चौकाने वाला खुलासा: अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल हुआ सस्ता, फिर भी भारत में क्यों लगी है तेल की आग? खरगे ने खोला मोदी सरकार के खिलाफ मोर्चा!
खबर सार :-
petroleum price hike : कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने देश में लगातार हो रही petroleum price hike को लेकर केंद्र सरकार को घेरा है। खरगे ने आरोप लगाया कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चा तेल सस्ता होने के बाद भी सरकार टैक्स घटाकर जनता को राहत देने के बजाय भारी लूट मचा रही है। जानिए दिल्ली में पेट्रोल-डीजल के नए दाम।
खबर विस्तार : -
नई दिल्ली : देश में इस समय आम आदमी की जेब पर चौतरफा मार पड़ रही है। एक तरफ जहां लोग पहले से ही भीषण महंगाई की मार झेल रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ रसोई गैस से लेकर गाड़ियों में डलने वाले ईंधन की आसमान छूती कीमतें आम जनता का दम निकाल रही हैं। इसी ज्वलंत मुद्दे को लेकर मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने केंद्र सरकार के खिलाफ बेहद आक्रामक रुख अख्तियार कर लिया है। कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने पेट्रोलियम पदार्थों की बेतहाशा बढ़ती कीमतों को लेकर देश के प्रधानमंत्री और उनकी पूरी कैबिनेट पर सीधा और बड़ा हमला बोला है। खरगे का साफ तौर पर आरोप है कि जब पूरी दुनिया में संकट का दौर है, ऐसे समय में केंद्र सरकार देश के नागरिकों को राहत देने के बजाय उन्हें दोनों हाथों से लूटने का काम कर रही है।
दस दिनों में तीन बार बढ़े दाम, आम आदमी बेहाल
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने शनिवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर बेहद कड़े शब्दों में सरकार की नीतियों की आलोचना की। उन्होंने देश के सामने आंकड़े रखते हुए बताया कि केंद्र सरकार किस तरह क्रूरतापूर्वक फैसले ले रही है। खरगे ने कहा कि पिछले महज दस दिनों के भीतर देश की जनता पर तीन बार ईंधन के दाम बढ़ाकर भारी आर्थिक बोझ डाल दिया गया है। petroleum price hike (पेट्रोलियम मूल्य वृद्धि) के इस दौर में अब आम आदमी का गुजर-बसर करना दूभर हो गया है।
खरगे ने सरकार के उन दावों और तर्कों की धज्जियां उड़ा दीं, जिसमें अक्सर यह कहा जाता है कि भारत में ईंधन की दरें दुनिया के कई अन्य विकसित या विकासशील देशों की तुलना में बेहद कम हैं। कांग्रेस अध्यक्ष ने दोटूक कहा कि सरकार ऐसा भ्रामक तर्क देकर सिर्फ अपनी नाकामी और जिम्मेदारी से पीछा छुड़ाने की कोशिश कर रही है। हकीकत इससे कोसों दूर है।
दुनिया दे रही है राहत, भारत में क्यों मिल रही आफत?
वैश्विक परिदृश्य का हवाला देते हुए मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि इस समय पश्चिम एशिया में भयंकर युद्ध और तनाव की स्थिति बनी हुई है। पूरी दुनिया एक गंभीर आर्थिक अनिश्चितता के दौर से गुजर रही है। ऐसे नाजुक वक्त में दुनिया के तमाम देशों ने अपनी जनता को बचाने के लिए ऐतिहासिक कदम उठाए हैं। उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि इटली, ऑस्ट्रेलिया, जर्मनी, ब्रिटेन और आयरलैंड जैसे बड़े देशों ने अपने नागरिकों की जेब पर पड़ रहे असर को कम करने के लिए ईंधन पर लगने वाले टैक्स में भारी कटौती की है। कई देशों ने अपनी जनता के लिए विशेष सब्सिडी और राहत पैकेजों की घोषणा की है ताकि बाजार संतुलित रह सके।
इसके विपरीत, भारत में ठीक इसका उल्टा देखने को मिल रहा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें कम होने के बावजूद, यहां की सरकार लगातार petroleum price hike (पेट्रोलियम मूल्य वृद्धि) कर रही है। इसका सीधा और घातक असर देश के मध्यम वर्ग, गरीब किसानों, छोटे व्यापारियों और रोजाना कमाकर खाने वाले निम्न आय वर्ग के लोगों पर पड़ रहा है।
कमरतोड़ महंगाई से त्राहि-त्राहि कर रही जनता
विपक्ष के नेता ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि जब देश में पेट्रोल, डीजल, सीएनजी और एलपीजी के दाम बढ़ते हैं, तो उसका असर केवल गाड़ियों तक सीमित नहीं रहता। ईंधन महंगा होने से माल ढुलाई और परिवहन की लागत बढ़ जाती है, जिसके कारण बाजार में मिलने वाली हरी सब्जियां, दालें, दूध, अनाज और रोजमर्रा की सभी जरूरी चीजों के दाम भी अपने आप बढ़ जाते हैं। यह petroleum price hike (पेट्रोलियम मूल्य वृद्धि) देश को एक ऐसे दुष्चक्र में धकेल रही है जहां से आम आदमी का निकलना नामुमकिन होता जा रहा है। अगर पिछले एक महीने के आंकड़ों पर नजर डालें, तो तेल कंपनियों ने जनता की जेब काटने में कोई कसर नहीं छोड़ी है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, इस महीने की शुरुआत यानी 1 मई को ही कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर के दाम में एकमुश्त 993 रुपये की भारी-भरकम बढ़ोतरी की गई थी। इस बढ़ोतरी के बाद देश की राजधानी दिल्ली में इस सिलेंडर की कीमत बढ़कर 3,071.50 रुपये के पार पहुंच गई, जिसने छोटे होटल और रेस्तरां संचालकों की कमर तोड़ दी।
मई महीने में तेल की कीमतों का पूरा गणित
इसके बाद भी कीमतों के बढ़ने का यह सिलसिला थमा नहीं। ठीक दो हफ्ते बाद, यानी 15 मई को पेट्रोल और डीजल दोनों के दामों में तीन-तीन रुपये प्रति लीटर का बड़ा इजाफा कर दिया गया। इसी दिन पर्यावरण अनुकूल मानी जाने वाली सीएनजी के दाम भी दो रुपये प्रति किलोग्राम बढ़ा दिए गए। जनता अभी इस झटके से संभल भी नहीं पाई थी कि 18 मई को फिर से पेट्रोल-डीजल की कीमतों में करीब 90 पैसे प्रति लीटर की बढ़ोतरी कर दी गई, जबकि सीएनजी एक बार फिर एक रुपये महंगी हो गई।
आज यानी शनिवार, 23 मई को दिल्ली में एक बार फिर पेट्रोल के दामों में 87 पैसे प्रति लीटर की नई वृद्धि दर्ज की गई है। इस ताजा बढ़ोतरी के बाद दिल्ली में पेट्रोल का भाव रिकॉर्ड 99.51 रुपये प्रति लीटर के स्तर पर पहुंच गया है, जो 100 रुपये के आंकड़े से महज कुछ पैसे दूर है। वहीं दूसरी ओर, डीजल भी 91 पैसे प्रति लीटर महंगा होकर अब 92.49 रुपये प्रति लीटर पर बिक रहा है। लगातार हो रही इस petroleum price hike (पेट्रोलियम मूल्य वृद्धि) ने मध्यम वर्ग के बजट को पूरी तरह से तहस-नहस कर दिया है।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने केंद्र सरकार से पुरजोर मांग की है कि वह तुरंत अपनी जनविरोधी नीतियों को बदले। सरकार को अपनी हठधर्मिता छोड़कर पेट्रोलियम पदार्थों पर लगाए गए अत्यधिक केंद्रीय करों (एक्साइज ड्यूटी) में तत्काल कटौती करनी चाहिए, ताकि इस वैश्विक संकट के समय देश की पीड़ित जनता को वास्तविक और त्वरित राहत मिल सके।
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