लखनऊ: सीएम योगी के इस मॉडल से प्रदेश के हजारों युवा आत्मनिर्भर और सशक्त बन रहे हैं। युवाओं के लिए सीएम का यह मॉडल स्वरोजगार के द्वार भी खोल रहा है। सीएम ने युवाओं के लिए मुख्यमंत्री युवा उद्यमी (सीएम युवा) योजना के जरिए प्रदेश को उद्यमिता मॉडल वाला राज्य बना दिया है। यह योजना युवाओं को बिना ब्याज व गारंटी के ऋण उपलब्ध कराकर उनके सपने को हकीकत में बदलने का अवसर प्रदान कर रही है और उनके लिए स्वरोजगार की प्रेरणा भी बन रही है।
योजना के तहत अभी तक प्रदेश सरकार 53,000 से अधिक युवाओं के ऋण आवेदनों को स्वीकृति प्रदान की है और 40,000 युवाओं को ऋण भी वितरित कर चुकी है। पूरे देश के लिए यह योजना मिसाल बन गई है। यह योजना सीएम योगी आदित्यनाथ के आत्मनिर्भर भारत के विजन को साकार कर रही है। योजना में युवाओं को 5 लाख रुपए तक का ऋण बिना ब्याज व गारंटी के मिल रहा है। इससे युवा सूक्ष्म और लघु उद्योग स्थापित कर अपने सपनों को पंख लगा रहे हैं।
योजना के अंतर्गत ऋण देने में कानपुर नगर पहले पायदान पर है। यहां पर 1339 युवाओं ने योजना का लाभ उठाया है। दूसरे पायदान पर बरेली (1032), तीसरे पर आगरा (1016), चौथे पर महराजगंज (988), और पांचवें नंबर पर वाराणसी (961) पहले पांच जनपदों में शामिल हैं। योजना के तहत ऋण वितरण में बैंकों ने भी महत्वपूर्ण भूमिका अदा की है। स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई) ने सबसे अधिक 6684 युवाओं को ऋण दिया है। दूसरे नंबर पर बैंक ऑफ बड़ौदा (5489), तीसरे पर पंजाब नेशनल बैंक (4770), चौथे पर इंडियन बैंक (4459), और पांचवें नंबर पर यूपी ग्रामीण बैंक (3624) है।
योगी सरकार के मिशन हर कदम उद्यमिता की ओर, हर युवा आत्मनिर्भरता की ओर के साथ शुरू हुई योजना का लक्ष्य 10 वर्षों में 10 लाख युवाओं को स्वरोजगार से जोड़ना है। ऐसे युवाओं को यह योजना स्वरोजगार के अवसर भी प्रदान कर रही है। उद्योग एवं उद्यम प्रोत्साहन निदेशालय के मुताबिक, 16 मई 2025 तक योजना के तहत कुल 2,44,045 आवेदन प्राप्त हुए हैं। इनमें से 1,10,105 आवेदनों को बैंकों को ऋण के लिए भेज दिया गया है। ऋण के लिए 53,649 आवेदनों को स्वीकृति भी मिल चुकी है। साथ ही 39,835 युवाओं को ऋण का वितरण भी किया जा चुका है।
योजना का महत्वपूर्ण पहलू यह है कि इसमें महिलाओं और पिछड़े वर्गों को विशेष प्रोत्साहन दिया जा रहा है। योजना के तहत ऋण प्राप्त करने में 30 प्रतिशत महिलाएं शामिल हैं। ये वह महिलाएं हैं जो उद्यमिता के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बना चुकी हैं। योजना का लाभ प्राप्त करने वालों में 48.5 प्रतिशत से अधिक लाभार्थी अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी), 15 प्रतिशत अनुसूचित जाति (एससी) और 2.5 प्रतिशत अल्पसंख्यक समुदाय के युवा शामिल हैं।
समावेशी दृष्टिकोण से यह योजना और प्रभावी साबित हो रही है। योजना के तहत मिल रहे ऋण का उपयोग युवा विभिन्न क्षेत्रों में कर रहे हैं। आंकड़ों के मुताबिक, 36 प्रतिशत से अधिक ऋण का उपयोग योजना के तहत प्राप्त धनराशि का उपयोग युवा विभिन्न क्षेत्रों में कर रहे हैं। आंकड़ों के अनुसार, 36 प्रतिशत से अधिक ऋण का उपयोग फर्नीचर निर्माण, आटा चक्की और डेयरी उत्पादन में किया गया है। इसके अलावा 64 प्रतिशत ऋण का उपयोग टेंट हाउस, मोबाइल रिपेयरिंग, प्रिंटिंग प्रेस और फिटनेस सेंटर जैसे व्यवसाय में किया गया है।
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