भीखनपुर 12 नंबर गुमटी पर रोजाना जाम, घंटे भर खड़ी रहती हैं मालगाड़ियां; रेल मंत्री से गुहार

खबर सार :-

सरकार आम लोगों की सुविधा के लिए तमाम कोशिशें करती हैं, लेकिन रेल क्रासिंग पर अक्सर रेल को खड़ा करने की स्थिति को परंपरा बना लिया गया है। ऐसे में बच्चों की पढ़ाई, कामगार, नौकरीपेशा ही नहीं, एंबुलेंस में पड़ा मरीज भी दोहरा कष्ट उठाने के लिए लाचार है। स्थानीय लोगों का कहना है कि ऐसे उनकी सुनवाई नहीं होगी, इसलिए अब आंदोलन की तैयारी शुरू कर दी गई है।
भीखनपुर 12 नंबर गुमटी पर जाम में फंस जाती हैं एंबुलेंस, मरीज तड़पने के लिए विवश, आंदोलन की तैयारी तेज

खबर विस्तार : -

भागलपुर, भागलपुर शहर को दक्षिणी क्षेत्र और गोराडीह प्रखंड सहित कई ग्रामीण इलाकों से जोड़ने वाला प्रमुख रास्ता इस समय जाम झेल रहा है। यहां लोगों को बड़ी मुसीबत का सामना करना पड़ रहा है। यह किसी खास दिन के लिए नहीं, बल्कि रोक का काम बन गया है।

परेशान लोगों ने कई बार प्रशासन से इस दिशा में कदम उठाने की गुहार की है। स्थानीय जनप्रतिनिधियों से भी मांग की गई। लेकिन उनकी परेशानी पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। इस बार रेल मंत्री से किसी समाधान की मांग की गई है। भीखनपुर स्थित बारह नंबर गुमटी रेलवे फाटक पर रोजाना लगने वाले भीषण जाम ने स्थानीय लोगों का जीना मुहाल कर दिया है।

एक ओर डायवर्जन तो दूसरी ओर मार्ग संकरा

जानकारी के अनुसार, यहां पर एक तरफ जहां भोलानाथ पुल ओवरब्रिज (फ्लाइओवर) का निर्माण कार्य चलने के कारण रूट डायवर्ट है, वहीं दूसरी तरफ इस 12 नंबर गुमटी फाटक का बार-बार और लंबे समय तक बंद रहना लोगों के सब्र का इम्तिहान ले रहा है। रोज बच्चों को स्कूल जाने में दिक्कतों सामना करन पड़ रहा है। काफी समय लेकर चलने के बाद भी आवागमन में देर हो रही है। आफिस, बाजार और स्कूल सब लेट हो जाते हैं। इस हाल में जिंदगी पीछे हो रही है। भागलपुर रेल खंड पर पिछले कुछ समय में यात्री और मालगाड़ियों की संख्या में भारी इजाफा हुआ है। लेकिन ट्रेनों की बढ़ती तादाद के अनुपात में रेलवे की तकनीकी व्यवस्था नहीं सुधारी गई। बारिश के दौरान भी लोगों को अक्सर यहां खड़े होकर गाड़ी निकलने का इंतजार करना पड़ता था। 

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एंबुलेंस को निकालने की व्यवस्था नहीं

स्थानीय लोगों और रेल विशेषज्ञों का कहना है कि यहाँ उचित सिग्नल प्रणाली की व्यवस्था नहीं है। इसी कारण अक्सर ट्रेनें रेलवे फाटक के बिल्कुल करीब आकर खड़ी हो जाती हैं। मालगाड़ियों को ऐसे रोक दिया जाता है, जैसे कि उनका स्टॉपेज हो या फिर उनका वर्कशाप हो। यहां पर करीब एक-एक घंटे तक खड़ी रहती हैं। बैरियर गिरा रहता है और दोनों तरफ वाहनों की लंबी कतारें लग जाती हैं। इस रेलवे फाटक के अक्सर बंद रहने से बच्चों की पढ़ाई चौपट हो रही है। ट्यूशन जाने वाले छात्रों को भी मुसीबत का सामना करना पड़ रहा है।

समय पर स्कूल न पहुंच पाने के कारण बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। इससे भी ज्यादा दयनीय हालत औरों की है। इनमें बुजुर्ग भी परेशानी उठा रहे हैं। बीमारी की हालत में उनको अस्पताल लेकर जाना होता है, लेकिन यहां पर रुकना ही पड़ता है। गंभीर हालत में बीमार की चिंता किसी को नहीं रहती है। बस फाटक बंद।

यहां आकर जाम में अक्सर एम्बुलेंस फंसी रहती हैं। इससे मरीजों की जान पर बन आती है। स्थानीय निवासियों ने बताया कि भोलानाथ पुल संकरा है। उस पर यह 12 नंबर गुमटी दिन में दर्जनों बार बंद होती है। गाड़ियों के यहां रूकने से आसपास के लोग भी मुस्किल में फंस जाते हैं। जब मालगाड़ी एक घंटे के लिए खड़ी हो जाती है, तो पूरा इलाका ठप हो जाता है। 

पलायन करने जैसे बन रहे हैं हालात

स्थानीय निवासियों का कहना है कि आने वाले समय में वह रेल मंत्री से मिलेंगे और अपनी परेशानी बताएंगे। कई बार फाटक बंद होने से बच्चे की परीक्षा तक छूटने की नौबत आ गई है। रेलवे को कम से कम स्कूल और ऑफिस के समय मालगाड़ियों का परिचालन रोकना चाहिए या उन्हें आउटर पर खड़ा करना चाहिए। यही हाल रहा तो लोग कहीं और जाकर रहने लगेंगे। पलायन करने जैसे हालात रेल मंत्री से बताने की तैयारी की जा रही है।

स्थानीय जनप्रतिनिधियों के बारे में लोगांे ने बताया कि उनकी मांग काफी पहले की है। यदि उनमें क्षेत्र का विकास करना होता तो समस्या पर गौर करते। 
इलाज के लिए मरीज को भागलपुर सदर अस्पताल या मायागंज ले जाना हो, तो इस गुमटी पर आकर धड़कनें बढ़ जाती हैं। 

स्थानीय लोगों ने बताया कि क्षेत्र में अंडरपास या कोई वैकल्पिक व्यवस्था बेहद जरूरी है। जबकि इसी मामले पर रेलवे का कहना है कि भागलपुर स्टेशन के पास शंटिंग यार्ड के विस्तारीकरण और तीन लाइन बिछाने का काम चल रहा है। वहीं स्थानीय नागरिक संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही इस रेलवे फाटक पर मालगाड़ियों के घंटों रुकने की समस्या का समाधान नहीं किया गया, तो वह आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।

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