Assembly Election 2026: देश की सियासत के लिए गुरुवार का दिन बेहद अहम है, क्योंकि असम, केरल और पुडुचेरी की कुल 296 विधानसभा सीटों पर एक साथ मतदान होने जा रहा है। इन सभी जगहों पर चुनाव प्रचार का शोर थमने के बाद अब जनता अपने मताधिकार का प्रयोग कर उम्मीदवारों की किस्मत का फैसला ईवीएम में कैद करने को तैयार है। चुनाव आयोग ने इस पूरे मतदान को निष्पक्ष और शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न कराने के लिए व्यापक सुरक्षा व्यवस्था की है।
असम में 126 सीटों पर 09 अप्रैल को वोटिंग होनी है। यहां कुल 2.5 करोड़ मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे। इनमें 1.25 करोड़ पुरुष, 1.25 करोड़ महिलाएं और 343 थर्ड जेंडर मतदाता शामिल हैं। खास बात यह है कि करीब 5.75 लाख युवा मतदाता पहली बार वोट डालने जा रहे हैं, जो चुनावी परिणामों को प्रभावित कर सकते हैं। राज्य में कुल 722 उम्मीदवार मैदान में हैं और बहुमत का आंकड़ा 64 सीटों का है। 15वीं विधानसभा का कार्यकाल 20 मई 2026 को समाप्त होने वाला है, जिससे यह चुनाव और भी महत्वपूर्ण हो जाता है।
केरल में 140 सीटों के लिए मतदान होना है। यहां 833 उम्मीदवार चुनाव मैदान में अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। यहां मुख्य राजनीतिक दलों के बीच कड़ा त्रिकोणीय मुकाबला देखने को मिल रहा है। राज्य में कुल 2.71 करोड़ मतदाता हैं, जिनमें 1.32 करोड़ पुरुष, 1.39 करोड़ महिलाएं और 273 थर्ड जेंडर वोटर्स शामिल हैं। सरकार बनाने के लिए यहां 71 सीटों का बहुमत जरूरी है। केरल की राजनीतिक स्थिति हमेशा से दिलचस्प रही है, जहां सत्ता परिवर्तन का ट्रेंड भी देखने को मिलता रहा है।
केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी में 30 सीटों पर मतदान होना है, जिनमें से 5 सीटें अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित हैं। यहां सरकार बनाने के लिए 16 सीटों का बहुमत आवश्यक है। कुल 9.44 लाख मतदाताओं में लगभग 4.43 लाख पुरुष, 5 लाख महिलाएं और 139 थर्ड जेंडर मतदाता शामिल हैं। छोटे आकार के बावजूद पुडुचेरी का राजनीतिक समीकरण हमेशा अहम माना जाता है।
चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार, इन तीनों क्षेत्रों में नामांकन के दौरान कुल 4,019 नामांकन पत्र दाखिल किए गए थे, जिनमें 2,511 उम्मीदवार शामिल थे। हालांकि, जांच और नाम वापसी के बाद अंतिम उम्मीदवारों की संख्या घटकर लगभग 1,900 से अधिक रह गई है। इससे साफ है कि मुकाबला कड़ा और दिलचस्प होने वाला है। मतदान प्रक्रिया को सुचारु रूप से संचालित करने के लिए सभी पोलिंग बूथों पर कर्मियों की तैनाती कर दी गई है। सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं, ताकि किसी भी प्रकार की गड़बड़ी या अव्यवस्था न हो सके। केंद्रीय बलों और स्थानीय पुलिस की निगरानी में मतदान होना है।
जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 126 के तहत ‘साइलेंस पीरियड’ पहले ही लागू किया जा चुका है, जिसके चलते तय समय पर मंगलवार की शाम 5 बजे के बाद सभी जगहों पर चुनाव प्रचार थम गया। अब सबकी निगाहें 09 अप्रैल यानी गुरुवार को होने वाले मतदान और उसके बाद 4 मई को होने वाली मतगणना पर टिकी हैं, जब चुनाव परिणाम घोषित किए जाएंगे। इस चुनाव में मतदान प्रतिशत भी अहम भूमिका निभाएगा, क्योंकि अधिक मतदान अक्सर सत्ता परिवर्तन या मजबूत जनादेश का संकेत देता है। राजनीतिक दलों के साथ-साथ आम जनता की निगाहें भी अब नतीजों पर टिकी हैं।
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