Flight Cancellations DGCA : अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव का असर अब वैश्विक विमानन क्षेत्र पर साफ दिखने लगा है। नागर विमानन मंत्रालय के अनुसार, युद्ध शुरू होने के बाद से पश्चिम एशिया जाने वाली 10,000 से अधिक उड़ानें रद्द कर दी गई हैं। यह स्थिति न केवल अंतरराष्ट्रीय यात्रा को प्रभावित कर रही है, बल्कि एयरलाइंस, पायलटों और यात्रियों के लिए भी नई चुनौतियां पैदा कर रही है।
नागर विमानन मंत्रालय में संयुक्त सचिव असंगबा चुबा आओ ने मंगलवार को जानकारी देते हुए बताया कि युद्ध से पहले भारतीय विमानन कंपनियां प्रतिदिन पश्चिम एशिया के लिए करीब 300-350 उड़ानें संचालित कर रही थीं। हालांकि, मौजूदा हालात में यह संख्या घटकर सिर्फ 80-90 उड़ानों तक सीमित रह गई है। यह गिरावट इस बात का संकेत है कि क्षेत्र में अस्थिरता का असर कितना व्यापक है।
गौरतलब है कि 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर हमले के बाद हालात तेजी से बिगड़े। इसके जवाब में ईरान ने भी सैन्य कार्रवाई की, जिससे पूरे मध्य पूर्व में तनाव बढ़ गया। कई देशों ने सुरक्षा कारणों से अपने एयरस्पेस को बंद कर दिया, जिससे अंतरराष्ट्रीय उड़ानों को वैकल्पिक और लंबे मार्ग अपनाने पड़े।
एयरस्पेस बंद होने के कारण विमानों को अब संघर्ष क्षेत्र से बचते हुए लंबा रास्ता तय करना पड़ रहा है। इससे उड़ानों की अवधि में इजाफा हुआ है, साथ ही ईंधन की खपत और परिचालन लागत भी बढ़ी है। एविएशन टरबाइन फ्यूल (ATF) की कीमतों में पहले ही बढ़ोतरी हो चुकी है, जिससे एयरलाइंस पर अतिरिक्त आर्थिक दबाव पड़ा है। इसके बावजूद सरकार ने यह सुनिश्चित किया है कि घरेलू यात्रियों पर इसका बोझ न पड़े और टिकट कीमतों में अनावश्यक वृद्धि न हो।
नागर विमानन महानिदेशालय (DGCA) ने बढ़ी हुई उड़ान अवधि को ध्यान में रखते हुए पायलटों के लिए फ्लाइट ड्यूटी टाइम लिमिट (FDTL) नियमों में अस्थायी ढील दी है। यह कदम एयरलाइंस को संचालन में सहूलियत देने के लिए उठाया गया है। नई व्यवस्था के तहत, दो पायलटों वाली लंबी दूरी की उड़ानों के लिए फ्लाइंग टाइम को 1 घंटा 30 मिनट बढ़ाकर 11 घंटे 30 मिनट कर दिया गया है। वहीं फ्लाइट ड्यूटी पीरियड (FDP) को 1 घंटा 45 मिनट बढ़ाकर 11 घंटे 45 मिनट कर दिया गया है।

हालांकि नियमों में ढील दी गई है, लेकिन सुरक्षा मानकों से कोई समझौता नहीं किया गया है। DGCA ने साफ किया है कि पायलटों की थकान को रोकना सर्वोच्च प्राथमिकता है। पिछले साल लागू किए गए नए नियमों के अनुसार, पायलटों को अब 48 घंटे का अनिवार्य आराम दिया जाता है, जो पहले 36 घंटे था। इसके अलावा, नियामक ने एयरलाइंस की निगरानी भी बढ़ा दी है। साप्ताहिक और पखवाड़ा आधार पर समीक्षा की जा रही है, जबकि हर दो महीने में विस्तृत निरीक्षण भी किया जाएगा। इसमें पायलट रोस्टर, क्रू मैनेजमेंट, बैकअप सिस्टम और सुरक्षा अनुपालन की जांच शामिल है।
मध्य एशिया में तनावपूर्ण स्थिति के बावजूद कार्गो उड़ानें जारी हैं, जिससे आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति बनी हुई है। यह वैश्विक सप्लाई चेन के लिए राहत की बात है, खासकर उन देशों के लिए जो पश्चिम एशिया पर निर्भर हैं।
सरकार इस पूरे संकट के दौरान एयरलाइंस, नियामकों और अन्य हितधारकों के साथ लगातार संपर्क में है। उद्देश्य है कि यात्रियों की सुरक्षा, सुविधा और सेवा की निरंतरता बनी रहे।
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