प्रयागराजः उत्तर प्रदेश एसटीएफ को एक बड़ी सफलता मिली है। वोडाफोन आइडिया कंपनी के अधिकारियों से मिलीभगत कर फर्जी पीओएस एजेंट बनाकर साइबर अपराधियों को फर्जी सिम कार्ड उपलब्ध कराने वाले एक संगठित गिरोह के दो इनामी आरोपियों को प्रयागराज से गिरफ्तार किया गया है। यूपी एसटीएफ ने पूरे घटनाक्रम की जानकारी 19 जून को प्रेस रिलीज जारी कर दी।
इन गिरफ्तार किए गए आरोपियों की पहचान 25,000 का इनामी संदीप पांडेय (35 वर्ष) और नौफील (34 वर्ष) थे। दोनों ही प्रतापगढ़ के निवासी है। गिरफ्तारी के समय इनके पास से 239 ब्लैंक अनएक्टिवेटेड सिम कार्ड, 36 फर्जी आधार कार्ड, तीन बायोमैट्रिक स्कैनर, चार मोबाइल फोन व 6620 रूपये नगद के साथ पैन कार्ड, एटीएम व अन्य दस्तावेज बरामद किए गए।
एसटीएफ को लगातार सूचना मिल रही थी कि कुछ पीओएस एजेंट और डिस्ट्रीब्यूटर डिजिटल अरेस्ट, स्टॉक मार्केट फ्रॉड, पार्सल स्कैम जैसे साइबर क्राइम करने वाले संगठित गिरोहों के लिए फर्जी तरीके से सिम कार्ड एक्टिवेट कर रहे हैं। 15 मई 2025 को इसी गिरोह के सरगना समेत 6 सदस्य चित्रकूट से पकड़े गए थे। पूछताछ में मिले साक्ष्यों के आधार पर संदीप पाण्डेय का नाम सामने आया, जिस पर 25,000 का इनाम घोषित था। अभिसूचना संकलन के दौरान पता चला कि संदीप पाण्डेय द्वारा नौफील के माध्यम से इन प्रीएक्टिवेटेड सिम कार्ड को ऊंचे दामों पर बेचा जाता है।
तकनीकि विशेषज्ञता के आधार विश्लेषण एवं मुखबिर के माध्यम से सूचना संकलित करते हुए दिनांक 18 जून को एसटीएफ व चित्रकूट पुलिस टीम ने उपरोक्त संगठित गिरोह के दो अभियुक्तों को लाल गोपालगंज थाना क्षेत्र नवाबगंज प्रयागराज से गिरफ्तार किया गया। जिनसे उपरोक्त बरामदगी हई।
गिरोह, वोडाफोन आइडिया (वीआई) से मिलीभगत कर फर्जी पीओएस रजिस्ट्रेशन करता था। ग्राहकों के बायोमैट्रिक का इस्तेमाल कर उनके नाम से दो सिम एक्टिवेट करता, एक ग्राहक को दी जाती और दूसरी अपने पास रख ली जाती। बाद में सैकड़ों प्री-एक्टिवेटेड सिम कार्ड को साइबर अपराधियों को ऊँचे दामों पर बेचा जाता था। गिरोह फर्जी आधार कार्ड और बायोमैट्रिक डिवाइस का भी इस्तेमाल करता था।
विशाल विक्रम सिंह, अपर पुलिस अधीक्षक, एसटीएफ के निर्देशन में साइबर टीम ने तकनीकी विश्लेषण और मुखबिर सूचना के आधार पर आरोपियों को प्रयागराज के लालगोपालगंज थाना क्षेत्र से दोपहर 1ः05 बजे गिरफ्तार किया।
पूछताछ में यह भी सामने आया कि गिरोह के पास 200-300 सिम कार्ड का स्टॉक होता था, जिन्हें 100-250 तक की दरों में बेचा जाता था। इसमें स्थानीय मोबाइल दुकानदार, डिस्ट्रीब्यूटर और बाहरी शहरों में बैठे एजेंट भी शामिल हैं।
मुख्य खरीदारों में मुंबई में रहने वाला सिहूान शेख भी शामिल है, जो इन सिम कार्ड का उपयोग कहां करता था, यह अभी जांच का विषय है।
अब तक की जांच में सामने आया है कि इस गिरोह ने पिछले 2-3 वर्षों में 10,000 से अधिक सिम कार्ड अवैध रूप से एक्टिवेट किए हैं। अभियुक्तों द्वारा दी गई जानकारी के आधार पर गिरोह के अन्य सदस्यों की गिरफ्तारी के प्रयास जारी हैं। बरामद इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का शीघ्र फॉरेंसिक परीक्षण कराया जाएगा। उक्त प्रकरण में थाना राजापुर, जनपद चित्रकूट में मु.अ.सं. 115/2025, धारा 34, 419, 420, 465, 467, 468, 471 भा.दं.वि. एवं 66ब्, 66क् आईटी एक्ट के अंतर्गत मुकदमा पंजीकृत कर विधिक कार्रवाई की जा रही है।
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