Hari Mangal
हरि मंगल
आतंकवाद को लेकर भारत और पाकिस्तान के बीच चल रहे तनाव और युद्ध की आशंकाओं के बीच अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष ने पाकिस्तान को 1 अरब डॉलर का कर्ज दिए जाने की मंजूरी दे दी है। भारत, जो कि अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष में शेयरधारक है, ने पाकिस्तान को मदद देने का भरपूर विरोध किया और तमाम सबूत सौंपते हुए कहा कि इस पर दोबारा विचार किया जाए क्योंकि पाकिस्तान इन पैसों का उपयोग आतंकवादियों को पोषित करने और सीमापार आतंक फैलाने में करेगा लेकिन सहमति न बनने पर भारत ने अपने को मतदान प्रक्रिया से बाहर कर लिया।
पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति कितनी जर्जर और बदतर है, यह तथ्य अब यह किसी से छिपा नहीं है। अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष से मिलने वाले कर्ज के सहारे देश चल रहा है। पाकिस्तान को मिले 1 अरब डॉलर के कर्ज की रुपरेखा तो मार्च 2025 में ही बन गई थी। 25 मार्च 2025 को आईएमएफ और पाकिस्तान के बीच 07 अरब डॉलर के 39 महीने के कर्ज कार्यक्रम की पहली द्विवार्षिकी समीक्षा बैठक में सहमति बनी थी। इस कर्ज के शर्तों की बात की जाए तो कर्ज समझौते में कार्बन टैक्स लागू करने, पानी की कीमतों में बढोत्तरी, ऑटोमोबाइल क्षेत्रों में उदारीकरण और बिजली की दरों में बढोत्तरी जैसे आर्थिक सुधारों की शर्तों को कड़ाई से लागू किया जाना है। अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष का कहना है कि अर्थव्यवस्था में सुधार और प्राकृतिक आपदाओं से निपटने के लिए यह कर्ज दिए जाते हैं लेकिन भारत ने अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष की निगरानी पर सवाल उठाते हुए कहा है कि आखिर लगातार मदद के बाद बदलाव क्यों नहीं दिख रहा है ?
भारत के प्रबल विरोध के बावजूद पाकिस्तान भले ही कर्ज पाने में सफल हो गया है, लेकिन भारत ने अपने तर्कों और सबूतों से आईएमएफ को भी बेनकाब करते हुए विश्व समुदाय का ध्यान इस ओर आकृष्ट किया है। भारत ने कहा कि पाकिस्तान पिछले लम्बे अर्से से आईएमएफ से कर्ज पाने में सफल हो रहा है। शर्तों की निगरानी का कड़ाई से पालन नहीं होने के कारण अब तक कोई प्रगति दिखाई नहीं पड़ रही है। पाकिस्तान द्वारा पिछले 35 साल में 28 बार आईएमएफ से कर्ज लिया गया है। इतना ही नहीं पिछले पांच वर्षों में 4 बार बेलआऊट पैकेज लिए गए। भारत ने साफ शब्दों में कहा कि पाकिस्तान आतंकवाद का पोषक है और मिलने वाले कर्ज से वह आतंकवादियों की मदद कर रहा है। ऑपरेशन सिंदूर में मारे गए आतंकवादियों के साथ पाकिस्तानी सेना की वायरल फोटो को मीडिया के माध्यम से विश्व के तमाम देशों ने देखा है।
आईएमएफ की बैठक से एक दिन पूर्व भारत ने अपना पक्ष रखते हुए पूरे विश्व का ध्यान आकृष्ट किया। भारत ने कहा कि पाकिस्तान आतंकवाद का पोषक है, जिसके तमाम सबूत हैं, वह पहले मिले कर्ज की तरह इस कर्ज से न केवल आतंकवादियों को हथियार और मदद पहुंचाएगा अपितु सीमापार भारत में लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद जैसे आतंकवादी संगठनों के माध्यम से आतंकी गतिविधियां संचालित करेगा। पाकिस्तान स्वयं स्वीकार कर चुका है कि वह आतंकवादियों को सहायता करता रहा है। पहलगाम हमले के बाद पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने बिट्रेन के स्काई न्यूज के साथ साक्षात्कार में बड़ा खुलासा किया है।
जब उनसे पूछा गया कि क्या पाकिस्तान एक लम्बे अर्से से आतंकवादी संगठनों को समर्थन, प्रशिक्षण और वित्तीय मदद पहुंचाता रहा हैं ? तो जवाब में ख्वाजा आसिफ ने स्वीकार किया कि हमने संयुक्त राज्य अमेरिका के लिए लगभग तीन दशक तक यह गंदा काम किया है, जिसमें पश्चिमी देश ब्रिट्रेन भी शामिल है। आसिफ ने माना कि यह एक गलती थी, जिसका खामियाजा पाकिस्तान को भुगतना पड़ा है। भारत ही नहीं विश्व के अधिकांश देश आज आतंकवाद से जूझ रहे हैं। आईएमएफ में सबसे बड़े हिस्सेदार और वोट प्रतिशत वाला अमेरिका स्वयं भी आतंकवाद से पीड़ित रहा है। 11 सितम्बर 2001 को आतंकवादियों ने अमेरिका में एक साथ चार स्थानों पर हमले करके सबसे ताकतवर देश को चुनौती दी थी। हमले के बाद अमेरिका ने वार आफ टेरर यानी आतंकवाद के विरुद्ध युद्ध का अभियान चलाया था, जिसका मुख्य उद्देश्य अलकायदा और तालिबान जैसे आतंकी समूहों को नष्ट करना था। इसके लिए अफगानिस्तान, ईराक जैसे कई देशो पर आक्रमण किया। पाकिस्तान में जाकर ओसामा बिन लादेन का खात्मा किया।
अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष एक अंतर्राष्ट्रीय संगठन है, जिसमें विश्व के 191 देश सदस्य है। इसका मुख्य कार्य सदस्य देशों में वित्तीय स्थिरता बनाए रखना, सतत आर्थिक विकास को प्रोत्साहित करना, दुनिया में गरीबी कम करना जैसे महत्वपूर्ण कार्य हैं। इसको संचालित करने के लिए 25 निदेशक बनाए जाते हैं, जो 190 देशों का प्रतिनिधित्व करते हैं। वोट देने का अधिकार निदेशक मंडल को होता है। मताधिकार सामान्य प्रणाली की तरह न होकर उनके फंड योगदान क आधार पर तय होती है। दूसरे शब्दों में कहा जाए तो जिसका आईएमएफ में जितना योगदान होता है, उसी के अनुरुप उसका मताधिकार होता है। वर्तमान की बात करें तो आज अमेरिका का मताधिकार 16 प्रतिशत, चीन का 06 प्रतिशत, ब्रिटेन का 04 प्रतिशत, भारत का 2.63 और पाकिस्तान का 0.43 प्रतिशत है। आईएमएफ की वोटिंग में एक और उल्लेखनीय तथ्य है कि आप या तो समर्थन करेंगे या फिर बाहर हो जाएंगे। इसी कारण भारत को मतदान से बाहर रहना पड़ा।
पाकिस्तान को आईएमएफ से पिछले चार दशक से लगातार मिल रहे कर्ज के पीछे आखिर कारण क्या है ? वह न तो अपेक्षित विकास कर पा रहा है और न कर्ज की शर्तां का पूरी तरह पालन कर रहा है। भारत इस मुद्दे को लगातार आईएमएफ की बैठक में उठाता रहा है लेकिन शर्तों की निगरानी नहीं हो रही है। शोधार्थी हर्षिता सिंह कहती है कि पाकिस्तान को मिलने वाले कर्ज में बड़ा खेल है। आईएमएफ और अमेरिका में गहरा संबंध है। अमेरिका ही आईएमएफ का संस्थापक सदस्य है। 1944 में जब इसकी स्थापना हुई, तो अमेरिका ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इसका मुख्यालय वाशिंगटन डीसी में बनाया गया। सबसे बड़ी हिस्सेदारी अमेरिका की है तो नियमों के हिसाब से उसके पास सबसे अधिक मताधिकार की शक्ति है। महत्वपूर्ण निर्णय लेने के लिए 85 प्रतिशत बहुमत चाहिए, इसके लिए अमेरिका के पास वीटो पावर है। आईएमएफ पर आरोप लगते रहे हैं कि वह अमेरिकी हितों का पक्षधर है। पाकिस्तान के संदर्भ में कहा कि आईएमएफ से पाकिस्तान को जो कर्ज मिलता है, उसमें अमेरिका और चीन दोनों देशों की भूमिका होती है क्योंकि उनके लिए पाकिस्तान हथियार बेचने का एक बड़ा बाजार है, जहां वह अपने हथियार बेचते हैं। एक ओर कर्ज दिलाया, दूसरी ओर अपने हथियार, विमान या अन्य सामान पाकिस्तान को लेने पर मजबूर कर दिया। इस साइकिल में कर्ज का पैसा घूम फिर कर अमेरिका और चीन के पास पहुंच जाता है। आज पाक भारत पर जिस मिसाइल, ड्रोन और विमानों से हमला कर रहा है, उसमें अधिकांश अमेरिका और चीन द्वारा निर्मित है।
कहा जा रहा है कि आज पाकिस्तान में 81 प्रतिशत युद्धक हथियार और विमान चीन द्वारा निर्मित हैं, जिसमें जेएफ-17 भी शामिल है। पाकिस्तान ने अमेरिका से एफ-16 फाइटर जेट खरीदा था, जिसे अमेरिका ने बहुत ही कड़ी शर्तों के साथ पाकिस्तान को दिया था। सबसे प्रमुख शर्त थी कि एफ-16 विमानों का उपयोग भारत के विरुद्ध नहीं किया जाएगा लेकिन पाकिस्तान उन शर्तों का लगातार उल्लघंन करता आ रहा है। अभी 08 मई की रात में जम्मू और पठानकोट पर ड्रोन हमले के साथ ही एफ-16 उड़ाया गया। इसके पहले 2019 में भी बालाकोट एयर स्ट्राइक के जरिए भी भारतीय सीमा में घुसने का प्रयास किया था। अब देखना है कि अमेरिका पाकिस्तान पर इन शर्तों के उल्लघन पर क्या कार्यवाही करता है।
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