PM Modi Somnath Swabhiman Parv: सदियों से बार-बार हमलों के बावजूद, सोमनाथ मंदिर आज भी भारत की अटूट भावना के प्रतीक के रूप में शान से खड़ा है। इसी भावना का अद्भुत नजारा शनिवार देरशाम अरब सागर के ऊपर नभ पर देखने को मिला। तीन हजार से ज़्यादा ड्रोन का इस्तेमाल करके एक असाधारण प्रदर्शन में सोमनाथ मंदिर की हज़ार साल की यात्रा को मनमोहक तरीके से पेश किया गया। ड्रोन शो से रोमांचित प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी मंत्रमुग्ध हो गए। उन्होंने इस शानदार शो की कई तस्वीरें अपने सोशल मीडिया अकाउंट्स पर शेयर कीं।
अरब सागर के ऊपर आसमान में रोशनी के एक अनोखे मेल से, ड्रोन का इस्तेमाल करके अलग-अलग पॉइंटिलिस्ट तस्वीरें और रंगीन आकृतियां बनाई गईं। आसमान में उभरते चमकदार दृश्य लोगों के लिए आकर्षण का मुख्य केंद्र बन गए। ड्रोन का इस्तेमाल करके आसमान में सोमनाथ मंदिर, त्रिशूल, ओम, वीर हमीरजी, अहिल्याबाई होल्कर, सरदार वल्लभभाई पटेल और नरेंद्र मोदी की आकृतियाँ दिखाई गईं। हर बदलती आकृति के साथ, मंदिर परिसर तालियों की गड़गड़ाहट और "हर हर महादेव" के नारों से गूंज उठा। इसके बाद, रंगीन आतिशबाजी ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। इस अनोखे आयोजन ने पवित्र सोमनाथ धाम में उत्सव और खुशी का माहौल बना दिया। इस मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल और कई राज्य मंत्री मौजूद थे।

बता दें कि सोमनाथ की गाथा सिर्फ़ एक मंदिर की कहानी नहीं है, बल्कि भारत माता के अनगिनत सपूतों के अदम्य साहस की कहानी है जिन्होंने देश की संस्कृति और सभ्यता की रक्षा की। भगवान सोमनाथ गुजरात के सौराष्ट्र क्षेत्र में भारत के पश्चिमी तट पर पहले ज्योतिर्लिंग के रूप में विराजमान हैं। प्रभास क्षेत्र के नाम से जानी जाने वाली यह पवित्र भूमि सिर्फ़ एक तीर्थ स्थल नहीं है, बल्कि राष्ट्र की अटूट आस्था, संघर्षों और पुनरुत्थान का एक जीवंत प्रतीक है।

मध्यकाल में इस मंदिर ने कई आक्रमण झेले। ग्यारहवीं सदी में महमूद गजनवी से लेकर अलाउद्दीन खिलजी और औरंगजेब तक, कई आक्रमणकारियों ने इसे लूटा और नष्ट किया। लेकिन हर बार, राजा भीमदेव, सिद्धराज जयसिंह और कुमारपाल जैसे नायकों ने इसे फिर से बनवाया। हमीरजी गोहिल और वेगड़ा भील जैसे योद्धाओं ने अपने धर्म की रक्षा के लिए अपनी जान कुर्बान कर दी। 15 अगस्त, 1947 को देश आज़ाद हुआ। जूनागढ़ की आजादी के बाद, भारत के लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल के पक्के इरादे से आधुनिक सोमनाथ मंदिर का सपना पूरा हुआ। 11 मई, 1951 को भारत के पहले राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने मंदिर का अभिषेक किया। आधुनिक मंदिर (कैलाश महामेरु प्रसाद) की वास्तुकला नागर शैली का एक शानदार उदाहरण है। इसे मशहूर आर्किटेक्ट प्रभाशंकर सोमपुरा ने डिज़ाइन किया था।
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