झारखंडः गढ़वा के जंगल में मृत पाया गया हाथी, चार दिनों में दूसरी घटना
खबर सार :-
झारखंड के कई जिलों में हाथी पाए जाते हैं। यहां के जंगली क्षेत्रों में हाथी की बेमौत मरने की घटनाएं सामने आ रही हैं। वन विभाग की टीम यह भी नहीं पता लगा पा रही है कि हाथी की मौत का जिम्मेदार कौन है? वह केवल अपनी जिम्मेदारी किसी और की सूचना पर पोस्टमार्टम के लिए पहुंचने तक निभाना उचित समझ रहेे हैं।
खबर विस्तार : -
गढ़वा, गढ़वा जिले के रंका थाना क्षेत्र में जंगल से सटे इलाके में सोमवार को एक और हाथी मृत पाया गया है। एक जंगली हाथी का शव बरामदगी के बाद से यह सवाल उठ रहा है कि आखिर हाथी की सुरक्षा के लिए किए जा रहे प्रबंध कहां हैं? तमाम हो हल्ला मचने के बाद अब वन विभाग ने जांच शुरू की है। झारखंड में चार दिनों के भीतर हाथी के मृत पाए जाने की यह दूसरी घटना है।
जानकारी के अनुसार, गढ़वा दक्षिणी वन क्षेत्र में एक हाथी को मृत पाया गया। यह देखकर लोग हैरान रह गए। पिछले दिनों की घटना की याद भी इससे ताजा हो गई। वन विभाग पहले का मामला नहीं सुलझा पाया है। एक नया गंभीर मामला सामने आ गया है। पशुओं की निर्ममता की दास्तान सुनने के बाद भी वनविभाग अनसुना कर रहा है। हाथी को मारकर उसके दांत निकाल लिए गए थे। इसकी जानकारी वनविभाग और पुलिस को दी गई थी। मामले का अभी पर्दाफाश नहीं हो पाया है। उधर एक और हाथी मृत पाया गया है।
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सोमवार सुबह आठ बजे विभाग को सूचना मिली
प्रमंडल पदाधिकारी एबिन बेनी अब्राहम का कहना है कि सोमवार सुबह करीब आठ बजे विभाग को पिपरादादर टोला में जंगल के किनारे हाथी के मृत पड़े होने की सूचना मिली थी। इसके बाद अधिकारियों के साथ कई कर्मचारी मौके पर पहुंचे थे। टीम ने घटनास्थल पर पहुंचकर उसकी मौत के कारणों को पता लगाने का प्रयास किया। बाद में बताया कि हाथी का पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही उसकी मौत के वास्तविक कारण का पता चल सकेगा। बहरहाल अभी तक उसकी मौत के कारणों का पता नहीं चलाया जा सका है।
वन विभाग ने हाथी का शव बरामद करने के बाद जांच शुरू की है। इस मामले में हाथी की मौत जिस स्थान पर हुई है, उसके करीब एरिया में लोगों से पूछताछ की जा रही है। बताया जा रहा है कि वन विभाग के अधिकारी ललन कुमार ने स्थानीय लोगों से भी पूछताछ की है। यह यहां का पहला मामला नहीं है। विश्रामपुर पंचायत क्षेत्र में 2019 में नया टोला इलाके में एक जंगली हाथी की करंट की चपेट में आने से मौत हुई थी। अगस्त 2023 में भौंरी गांव में जंगल के किनारे एक शावक हाथी भी मृत मिला था।
थाना क्षेत्र के भनगांव में एक हथिनी मृत मिली थी
तीन दिन पूर्व पश्चिमी सिंहभूम जिले के जगन्नाथपुर थाना क्षेत्र के भनगांव में एक हथिनी मृत मिली थी। उसके दोनों दांत भी गायब पाए गए थे। यह ऐसे मामले हैं, जिनकी पडताल के लिए वन विभाग ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा और मौत के कारणों की जांच शुरू की थी। अभी तक कई मामले रहस्य बने हुए हैं। हाथी के दांत गायब कर दिए जाने की जांच मामले में भी खुलासा नहीं किया गया है। जगन्नाथपुर और आसपास के क्षेत्रों में पिछले एक वर्ष में करीब सात हाथियों की मौत की घटनाएं सामने आने की बात कही गई है। इस तरह से वन्य प्राणियों की मौत मामले में कई सवाल खड़े हो रहे हैं।
FAQ...
1. क्या यह हाथी की मौत का पहला मामला है ?
झारखंड के दूसरे वन क्षेत्रों में भी हाथियों की मौत के मामले सामने आते रहे हैं। जगन्नाथपुर थाना क्षेत्र के भनगांव में सितंबर में लातेहार में एक हाथी की कथित तौर पर अवैध रूप से लगाए गए बिजली के तार की चपेट में आने से मौत हुई थी। जंगल में वन विभाग की लापरवाही या उदासीनता का नतीजा है कि लगातार ऐसी खबरें आ रही हैं।
2. वन्य प्राणी इधर-उधर क्यों भटक रहे हैं ?
मई में गिरिडीह के धोबरी वन क्षेत्र में एक कम उम्र के हाथी की झाड़ियों और लताओं में फंसने के बाद मौत हो गई थी। पश्चिमी सिंहभूम के टोंटो क्षेत्र में जनवरी में एक हाथी की दूसरे हाथी के साथ संघर्ष में लगी चोटों के कारण मौत हुई थी। यह पशु चारा के लिए इधर उधर भटकते रहते हैं। इनके जंगल में चारा पर जंगली जहरीली घास का कब्जा हो रहा है। इसलिए कई वनस्पितियां नष्ट हो रही हैं। यही कारण है कि यह इधर उधर अपने रहने का ठिकाना और चारा की खोज करते रहते हैं।
3. बस्तियों तक कैसे पहुंच बना लेते हैं हाथी ?
राज्य के कई इलाकों में हाथियों के जंगल से निकलकर गांवों और खेतों तक पहुंचने से मानव-हाथी संघर्ष की स्थिति भी बनती रही है। ग्रामीणों ने हाथी गलियारों को सुरक्षित करने, बिजली के तारों की नियमित निगरानी और हाथियों की आवाजाही की समय रहते सूचना देने की व्यवस्था मजबूत करने की मांग की है। सबसे ज्यादा जिम्मेदारी वनविभाग की है। हाथी जब कभी जंगल से भटक जाते हैं, तो वनविभाग की जिम्मेदारी होती है कि वह उनको उचित स्थान पर पहुंचाएं। कई बार हाथी हादसे का शिकार हो जाते हैं। हाथी कारिडोर का भी महत्व दिखाई नहीं पड़ रहा है। लगातार वन्य प्राणी बेमौत मर रहे हैं। खाने की तलाश में वह जंगल से खेतों की ओर और फिर बस्ती तक पहुंच जाते हैं।
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