Gymkhana Club Case: 600 परिवारों पर टूटेगा कहर! पड़ेगी दोहरी मार
खबर सार :-
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के प्रतिष्ठित दिल्ली जिमखाना क्लब के परिसर को खाली करने का आदेश जारी हो चुका है। इस आदेश के बाद वहां काम कर रहे 600 कर्मचारियों के सामने नौकरी का बड़ा संकट खड़ा हो गया है। उनका कहना है कि कोरोना महामारी की वजह से पहले ही वे आर्थिक संकट झेल रहे हैं। इस आदेश से उन्हें दोहरी मार पड़ने वाली है।
खबर विस्तार : -
नई दिल्ली: राष्ट्रीय राजधानी नई दिल्ली के प्रतिष्ठित दिल्ली जिमखाना क्लब को केंद्र सरकार की ओर से बड़ा झटका लगा है। सरकार ने सार्वजनिक उद्देश्य, रक्षा बुनियादी ढांचे और राष्ट्रीय सुरक्षा का हवाला देते हुए क्लब को 5 जून 2026 तक सफदरजंग रोड स्थित अपना परिसर खाली करने का निर्देश दिया है। इस फैसले के बाद क्लब प्रशासन के साथ-साथ वहां काम करने वाले सैकड़ों कर्मचारियों के सामने भविष्य को लेकर गंभीर चिंता पैदा हो गई है।
1913 में लीज पर दी गई थी जमीन
जानकारी के अनुसार, क्लब को यह जमीन वर्ष 1913 में लीज पर दी गई थी, जबकि मौजूदा भवन का निर्माण 1930 में किया गया था। कई दशकों से यह क्लब देश की राजधानी के प्रमुख सामाजिक और सांस्कृतिक केंद्रों में गिना जाता रहा है। हालांकि अब केंद्र सरकार द्वारा जारी आदेश के बाद क्लब के अस्तित्व और वहां काम करने वाले कर्मचारियों की आजीविका पर सवाल खड़े हो गए हैं।
600 से ज्यादा कर्मचारी कार्यरत
क्लब में कार्यरत कर्मचारियों ने इस फैसले पर गहरी चिंता जताई है। यहां वेटर के रूप में काम कर रहे रोहित बनर्जी ने कहा कि क्लब में 600 से अधिक कर्मचारी कार्यरत हैं और लगभग 3000 लोगों का परिवार प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से इस रोजगार पर निर्भर है। उन्होंने कहा कि कोरोना महामारी के दौरान आर्थिक स्थिति पहले ही कमजोर हो चुकी थी और अब अचानक परिसर खाली करने के आदेश ने कर्मचारियों को असमंजस की स्थिति में डाल दिया है।
मानसिक तनाव में कर्मचारी
रोहित बनर्जी के अनुसार, सुरक्षा कारणों का हवाला देकर इतनी जल्दी जगह खाली करवाने से कर्मचारियों के सामने रोज़गार का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। उन्होंने कहा कि कई कर्मचारी वर्षों से यहां सेवा दे रहे हैं और अब अचानक नौकरी छूटने का खतरा उनके परिवारों के लिए बड़ी समस्या बन सकता है।
क्लब में पिछले 36 वर्षों से कार्यरत गणेश कुमार ने भी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि उनकी पूरी जिंदगी इसी नौकरी के सहारे चली है। बच्चों की पढ़ाई, घर का खर्च और पारिवारिक जिम्मेदारियां इसी आय पर निर्भर हैं। उन्होंने कहा कि इस उम्र में नई नौकरी मिलना आसान नहीं है और अचानक मिले नोटिस ने मानसिक तनाव बढ़ा दिया है।
वहीं, वर्ष 2006 से क्लब में काम कर रहे अनिल कुमार ने कहा कि सरकार के इस फैसले का सबसे अधिक असर कर्मचारियों पर पड़ेगा। उन्होंने कहा कि यदि क्लब बंद होता है तो सैकड़ों परिवार आर्थिक संकट में आ जाएंगे। कर्मचारियों का कहना है कि सरकार को इस फैसले पर पुनर्विचार करना चाहिए या प्रभावित कर्मचारियों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित करनी चाहिए। फिलहाल क्लब प्रशासन और कर्मचारी सरकार के अगले कदम का इंतजार कर रहे हैं। आदेश के बाद पूरे परिसर में अनिश्चितता और चिंता का माहौल बना हुआ है।
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