Prabhat Kumar Tiwari
India Semiconductor mission: केंद्र की सत्ता में बैठे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी पूरी टीम देश को आत्मनिर्भर बनाने की कोशिशों में जुटी है। इस बार 79वें स्वतंत्रता दिवस के मौके पर प्रधानमंत्री मोदी, लाल किले की प्राचीर से अपनी इस मंशा को पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं। उन्होंने आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को पूरा करने में सभी राज्यों, देश के प्रतिभाशाली युवाओं, महिलाओं और देश की आम जनता का सहयोग भी मांगा है। इस बीच कुछ ऐसे वैश्विक परिदृश्य भी बने हैं, जिसकी वजह से 'आत्मनिर्भरता' के प्रति जनता भी भावनात्मक रुप से जुड़ने लगी है। केंद्र सरकार सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम यानी एमएसएमई को बढ़ावा देने के लिए सरकारी खजाना खोल दिया है। सरकार की मंशा स्टार्टअप और इनोवेशन को बढ़ावा देना है। इसी कड़ी में हमारे प्रतिभाशाली वैज्ञानिकों ने देश का पहला और दुनिया का सबसे छोटा सेमीकंडक्टर बनाकर इतिहास रच दिया है। यह भारत का विश्व गुरू बनने की दिशा में एक और कदम माना जा रहा है।
केंद्र सरकार की दूरगामी योजनाओं और आत्मनिर्भरता की दिशा में दृढ़ प्रतिज्ञ होकर किए जाने वाले कार्यों के परिणाम भी अब धीरे-धीरे परिलक्षित होने लगे हैं। भारत ने दुनिया का सबसे छोटा सेमीकंडक्टर चिप बनाकर इतिहास रच दिया है। अब भारत सेमीकंडक्टर वैल्यू चेन में एक प्रमुख हब के रूप में उभरने के लिए पूरी तरह से तैयार है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में, सरकार ने 'इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन' की घोषणा की है, जिसमें सेमीकंडक्टर निर्माण के लिए अनेक महत्वपूर्ण योजनाएं और नीतियां बनाई गई हैं। भारतीय अर्थव्यवस्था में सेमीकंडक्टर की अहमियत लगातार बढ़ रही है। यह क्षेत्र अब वैश्विक सेमीकंडक्टर उद्योग का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बनने की ओर अग्रसर है।
भारत में इलेक्ट्रॉनिक्स का उत्पादन तेजी से बढ़ रहा है। इसके साथ ही स्मार्टफोन, एआई-आधारित प्रणालियां, डेटा सेंटर, और इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) जैसे क्षेत्र भी गति पकड़ रहे हैं। 70 करोड़ से अधिक स्मार्टफोन यूजर्स और हर साल लगभग 12 लाख करोड़ रुपये का इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण भारत में सेमीकंडक्टर की आवश्यकता को और बढ़ा रहे हैं। सेमीकंडक्टर न केवल स्मार्टफोन और कंप्यूटर के लिए आवश्यक हैं, बल्कि वे इलेक्ट्रिक वाहनों, स्वचालित सिस्टम्स, 5G नेटवर्क और यहां तक कि स्वास्थ्य उपकरणों के लिए भी जरूरी हैं। इस बढ़ती मांग के साथ, भारत के लिए यह जरूरी हो गया है कि वह अपनी सेमीकंडक्टर उत्पादन क्षमता को बढ़ाए और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला का एक मजबूत हिस्सा बने।
भारत सरकार ने वर्ष 2021 में 'इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन' यानी आईएसएम की शुरुआत की थी, जिसका उद्देश्य देश में सेमीकंडक्टर निर्माण को बढ़ावा देना है। इसके तहत 10 सेमीकंडक्टर प्लांट्स को मंजूरी दी गई, जिनका निर्माण तेजी से चल रहा है। इस मिशन के अंतर्गत भारत को 'मेड इन इंडिया' चिप्स का उत्पादन करने की उम्मीद है, और यह भारतीय सेमीकंडक्टर उद्योग को वैश्विक मानकों तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है। केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि, दशकों तक भारत को सेमीकंडक्टर क्षेत्र में पिछड़ा हुआ माना जाता था, लेकिन अब यह बिल्कुल बदल चुका है। अब हम पूरे विश्वास के साथ कह सकते हैं कि पहली 'मेड इन इंडिया' चिप इस वर्ष के अंत तक बाजार में आ जाएगी।
भारत के सेमीकंडक्टर क्षेत्र के विकास के लिए सरकार द्वारा किए गए निवेश और समर्थन की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। इसके अलावा, विश्वस्तरीय कंपनियों जैसे एप्लाइड मैटेरियल्स, लैम रिसर्च, मर्क, और लिंडे ने भारत में सेमीकंडक्टर प्लांट्स के लिए निवेश किया है, जिससे यह क्षेत्र और मजबूत हो रहा है। इन वैश्विक कंपनियों का समर्थन भारत के सेमीकंडक्टर उद्योग को उच्च गुणवत्ता और विश्वस्तरीय तकनीकी मानकों तक पहुंचाने में मदद कर रहा है। इसके अलावा, भारत सरकार द्वारा 350 से अधिक संस्थानों और स्टार्टअप्स को इलेक्ट्रॉनिक डिजाइन ऑटोमेशन यानी ईडीए टूल्स उपलब्ध कराए गए हैं। इससे भारतीय कंपनियों को इनोवेशन और डिजाइन के क्षेत्र में नई दिशा मिल रही है। उदाहरण के तौर पर, माइंडग्रोव टेक्नोलॉजीज और आईआईटी मद्रास द्वारा स्वदेशी आईओटी चिप्स का विकास किया गया है, जो भारत के सेमीकंडक्टर डिज़ाइन क्षेत्र में एक मील का पत्थर है।
भारत में सेमीकंडक्टर डिजाइन और विकास के क्षेत्र में निवेशकों का विश्वास बढ़ रहा है। हाल ही में, नेत्रसेमी स्टार्टअप को 107 करोड़ रुपये की फंडिंग प्राप्त हुई, जो इस क्षेत्र में अब तक का सबसे बड़ा वेंचर कैपिटल निवेश है। यह निवेश दर्शाता है कि भारत में सेमीकंडक्टर क्षेत्र में एक उज्जवल भविष्य है और निवेशक इसके संभावित विकास को लेकर सकारात्मक हैं। यह निवेश भारत में सेमीकंडक्टर डिजाइन और निर्माण के क्षेत्र में न केवल नये अवसरों को जन्म देगा, बल्कि भारत को वैश्विक सेमीकंडक्टर बाजार में प्रतिस्पर्धी बनाएगा। यह सेमीकंडक्टर क्षेत्र के लिए न केवल तकनीकी उन्नति का संकेत है, बल्कि यह भारतीय उद्यमिता की ताकत को भी दर्शाता है।
आत्मनिर्भर भारत अभियान के क्षेत्र में ‘सेमीकॉन इंडिया 2025’ एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हो सकता है। यह समिट भारत के सेमीकंडक्टर उद्योग को वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाने का एक मंच प्रदान करेगी। एडवांस्ड सेमीकंडक्टर मैटेरियल्स लिथोग्राफी यानी एएसएमएल, जो कि सेमीकंडक्टर लिथोग्राफी के ग्लोबल लीडर के रूप में उभर रही है, ने इस समिट में भारत के सेमीकंडक्टर उद्योग के साथ साझेदारी बढ़ाने की पेशकश की है।
एएसएमएल के सीईओ क्रिस्टोफ फौक्वेट ने कहा है कि, भारत का सेमीकंडक्टर बाजार आने वाले वर्षों में तेजी से बढ़ेगा। स्मार्टफोन, ऑटोमोबाइल, और 5G आईओटी की बढ़ती मांग के चलते, भारत का सेमीकंडक्टर उद्योग 2026 तक 55 बिलियन डॉलर और 2030 तक 100 बिलियन डॉलर तक पहुंच सकता है। यह साझेदारी भारत के चिप निर्माताओं को अधिक शक्तिशाली और किफायती चिप्स बनाने में सहायता करेगी। एएसएमएल अपनी लिथोग्राफी तकनीकों के जरिए चिप निर्माण में क्रांतिकारी बदलाव लाने में मदद करेगा, जिससे भारत के सेमीकंडक्टर क्षेत्र को एक नई दिशा मिलेगी।
भारत के सेमीकंडक्टर उद्योग के पास बड़े अवसर हैं, लेकिन साथ ही कुछ चुनौतियां भी हैं। सबसे बड़ी चुनौती यह है कि इस उद्योग को पूरी तरह से विकसित करने के लिए तकनीकी उन्नति और उच्च-स्तरीय विशेषज्ञता की आवश्यकता है। साथ ही, उच्च गुणवत्ता वाली सामग्री और उपकरणों के लिए निर्भरता को कम करना भी एक महत्वपूर्ण कदम है। दूसरी ओर, भारतीय सरकार का दृढ़ नायक दृष्टिकोण और वैश्विक साझेदारियों की बढ़ती संख्या से यह संभावना बन रही है कि भारत एक प्रमुख सेमीकंडक्टर निर्माता के रूप में उभरेगा। यदि इन प्रयासों को सही दिशा में और समय पर लागू किया गया, तो भारत के सेमीकंडक्टर उद्योग के लिए भविष्य बेहद उज्जवल हो सकता है।
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