लखनऊ : सीएम योगी के मार्गदर्शन में राजस्व परिषद द्वारा प्रदेश की राजस्व व्यवस्था को आधुनिक और विश्वस्तरीय बनाने जा रहा है। इस दिशा में राजस्व परिषद की ओर से बड़े बदलाव की पहल की जा रही है। इसका प्रमुख उद्देश्य लेखपालों को तकनीकी रूप से सशक्त बनाकर राजस्व प्रशासन को अधिक सुलभ, पारदर्शी व जवाबदेह बनाना है। यह जानकारी राजस्व परिषद के अध्यक्ष अनिल कुमार द्वारा दी गई है। इस सम्बंध में जारी विज्ञप्ति के अनुसार, इस पहल के माध्यम से यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि नागरिकों को राजस्व विभाग से सम्बंधित सेवाएं जैसे प्रमाण पत्रों की संस्तुति, भू-अभिलेखों का अद्यतनीकरण व वरासत सम्बंधी कार्य समयबद्ध, त्रुटिरहित और ग्राम स्तर पर ही उपलब्ध हो सकें। ताकि ग्रामीण जनता को अनावश्यक रूप से तहसीलों के चक्कर न लगाने पड़ें।
उन्होंने बताया कि इस बदलाव के तहत, प्रदेश के सभी लेखपालों को तहसील स्तर पर एक निश्चित कार्यस्थल दिया जा रहा है। जहां पर उन्हें इंटरनेट व आधुनिक डेस्कटॉप की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। इससे न केवल लेखपालों के कार्यों में तेजी आएगी, बल्कि प्रमाण पत्रों की संस्तुति, वरासत, भू-अभिलेख, निरीक्षण रिपोर्ट जैसे कार्य पूरी पारदर्शिता व सटीकता के साथ सम्पन्न हो सकेंगे। साथ ही, एक एकीकृत डिजिटल लॉगिन प्रणाली (सिंगल विंडो लॉगिन सिस्टम) विकसित किया जा रहा है। ताकि सभी कार्य एक ही पोर्टल से हो सकें और कार्यालय सम्बंधी प्रक्रियाओं को सरल और केंद्रित बनाया जा सके। राजस्व परिषद के अध्यक्ष ने बताया कि ग्राम स्तर पर लेखपालों की उपस्थिति को सुलभ बनाने के लिए तहसील और ग्राम सभा स्तर पर एक स्पष्ट रोस्टर प्रणाली लागू की जा रही है। इससे नागरिकों को पूर्व सूचना मिल सकेगी कि उनके निर्वाचन क्षेत्र का लेखपाल किस दिन उपलब्ध रहेगा।
इसके अतिरिक्त प्रत्येक लेखपाल को टैबलेट और मोबाइल इंटरनेट की सुविधा दी जा रही है। ताकि वे सीधे ग्राम सचिवालय या पंचायत भवन से नागरिकों को सेवाएं प्रदान कर सकें। उन्होंने बताया कि इस डिजिटल बदलाव से राज्य के 10 करोड़ से अधिक नागरिकों को सीधा लाभ होगा। इस पहल से न केवल सेवा वितरण आसान होगा, बल्कि प्रशासन के प्रति नागरिकों का विश्वास भी मजबूत होगा। उन्होंने कहा कि परिषद इस दिशा में विभिन्न परियोजनाओं पर काम कर रही है कि राजस्व सेवाएं अब कागजों तक सीमित न रहें, बल्कि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर सरल, सुलभ, समयबद्ध और त्रुटिरहित तरीके से उपलब्ध हो सके। इसके परिणाम में जल्दी दिखाई पड़ने शुरू हो जाएंगे। यह मॉडल आने वाले वर्षों में पूरे राज्य में राजस्व प्रशासन की कार्यप्रणाली को एक नई दिशा देगा।
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