Mukul Roy Death: पश्चिम बंगाल के पूर्व रेल मंत्री और सीनियर नेता मुकुल रॉय का सोमवार सुबह कोलकाता के एक प्राइवेट हॉस्पिटल में निधन हो गया। वह 73 साल के थे। मुकुल रॉय का निधन रविवार-सोमवार रात 1:30 बजे के कुछ देर बाद हुआ। उनके बेटे सुभ्रांशु रॉय ने इसकी पुष्टि की। मुकुल रॉय कई स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे थे। उनका लंबे समय से इलाज चल रहा था, लेकिन इलाज का उन पर कोई असर नहीं हो रहा था।
बता दें कि मुकुल रॉय का जन्म 17 अप्रैल, 1954 को नॉर्थ 24 परगना जिले के कांचरापाड़ा में हुआ था। मुकुल रॉय कभी तृणमूल कांग्रेस में दूसरे सबसे अहम नेता थे, सीएम ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) के सबसे करीबी और विश्वासपात्र थे। 1990 के दशक के आखिर में, रॉय उन पहले नौ नेताओं में से थे जिन्होंने तृणमूल कांग्रेस (TMC) बनाने के लिए इलेक्शन कमीशन ऑफ़ इंडिया (ECI) से संपर्क किया था, जिसे ममता बनर्जी ने कांग्रेस से अलग होने के बाद बनाया था।
मुकुल रॉय अपना राजनीतिक करियर यूथ कांग्रेस से शुरू किया था। 1998 में, उन्होंने ममता बनर्जी के साथ मिलकर ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस (TMC) की स्थापना में अहम भूमिका निभाई। वह ममता बनर्जी के सबसे करीबी सहयोगी थे और TMC के जनरल सेक्रेटरी बने। 2006 में उन्हें राज्यसभा के लिए चुना गया। इसके बाद 2009 से 2012 तक राज्यसभा में TMC नेता के तौर पर काम किया। वहीं 2012 में मनमोहन सिंह सरकार में केंद्रीय रेल मंत्री बने। 2011 में TMC के सत्ता में आने के बाद, उन्होंने पार्टी को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाई। वह कई सीपीएम और कांग्रेस नेताओं को टीएमसी में लाने में सफल रहे।
हालांकि मुकुल रॉय ने 2017 में टीएमसी छोड़कर भाजपा में शामिल हो गए। बीजेपी में रहते हुए, उन्होंने कई TMC नेताओं को पार्टी में लाने में मदद की, जिससे पार्टी को 2019 के लोकसभा चुनाव में बंगाल में 18 सीटें जीतने में सफल रही। उन्होंने 2021 के विधानसभा चुनाव में भाजपा के टिकट पर कृष्णानगर उत्तर सीट जीती, लेकिन जून 2021 में TMC में वापस आ गए।
इसी के चलते 13 नवंबर, 2025 को कलकत्ता हाई कोर्ट ने उन्हें दल-बदल विरोधी कानून के तहत विधायक पद से अयोग्य घोषित कर दिया। हालांकि कलकत्ता हाई कोर्ट के फैसले को उनके बेटे सुभ्रांशु रॉय ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। 16 जनवरी को चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागच की बेंच ने कलकत्ता हाई कोर्ट के फैसले पर रोक लगा दी। पिछले दो-तीन वर्षों से वह बीमार थे और राजनीति में सक्रिय नहीं थे। फिलहाल उनके निधन राजनेताओं ने शोक जताया है।
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