तमिलनाडुः कटौती के कारण दूध की कीमतें बढ़ने के बावजूद तिरुची के किसानों को नहीं मिली राहत

खबर सार :-

कारोबारियों को बिना बताए चार रूपये प्रति लीटर दूध के दाम कम कर दिए। समितियों की ओर से बताया जा रहा है कि कर्मियों के बोनस और कारोबारियों के प्रोत्साहन में खर्च किए जाएंगे। वहीं कारोबारी आंदोलन के लिए एकजुट हो रहे हैं।
कारोबारियों को बिना बताए कम कर दिए दूध के दाम, समितियों के खिलाफ Tiruchi में प्रदर्शन की तैयारी

खबर विस्तार : -

तिरुची, राज्य सरकार की ओर से तमिलनाडु में चलाई जा रही दूध खरीद योजना को लेकर इन दिनों नागरिकों में नाराजगी देखने को मिल रही है। दुग्ध समितियों के खिलाफ दूध कारोबारियों ने मोर्चा खोल रखा है। आने वाले दिनों में यह आंदोलन का रुख ले सकता है।

दूध कारोबारियों में राज्य सरकार की ओर से चलाई जा रही तमिलनाडु में दुग्ध समिति के खिलाफ नाराजगी देखी जा रही है। समितियों पर आरोप है कि जो राशि यहां से तय की गई थी, उसके अनुरूप पैसा नहीं मिल रहा है। दूध खरीद भुगतान में कटौती कर दी गई है और इसकी जानकारी भी नहीं दी। तिरुची मैं किसानों ने शिकायतें दर्ज कराई हैं। आरोप है कि तमिलनाडु सरकार द्वारा घोषित संशोधन दर से कम राशि दी जा रही है। राज्य सरकार ने गाय के दूध की खरीद के लिए योजना चला रखी है और इसमें ₹6 की वृद्धि भी की है।

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समितियों ने अचानक दूध के दाम कम कर दिए

दूध के कारोबारी को प्रति लीटर ₹38 मिल रहे थे, अब इनमें वृद्धि होने के बाद ₹44 प्रति लीटर तय किए गए थे। इसी तरह भैंस के दूध की कीमत तय की गई थी। इसमें 53 रुपए प्रति लीटर के हिसाब से किसान अपना दूध बेच रहे थे, लेकिन 3 अक्टूबर के बाद से किसानों में नाराजगी देखी जा रही है। कई किसानों ने दूध का बिक्री भी रोक दी है। आरोप है कि बैंक खातों में किसानों को जब भुगतान की राशि पहुंची, उसमें ₹4 प्रति लीटर के हिसाब से कम थी। दुग्ध समितियों से जब दूध उत्पादकों ने संबंध में बात की गई तो वहां से भुगतान के बारे में बताया गया।

बताया गया कि अब 44 की जगह पर 40 ही मिला करेंगे। कटौती वाले पैसों से कर्मचारियों का वेतन, त्यौहार का बोनस और महीने में मिलने वाले इंसेंटिव यानी की प्रोत्साहन राशि के लिए रोकी गई है। यह बात किसानों के सिर के ऊपर से जा रही है। जाहिर सी बात है कि किसानों या व्यापारियों का पैसा काटने का औचित्य नहीं बन रहा है। अब बताया गया है कि वेतन और प्रशासन के लिए ₹185 पैसे प्रति लीटर, बोनस के लिए ₹115 पैसे जबकि महीने के अंत में प्रोत्साहन राशि के रूप में ₹1 कटौती में शामिल हैं। इस तरह से कुल ₹4 की कटौती की गई है।

चार रुपये प्रति लीटर काटने की जानकारी नहीं दी

किसानों का तर्क था कि इन कटौतियों का मूल संशोधन से मिलने वाली राहत अब समझ से परे है। इसी पैसे से पशुओं के लिए चारा की व्यवस्था की जाती थी। जिन किसानों को प्रतिदिन 10 लीटर दूध निकालना होता है, उनके ₹40 कम हो जाएंगे। किसानों का कहना है कि सरकार को प्रशासनिक और संबंधित लागत तय करनी चाहिए। अपने खर्चे निकालने के लिए दूध उत्पादकों के ऊपर अतिरिक्त भार डाल दिया गया है। किसानों ने मांग की कि उनके चार रुपए वापस किए जाएं। अन्यथा वह दूध लाना बंद कर देंगे।

साथ ही नई कीमत दर लागू करके पुनः ₹44 प्रति लीटर निर्धारित करने की मांग की है। आवनि के तिरुची प्रबंधन की ओर से जानकारी दी गई है कि सरकारी दूध समितियां के प्रशासनिक खर्चों के लिए कटौती की जा रही हैं। इनमें ₹1 किसानों को भुगतान के लिए रखा जा रहा है। उत्पादकों को कटौती के 75 पैसे बाद में प्रोत्साहन के रूप में दिए जाएंगे। उन्होंने बताया कि बोनस के लिए कोई गलत कटौती नहीं की जाएगी। दुग्ध संघ की ओर से कहा गया है कि यह मामूली कटौती है। प्रोत्साहन के रूप में किसानों को दी जाएगी।

एकजुट होकर अब प्रदर्शन के मूड में कारोबारी

दूसरी ओर दूध कारोबारियों ने आरोप लगाया कि यदि उनका पैसा वापस नहीं किया जाता है तो वह एकजुट होकर प्रदर्शत करेंगे। किसानों के पैसे काटकर किसानों को देंगे, इसका मतलब समझ से परे है। जब सरकारी रेट घोषित किया गया है, ₹44 तो किसानों को ₹40 देने का कोई मतलब नहीं निकलता है। यदि दूध समितियां के रेट में कुछ फर्क नजर आ रहा है तब भी सवाल यही है कि ₹44 तय होने के बाद उन्हें काम क्यों दिया जा रहा है? किसी का वेतन खर्च निकालने के लिए या प्रोत्साहन राशि निकालने के लिए किसानों के दूध के दाम कम कर देना न्यायपूर्ण कार्य नहीं लग रहा है। यदि किसानों का रुख गर्म हुआ तो वास्तव में यह आंदोलन का रूप लेगा।

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