लखनऊ : नियामक आयोग के आदेश को यूपीपीसीएल प्रबंधन ने अब अमल में लाना शुरू किया है। ऊर्जा प्रबंधन ने सभी बिजली कर्मचारियों के घरों में मीटर लगाने का निर्णय लिया है। प्रबंधन के इस निर्णय को लागू करने की योजना पर काम भी शुरू कर दिया गया है। बिजली कर्मी प्रबंधन के इस निर्णय का विरोध कर रहे हैं। कर्मचारियों का कहना है कि यह हमारा अधिकार है, लेकिन अब हमसे हमारा अधिकार भी छीना जा रहा है। बिजली कर्मचारियों के घरों में मीटर नहीं लग सकते, लेकिन प्रबंधन जबरन मीटर लगवा रहा है, जो बिल्कुल भी सही नहीं है। यह एक तरह से निजीकरण को बढ़ावा देने की पहल भी है।
विभागीय कर्मचारियों ने घरों में मीटर लगाने और निजीकरण के खिलाफ सोमवार को लखनऊ के मुख्य अभियंता कार्यालय ट्रांस गोमती क्षेत्र और जानकीपुरम क्षेत्र में जोरदार प्रदर्शन किया। उन्होंने कहा कि हमें किसी भी कीमत पर घर में मीटर लगाना मंजूर नहीं है। बिजली कर्मचारियों के घरों में मीटर लगाने आए विभागीय कर्मियों को मीटर नहीं लगाने दिया गया। सभी कर्मचारी एकत्र हुए और प्रबंधन के इस फैसले के खिलाफ जोरदार आवाज उठाई। बिजली कर्मचारी संगठन के नेताओं का कहना है कि अब पावर कॉरपोरेशन प्रबंधन पूरी तरह से निजीकरण की राह पर चल पड़ा है।
विभाग के निजीकरण पर दिन-रात काम चल रहा है। अभी तक बिजली कर्मचारियों के घरों पर मीटर लगाने की बात नहीं हुई थी, लेकिन अब प्रबंधन ने यह भी फैसला ले लिया है। दूसरी ओर, विभाग पूर्वांचल और दक्षिणांचल का निजीकरण करने पर पूरी तरह आमादा है। संविदा कर्मचारियों की उम्र 55 साल से अधिक बताकर उन्हें नौकरी से निकाला जा रहा है। कर्मचारी इसके खिलाफ अपनी आवाज़ उठाते हैं और प्रदर्शन करते हैं, तो उसे हड़ताल बताकर नौकरी से निकाल दिया जाता है। अब प्रबंधन सिर्फ हाज़िरी पर वेतन का विकल्प लेकर आया है। जिससे कर्मचारी परेशान हैं।
बिजली कर्मचारियों का कहना है कि बिना फेस अटेंडेंस के वेतन नहीं दिया जा रहा है। प्रदेश में हजारों कर्मचारियों का वेतन अटका हुआ है। यह बिल्कुल ठीक नहीं है। प्रबंधन श्रम कानूनों का उल्लंघन कर रहा है। कर्मचारी इसके खिलाफ एकजुट हैं। फेस अटेंडेंस से परेशान हजारों कर्मचारियों को जब तक वेतन नहीं मिल जाता, तब तक विरोध जारी रहेगा। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति के संयोजक शैलेंद्र दुबे का कहना है कि कर्मचारियों के यहां मीटर लगाने का फैसला बिल्कुल ठीक नहीं है। पावर कॉरपोरेशन अब हर कीमत पर निजीकरण चाहता है। वह उसी राह पर चल रहा है। कर्मचारियों का उत्पीड़न किया जा रहा है। हालांकि, कर्मचारियों की एकता के चलते प्रबंधन अब तक सफल नहीं हो पाया है।
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