अब भी हिरासत में हैं। आरोप लगाते हुए कहा कि कई बच्चों को 48 घंटे से अधिक हिरासत में रखा गया। उनको 40 घंटे बाद मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया। उन्होंने बताया कि हिरासत में लिए गए बच्चों में एक की उम्र 13 साल है। ऐसे नाबालिगों को तुरंत रिहा किया जाना चाहिए।

250 पुलिसकर्मी इस घटना में घायल हुए

मामले की सुनवाई में सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि 250 पुलिसकर्मी इस घटना में घायल हुए हैं। उन्होंने अदालत से मांग की कि सच्चाई सामने आनी चाहिए। ऐसा नहीं लगता कि छात्र इस तरह की हिंसा कर सकते हैं? इसकी जांच पूरी करने तक किसी को आरोप मुक्त न माना जाए। यह बात दोहराई कि प्रदर्शन के बीच कुछ असामाजिक और बिन बुलाए मेहमान शामिल हो गए थे। उन्होंने दावा किया कि सरकार के पास ऐसा डेटा है, जिससे पता चलता है कि गंभीर मामलों के आरोपी मौजूद थे।

सरकार छात्रों के साथ है खड़ी

तुषार मेहता ने माना और कहा कि यदि छात्रों पर जरूरत से ज्यादा बल प्रयोग हुआ है तो यह गंभीर मामला बनता है। उन्होंने कहा कि सरकार छात्रों के साथ खड़ी है। पुलिस के बचाव में कहा कि ऐसा भी नहीं होना चाहिए कि पुलिस का मनोबल गिरे। इसलिए सरकार भी इस मामले में स्वतंत्र जांच के पक्ष में है। सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने प्रदर्शन के दौरान सवाल उठाया और कहा कि भोजन बांटने वाले जुनैद मलिक को पुलिस हिरासत में लेकर मसूरी गई। उनके परिवार को लगातार प्रताड़ित किया जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने मामले को गंभीर माना और आगे की सुनवाई 3 अगस्त को तय की है।

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