DGCA का सख्त रुख: एयर क्रैश के बाद नॉन-शेड्यूल्ड ऑपरेटर्स पर कड़ा शिकंजा, जीरो-टॉलरेंस पॉलिसी लागू, सेफ्टी रैंकिंग सिस्टम और पायलट लाइसेंस सस्पेंशन तक की चेतावनी

खबर सार :-
हालिया विमान हादसों के बाद DGCA की Zero Tolerance Policy ने नॉन-शेड्यूल्ड ऑपरेटर्स के लिए कड़े मानक तय कर दिए हैं। सेफ्टी रैंकिंग, अनिवार्य खुलासा, रैंडम ऑडिट और कड़ी सजा जैसे कदम एविएशन सेक्टर में जवाबदेही बढ़ाएंगे। यदि इन नियमों का सख्ती से पालन हुआ, तो निजी और चार्टर उड़ानों की सुरक्षा व्यवस्था अधिक पारदर्शी और विश्वसनीय बन सकती है।

DGCA का सख्त रुख: एयर क्रैश के बाद नॉन-शेड्यूल्ड ऑपरेटर्स पर कड़ा शिकंजा, जीरो-टॉलरेंस पॉलिसी लागू, सेफ्टी रैंकिंग सिस्टम और पायलट लाइसेंस सस्पेंशन तक की चेतावनी
खबर विस्तार : -

DGCA Zero Tolerance Policy: देश में हालिया विमान हादसों के बाद एविएशन सेक्टर में सुरक्षा को लेकर बड़ा कदम उठाया गया है। Directorate General of Civil Aviation (DGCA) ने नॉन-शेड्यूल्ड ऑपरेटर्स (NSOP) सेक्टर में सुरक्षा मानकों से समझौते के खिलाफ जीरो-टॉलरेंस पॉलिसी लागू करने की घोषणा की है। यह फैसला झारखंड के चतरा जिले में एयर एम्बुलेंस क्रैश में सात लोगों की मौत और पिछले महीने महाराष्ट्र में एक बिजनेस जेट हादसे के बाद लिया गया है।

डीजीसीए ने सभी एनएसओपी ऑपरेटरों के साथ आपात बैठक बुलाई और स्पष्ट संदेश दिया कि सुरक्षा में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। रेगुलेटर ने एक अनिवार्य डिस्क्लोजर पॉलिसी लाने की घोषणा की है, जिसके तहत सभी ऑपरेटरों को अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर विमान की उम्र, मेंटेनेंस हिस्ट्री और पायलट के अनुभव जैसी अहम जानकारी सार्वजनिक करनी होगी। इसका उद्देश्य चार्टर सेवाएं लेने वाले ग्राहकों को पारदर्शी और भरोसेमंद जानकारी उपलब्ध कराना है।

DGCA-New Aviation Policy-Zero Tolerance active

DGCA Zero Tolerance Policy: सेफ्टी रैंकिंग सिस्टम होगा लागू

डीजीसीए अब सभी नॉन-शेड्यूल्ड ऑपरेटरों के लिए एक सेफ्टी रैंकिंग सिस्टम लागू करेगा। इस रैंकिंग के मानदंड डीजीसीए की वेबसाइट पर सार्वजनिक किए जाएंगे, ताकि यात्रियों और कॉरपोरेट क्लाइंट्स को ऑपरेटर की सुरक्षा स्थिति का स्पष्ट आकलन मिल सके। यह कदम एविएशन सेक्टर में जवाबदेही और प्रतिस्पर्धी सुरक्षा मानकों को बढ़ावा देने की दिशा में अहम माना जा रहा है।

DGCA Zero Tolerance Policy: बढ़ेगी निगरानी, होंगे रैंडम ऑडिट

रेगुलेटर ने घोषणा की है कि कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर (CVR) के ज्यादा रैंडम ऑडिट किए जाएंगे। साथ ही, अनऑथराइज्ड ऑपरेशन या डेटा में गड़बड़ी पकड़ने के लिए एडीएस-बी डेटा, फ्यूल रिकॉर्ड और टेक्निकल लॉग का क्रॉस-वेरिफिकेशन किया जाएगा। डीजीसीए ने साफ किया कि नियमों के उल्लंघन के लिए केवल पायलट ही नहीं, बल्कि जिम्मेदार मैनेजर और सीनियर मैनेजमेंट को भी व्यक्तिगत रूप से जवाबदेह ठहराया जाएगा। सुरक्षा चूक की स्थिति में संस्थागत जिम्मेदारी तय की जाएगी।

DGCA-Aviation Policy

DGCA New SOP: पायलटों के लिए कड़ी चेतावनी

जो पायलट फ्लाइट ड्यूटी टाइम लिमिटेशन (एफडीटीएल) का उल्लंघन करेंगे या निर्धारित सेफ्टी मिनिमा से नीचे लैंडिंग की कोशिश करेंगे, उनका लाइसेंस पांच साल तक के लिए निलंबित किया जा सकता है। इसके अलावा, जो ऑपरेटर कम्प्लायंस मानकों को पूरा नहीं करेंगे, उन पर भारी जुर्माना लगाया जाएगा और उनका लाइसेंस या परमिट भी सस्पेंड किया जा सकता है।

पुराने विमानों और ओनरशिप बदलाव पर नजर

डीजीसीए ने कहा है कि पुराने विमानों और जिनके स्वामित्व में हाल ही में बदलाव हुआ है, उन पर विशेष निगरानी रखी जाएगी। इसके अलावा, जो एनएसओपी अपनी खुद की मेंटेनेंस, रिपेयर और ओवरहॉल (एमआरओ) सुविधा संचालित करते हैं, उनका विशेष ऑडिट किया जाएगा। यदि मानकों में कमी पाई गई, तो उन्हें अप्रूव्ड एमआरओ संगठन को मेंटेनेंस आउटसोर्स करना अनिवार्य होगा।

DGCA Spicejet-Zero Tolerance Policy

DGCA Zero Tolerance Policy: मौसम संबंधी फैसलों पर फोकस

रेगुलेटर ने कहा कि मौसम से जुड़े कई हादसे वास्तविक मौसम की अनिश्चितता से ज्यादा गलत निर्णय लेने का परिणाम होते हैं। इसलिए सभी ऑपरेटरों को रियल-टाइम वेदर अपडेट सिस्टम स्थापित करने और निर्धारित स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (एसओपी) का सख्ती से पालन करने का निर्देश दिया गया है। पायलटों की नियमित ट्रेनिंग में वेदर अवेयरनेस, रिस्क असेसमेंट और अनकंट्रोल्ड परिस्थितियों में निर्णय लेने की क्षमता पर विशेष जोर दिया जाएगा। मार्च की शुरुआत में एसओपी के स्पेशल सेफ्टी ऑडिट के फेज-1 के पूरा होने के बाद शेष एनएसओपी को कवर करते हुए फेज-2 शुरू किया जाएगा।

DGCA Zero Tolerance Policy: एक्सपर्ट्स की राय

एविएशन विशेषज्ञों का मानना है कि ये कदम निजी जेट, चार्टर फ्लाइट और एयर एम्बुलेंस सेवाओं में सुरक्षा ढांचे को मजबूत करेंगे। लगातार बढ़ते कॉरपोरेट एविएशन ट्रैफिक के बीच यह सुनिश्चित करना जरूरी हो गया है कि परिचालन, मेंटेनेंस और पायलट प्रशिक्षण अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप हों। डीजीसीए का यह सख्त रुख संकेत देता है कि आने वाले समय में एविएशन सेक्टर में पारदर्शिता, जवाबदेही और सेफ्टी कल्चर को नई प्राथमिकता दी जाएगी।

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