Viksit Bharat 2047 की उड़ान में एआई बनेगा गेमचेंजर, ‘ India AI Impact summit 2026’ में गूंजी वैश्विक धमक, भविष्य निर्माण का खाका तैयार

खबर सार :-
‘viksit bharat 2047’ के लक्ष्य में एआई परिवर्तनकारी भूमिका निभाने को तैयार है। इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 ने भारत की तकनीकी क्षमता और वैश्विक नेतृत्व को मजबूती दी है। नवाचार, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और स्टार्टअप संस्कृति के सहारे भारत भविष्य की अर्थव्यवस्था गढ़ रहा है। हालांकि, विकास के इस मंच पर राजनीतिक संतुलन और रचनात्मक संवाद भी उतना ही आवश्यक है।

Viksit Bharat 2047 की उड़ान में एआई बनेगा गेमचेंजर, ‘ India AI Impact summit 2026’ में गूंजी वैश्विक धमक, भविष्य निर्माण का खाका तैयार
खबर विस्तार : -

Viksit Bharat 2047: राष्ट्रीय राजधानी में आयोजित इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 ने यह स्पष्ट कर दिया कि ‘विकसित भारत 2047’ का सपना अब केवल एक दृष्टि नहीं, बल्कि तकनीक-संचालित रणनीति के रूप में आकार ले रहा है। डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी रिसर्च फाउंडेशन के निदेशक बिनय कुमार सिंह ने न्यूज एजेंसी आईएएनएस से बातचीत में कहा कि भारत कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के क्षेत्र में तीव्र गति से आगे बढ़ रहा है और 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने के लक्ष्य में एआई की भूमिका निर्णायक होगी।

उन्होंने कहा कि जब भारत अपनी आजादी के 100 वर्ष पूरे करेगा, तब एआई देश के भविष्य निर्माण का प्रमुख आधार बनेगा। उनका मानना है कि एआई केवल तकनीकी उन्नति का माध्यम नहीं, बल्कि शासन, सुरक्षा, स्वास्थ्य, शिक्षा और उद्योग जैसे क्षेत्रों में संरचनात्मक बदलाव लाने का सशक्त साधन है।

एआई: नवाचार, विकास और आत्मनिर्भरता का नया इंजन

बिनय कुमार सिंह ने जोर देकर कहा कि जब भी विकास की चर्चा होती है, आधुनिक प्रौद्योगिकी उसकी धुरी होती है। आज के दौर में एआई को नजरअंदाज करना संभव नहीं है। उन्होंने बताया कि एआई शिखर सम्मेलन इस बात का प्रमाण है कि भारत भविष्य की तकनीकों के साथ कदम मिलाकर आगे बढ़ रहा है। समिट में 100 से अधिक देशों के प्रतिनिधियों और वैश्विक तकनीकी विशेषज्ञों की भागीदारी ने भारत की बढ़ती साख को प्रमाणित किया। नैनीताल स्थित कुमाऊं विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर दीवान सिंह रावत ने इसे विश्वस्तरीय आयोजन बताते हुए कहा कि भारत के एआई योगदान को वैश्विक स्तर पर स्वीकार किया गया है।

India AI Impact Summit 2026

ड्रग डिस्कवरी से डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर तक में एआई की क्रांति

प्रो. रावत ने उदाहरण देते हुए बताया कि दवा खोज (ड्रग डिस्कवरी) जैसे क्षेत्र में जहां पहले 15 से 18 वर्ष लगते थे, अब एआई की मदद से यह प्रक्रिया 5 से 6 वर्षों में पूरी की जा सकती है। इससे न केवल लागत घटेगी, बल्कि जीवन रक्षक दवाएं तेजी से आम जनता तक पहुंच सकेंगी। उन्होंने डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, हाईवे निर्माण, और डिजिटल लेन-देन में भारत की प्रगति का उल्लेख करते हुए कहा कि सरकार द्वारा स्टार्टअप संस्कृति को बढ़ावा देने से एआई विकास को नई दिशा मिली है। भारत में बढ़ती स्टार्टअप इकोसिस्टम और डिजिटल भुगतान प्रणाली ने तकनीकी नवाचार के लिए मजबूत आधार तैयार किया है।

समिट में विरोध प्रदर्शन पर विवाद, राजनीति बनाम विकास की बहस

समिट के दौरान यूथ कांग्रेस कार्यकर्ताओं द्वारा किए गए प्रदर्शन की बिनय कुमार सिंह ने कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा कि यह मंच देश की तकनीकी प्रगति को प्रदर्शित करने के लिए था, न कि राजनीतिक विरोध के लिए। उनके अनुसार, इस तरह की घटनाएं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश की छवि को प्रभावित करती हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी को इस घटना की निंदा करनी चाहिए थी और अपनी पार्टी के भीतर अनुशासन सुनिश्चित करना चाहिए था। उनका मत था कि विकास के मुद्दों पर राजनीति से ऊपर उठकर राष्ट्रीय हित को प्राथमिकता देनी चाहिए। वहीं, प्रो. रावत ने विरोध को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि लोकतंत्र में मतभेद स्वाभाविक हैं, लेकिन उन्हें रचनात्मक और तथ्य-आधारित तरीके से रखा जाना चाहिए। उन्होंने पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज का उदाहरण देते हुए कहा कि मजबूत और तर्कसंगत विपक्ष लोकतंत्र को सशक्त बनाता है।

AI Security and Stability-Viksit Bharat Sankalp@2047

सुरक्षा और स्थिरता: विकास के समानांतर प्रयास

बिनय कुमार सिंह ने यह भी उल्लेख किया कि सरकार ने नक्सलवाद को समाप्त करने के लिए 31 मार्च तक की समयसीमा तय की है और लगातार हो रहे आत्मसमर्पण सकारात्मक संकेत हैं। उनका कहना था कि आंतरिक सुरक्षा और तकनीकी प्रगति साथ-साथ चलेंगी, तभी विकसित भारत का लक्ष्य साकार होगा।

वैश्विक मंच पर भारत की बढ़ती स्वीकार्यता

‘इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026’ ने यह सिद्ध किया कि भारत अब तकनीकी उपभोक्ता नहीं, बल्कि नवाचार का नेतृत्वकर्ता बन चुका है। एआई आधारित समाधान, शोध और स्टार्टअप मॉडल ने दुनिया का ध्यान आकर्षित किया है। भारत की डिजिटल नीतियां और प्रौद्योगिकी-संचालित शासन मॉडल विकासशील देशों के लिए प्रेरणा बन रहे हैं।

 

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