धान को मिल रहा अमृत वरदान, हथिया नक्षत्र में खरीफ से रबी तक फायदा

खबर सार :-

मानसून अब जाने वाला ही है। धान की फसल भी अमृत बारिश पा चुकी है। अब किसान अगली फसल की तैयारी शुरू करें। चित्रा नक्षत्र में कई फसलों की बुवाई शुरू कर दी जाती है।
कभी हल्की धूप तो कभी फुहार, हथिया नक्षत्र का यही प्रभाव

खबर विस्तार : -

लखनऊ, उत्तर प्रदेश, बिहार और झारखंड में मानसून अब अपना आखिरी जश्न मना रहा है। इन दिनों की बारिश हथिया नक्षत्र के रूप में होती है। किसान इस नक्षत्र के दिनों में ही अपनी कई तैयारियां शुरू कर देता है। इन दिनों होने वाली बारिश किसानों की अगली फसल का भी भविष्य तय कर देती है। इस नक्षत्र को अलग-अलग तरीके से परिभाषित किया जाता है। किसान कृषि के लिए कभी इसे सोने की बरसात मानते हैं, तो कभी धान की फसल को जीवनदान के रूप में हथिया नक्षत्र को सम्मान देते हैं।

मिट्टी में नमी बनकर रुकता है हथिया का पानी

 इस नक्षत्र में पड़ने वाली हर तरह की बारिश फसल की तकदीर बन जाती है। खरीफ की फसल के लिए यह अमृत समान मानी जाती है। जब तक हथिया नक्षत्र की बूंद धान पर न पड़े, समझो दानों का विकास अच्छा नहीं होने वाला है। इसी तरह रबी फसलों के लिए भी हथिया की बारिश सौभाग्य बन जाती है। जब हथिया का पानी बरसता है, तो वह मिट्टी में नमी के रूप में कुछ दिनों के लिए टिक जाती है। शहर से लेकर गांव तक बारिश को खरीफ की फसलों, खासकर धान के लिए बेहद लाभकारी माना जा रहा है।

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नुकसान पहुंचाने वाले कीड़े हो जाते हैं नष्ट

 पिछले दिनो हुई बारिश से खेतों में नमी बढ़ी है, जिससे धान की फसल को फायदा मिलने की उम्मीद है। आने वाली रबी फसलों में गेहूं, चना, सरसों की बुवाई इसी नमी में हो जाती है। इसकी बुवाई के लिए खेत को तैयार करने में इस नक्षत्र का पानी बड़े काम की चीज बन जाता है। जब कभी सितंबर के आखिरी दिनों में बारिश होने लगती है, तो उस पानी में कीड़ों का नाश हो जाता है। आज भी माना जाता है कि इस समय की बारिश से फसलों को नुकसान पहुंचाने वाले कई हानिकारक कीड़े-मकोड़े नष्ट हो जाते हैं।

कभी धूप तो कभी छांव हो जाती

 मौसम का मिजाज भी इसी नक्षत्र के साथ बदलने लगता है। हथिया नक्षत्र के दौरान मौसम लगातार एक जैसा नहीं रहता। कभी धूप निकल आती है तो कभी आसमान में बादलों की आवाजाही दिखने लगती है। कई बार तो अचानक ठंडी हवाओं के साथ रिमझिम फुहारें पड़ने लगती हैं। इन दिनों मौसम की गर्माहट कम पड़ने लगती है। बरसात के समय शूरू हुई उमस भरी गर्मी से राहत मिल जाती है। यह नक्षत्र हर साल सितंबर के आखिरी हफ्ते से अक्टूबर के पहले पखवाड़े के बीच सक्रिय रहता है।

गरज-चमक के साथ भारी बारिश की संभावना

 24 सितंबर को लखनऊ और काशी समेत आसपास के जिलों में मौसम का मिजाज बदला हुआ था। बुधवार को कई बार हल्की बारिश हुई। गुरुवार सुबह भी मौसम का यही रुख बना रहा, लेकिन बारिश नहीं हुई। मौसम विभाग के अनुसार, बंगाल की खाड़ी में बने निम्न दबाव क्षेत्र के प्रभाव से वाराणसी और आसपास के इलाकों में बारिश का दौर शुरू हुआ है।

मौसम विभाग ने शुक्रवार तक येलो अलर्ट जारी करते हुए गरज-चमक के साथ भारी बारिश की संभावना जताई है। जबकि इन दिनों पुरवाई हवा चल रही है। पंचांगों में इस बार सूर्य का हस्त (हथिया) नक्षत्र में प्रवेश 27 सितंबर 2026 को दोपहर 1 बजकर 25 मिनट पर होगा। सूर्य का हस्त नक्षत्र में यह प्रवास 10 अक्टूबर 2026 की रात 02 बजकर 24 मिनट तक रहेग। सूर्य चित्रा नक्षत्र में सी दिन प्रवेश करेंगे। 

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